#जीवनसंवाद : स्वयं को मुक्त करना!

दयाशंकर मिश्र | News18Hindi
Updated: September 11, 2019, 8:47 AM IST
#जीवनसंवाद  : स्वयं को मुक्त करना!
जीवन संवाद

Jeevan Samvad: जिस तरह निजी कर्जदाता ऊंची दरों पर ब्याज देते हैं, कर्जदार पूरी उम्र ब्याज ही देता रहता है. उसके बाद भी कर्ज़ नहीं उतरता. मन पर बोझ की दशा भी ऐसी ही है! अगर समय पर इससे मुक्ति न मिले तो ब्याज के साथ मूल भी बकाया रहता है.

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हम बहुत सी चीजों का बोझ लादे रहते हैं. इससे धीरे-धीरे मन भारी होता जाता है. जिस तरह निजी कर्जदाता ऊंची दरों पर ब्याज देते हैं, कर्जदार पूरी उम्र ब्याज ही देता रहता है. उसके बाद भी कर्ज़ नहीं उतरता. मन पर बोझ की दशा भी ऐसी ही है! अगर समय पर इससे मुक्ति न मिले तो ब्याज के साथ मूल भी बकाया रहता है. इसलिए, मन पर हर दिन चढ़ने वाले बोझ से मुक्ति का नियमित प्रयास हो!

राजस्थान, जयपुर से संजीव/जया अग्रवाल ने लिखा है, 'छोटी-छोटी बातें अक्सर दिमाग में भरी पड़ी रहती हैं. इनसे रिश्ते सुलझने की जगह उलझते अधिक हैं. इसका क्या किया जाए.' मेरे विचार में इसका सबसे सरल, सहज और विनम्र तरीका है, स्वयं को मुक्त करते रहना!

इसे ऐसे समझिए. दो दिन पहले जल्दबाजी, ठीक से न समझ पाने की वजह से मेरे प्रिय मित्र ने‌ मेरी कही बात के ठीक उलट व्यवहार किया. मैंने पूरी बात समझे बिना ही नाराजगी व्यक्त कर दी. मुझे बाद में महसूस हुआ कि इसमें मेरी गलती अधिक है.


मैंने अपनी भावना प्रकट कर दी. इस प्रक्रिया में एक घंटा लग गया, क्योंकि मुझे दूसरे जरूरी काम करने थे. लेकिन एक घंटे देर से सही मैंने दिन भर की ऊर्जा नष्ट होने से बचा ली. दूसरी मेरे इस व्यवहार से मित्र कुछ दुविधा असुविधा महसूस कर रहे थे, वह भी तुरंत सामान्य हो गए. मैं समझ सकता हूं उनको भी वैसी ही पीड़ा असुविधा हुई होगी जैसे मुझे हुई.

जैसे ही मैंने अपनी भूल स्वीकार की वह एकदम पिघल गए. जो तनाव 'घर' करने की कोशिश कर रहा था, स्नेह के छोटे से स्पर्श से हवा हो गया. उन्होंने कहा इसकी क्या जरूरत थी. मैं आपको अच्छे से जानता हूं. मैंने कहा, 'आप अपनी जगह ठीक हैं लेकिन मैं अपने बोझ से स्वयं को मुक्त कर लेना चाहता हूं. ऐसा नहीं करने पर तनाव मन में भरा रहता.'

ऐसा करने पर भी जरूरी नहीं कि मन पूरी तरह असुविधा की स्थिति से बाहर निकल पाए, लेकिन नहीं कहने पर, मन में चीजों को दबाए रखने पर इस बात की आशंका अधिक होती है कि चीजें खराब होती रहें. हर दिन इस तरह की कुछ ना कुछ घटनाएं जिंदगी में जुड़ती रहती हैं.


यह मन के लिए बहुत वजनी साबित होती हैं. इसलिए, जितना संभव हो ऐसे बोझ को हटाते रहें. मन हल्का रहेगा. स्वस्थ और प्रसन्न भी. स्वयं को चीजों से मुक्त करते जाना, उनकी सफाई और शुद्धि के लिए सहज सरल प्रक्रिया है. इसलिए दूसरों से क्षमा मांगना, उन्हें क्षमा करते रहना, अपने लिए सबसे जरूरी काम है. इससे हम टनों वजनी बोझ से सहज मुक्त हो जाते हैं!
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पता : दयाशंकर मिश्र (जीवन संवाद)
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First published: September 11, 2019, 8:47 AM IST
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