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जीवन संवाद : परीक्षा से पहले स्नेह का लेप!

News18Hindi
Updated: December 19, 2019, 4:35 PM IST
जीवन संवाद : परीक्षा से पहले स्नेह का लेप!
जीवन संवाद

Jeevan Samvad: स्कूल के हित बच्चों से गहराई से जुड़े होते हैं. इसलिए, वह बच्चों के मन, हितों को अनदेखा करते हैं. बच्चा आपका है, स्कूल का नहीं. इसे गहराई से समझिए.

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  • Last Updated: December 19, 2019, 4:35 PM IST
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अलग-अलग मौसम में बच्चों की त्वचा को बचाने के लिए तरह-तरह की क्रीम लगाई जाती है. बच्चों की परवरिश में बदलते मौसम के अनुकूल चीजों का ध्यान रखना होता है. ‌ परीक्षा भी ऐसा ही एक कठिन मौसम है. जिसमें बच्चों का ऐसे ही ध्यान रखना चाहिए, जिस तरह कपकपाती ठंड में उनका खयाल रखने के लिए करना होता है.

हम परीक्षा को पहले स्वयं ठीक से महसूस कर लें, उसके बाद ही बच्चे को उसके लिए सही तरह से तैयार किया जा सकता है. हम उसे इस कठिन मौसम में अकेले स्कूल और शिक्षकों के सहारे नहीं छोड़ सकते. स्कूल के हित बच्चों से गहराई से जुड़े होते हैं. इसलिए, वह बच्चों के मन, हितों को अनदेखा करते हैं. बच्चा आपका है, स्कूल का नहीं. इसे गहराई से समझिए.

बच्चे की परीक्षा से पहले खुद को तैयार करिए. परीक्षा का कोई एक दिन खराब भी गुजर सकता है. आपको सबसे पहले उस खराब दिन के लिए खुद को तैयार करना चाहिए. आप तैयार रहते हैं तो बच्चे को अच्छी तरह समझाने में आसानी होती है. ऐसे मुश्किल वक्त में अगर आप भी गुस्से, चिड़चिड़ेपन के साथ उससे पेश आएंगे तो मुश्किल हो जाएगी. आपको बच्चे को समझाना होगा कि आप अपनी अपेक्षा उस पर नहीं थोप रहे. उसे आपकी अपेक्षा के अनुसार प्रदर्शन नहीं करना है बल्कि उसे अपना सर्वोत्तम देना है.

विश्व का इतिहास ऐसे उदाहरणों से भरा हुआ है जहां कम नंबर लाने वाले बच्चों ने ही दुनिया को सबसे अधिक प्रभावित किया है.


यहां अच्छे नंबर लाने वाले बच्चों के प्रयास को हम कम आंकने की बात नहीं कर रहे हैं, बल्कि यह बताने की कोशिश कर रहे हैं की दुनिया में टॉपर कुछ ही लोग हो सकते हैं. किसी के सबसे अधिक नंबर लाने के पीछे बहुत सारे कारण हो सकते हैं. ठीक, ऐसा ही उन बच्चों के साथ भी है जिनके नंबर आपकी दृष्टि में कम आए हैं. इसलिए इस बात को समझना चाहिए कि बच्चे का संपूर्ण विकास हो रहा है कि नहीं. उसे केवल रटंतू तोता बनाकर हम कुछ हासिल नहीं कर सकते. उसके भीतर गणित, विज्ञान के साथ ही प्रेम और स्नेह का भी विकास होना जरूरी है. एक बच्चा जो मानवीय मूल्यों में बहुत बेहतर है, उसकी रुचि गणित और विज्ञान के अलावा दूसरे विषयों में हैं, उसमें भी अपार संभावनाएं हैं.


हमें इन सब उम्मीदों के लिए मन को तैयार करना होगा. आशा और उम्मीद से भरा हुआ मन ही दूसरे को प्रेम दे सकता है. इसलिए जरूरी है कि परीक्षाा के पहले हम अपने मन को प्रेम और प्रसन्नता से अच्छी तरह भर लें. इस बात को सलीके से समझ लें कि हमें किसी भी कीमत पर अपने बच्चे की तनाव से रक्षा करनी है.
पहले हमें स्वयं को तनाव संभालने के लिए तैयार करना होगा, उसके बाद ही हम बच्चे को इस तनाव से बचाने की स्थिति में होंगे.


हमें बच्चे के मन पर पड़ने वाले दबाव, मनोवैज्ञानिक तनाव के लिए उतना ही सजग होना चाहिए जैसे हम उसके बुखार के दिनों में होते हैं. बुखार में हम बच्चे को दवा के साथ भरपूर प्रेम भी देते हैं. उसे बुखाार के लिए डांटते, धमकाते नहीं हैं. परीक्षा के दिनों में भी हमें ऐसे ही रहना है. जिस दिन हम कम नंबर आने पर बच्चे के साथ सब उत्सव मनाना सीख जाएंगे, सारा तनाव हवा में उड़ जाएगा.

पता: दयाशंकर मिश्र (जीवन संवाद)
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First published: December 19, 2019, 12:44 PM IST
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