#जीवन संवाद : प्रेरणा कहां से आती है!

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Updated: September 8, 2019, 10:34 AM IST
#जीवन संवाद : प्रेरणा कहां से आती है!
जीवन संवाद

Jeevan Samvad: मनुष्य अंततः स्वयं से सबसे अधिक प्रेरणा ग्रहण करता है. उसकी अंतः प्रेरणा जीवन का सबसे बड़ा आधार है. इसलिए इसे निरंतर ऊर्जा मिलनी चाहिए!

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  • Last Updated: September 8, 2019, 10:34 AM IST
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इस बात पर हम अक्सर बहुत जोर देते हैं कि अगर परिस्थितियां 'हमारे' अनुकूल होतीं तो हम बहुत कुछ कर लेते. इसका अर्थ है कि हम बाह्य जगत से अधिक प्रेरित होते हैं. दूसरी ओर उपलब्ध साहित्य, शोध और अनुभव बताते हैं कि मनुष्य अंततः स्वयं से सबसे अधिक प्रेरणा ग्रहण करता है. उसकी अंतः प्रेरणा जीवन का सबसे बड़ा आधार है. इसलिए इसे निरंतर ऊर्जा मिलनी चाहिए! इस ऊर्जा को सही तरह से संरक्षित रखने से हमारी प्रेरणा सृजनात्मक बनी रहती है. हम दुनिया की ओर कम और अपनी ओर कहीं ज्यादा देखते हैं. यह जीवन सूत्र हमें अनेक कठिनाइयों, संकटों से बचाने में उपयोगी है.

हमारी विशेषता और कमजोरी में बहुत अंतर नहीं होता. अंतर केवल उनके सही ढंग से प्रबंधन में होता है. हम ऊर्जा कहां से, कैसे ग्रहण करते हैं, यह सबसे महत्वपूर्ण है. हमारे आसपास सकारात्मक और नकारात्मक दोनों ही ऊर्जा बिखरी हैं. ब्रह्मांड में किसी भी चीज की कमी नहीं है. सब कुछ केवल इस बात पर निर्भर करता है कि हम ग्रहण क्या करते हैं, कैसे करते हैं. महात्मा बुद्ध एक शव यात्रा को देखकर वैराग्य चुन लेते हैं.




दूसरे, अपना जीवन उनके साथ जाने, उसे देखते हुए गुजार देते हैं. समाज में मौजूद कुरीतियों के लिए कोई एक व्यक्ति हमारेे ही बीच से खड़ा होकर नायक बन जाता है, बाकी सबकी जिंदगी वैसे ही चलती है. तो, हमारे आसपास जो कुछ भी घट रहा है, वह सब के लिए बहुत हद तक एक जैसा है. हम उससे क्या ग्रहण करते हैं, यह बहुत हद तक हम पर ही निर्भर है. इसलिए, भीतर धड़कने वाली ऊर्जा को सही तरीके से संभालना बहुत जरूरी है. यह उदाहरण कई बार हम सुन, देख चुके हैं, लेकिन यहां प्रासंगिक है, इसलिए दोहराया जा रहा है. सचिन तेंदुलकर और विनोद कांबली को लगभग एक जैसा प्रतिभाशाली बताया जाता है. उनके कोच, विशेषज्ञ इस बात पर सहमत रहे हैं कि विनोद भी सचिन जैसे ही प्रतिभा संपन्न थे. इतना ही नहीं, विनोद के पास आगे चलकर सहारा देने वाला सचिन जैसा सक्षम, सबल, सुचिंतित, सुविचार मित्र भी था, उसके बाद भी विनोद अपनी क्षमता, सृजनात्मकता की केवल झलक दिखला सके.

उदाहरण पुराना है, लेकिन इसमें जीवन के गहरे, अद्भुत सूत्र छुपे हुए हैं. हमारे भीतर का ठहराव, स्वयं को संभालने, संयमित करने वाली ऊर्जा ही सबसे महत्वपूर्ण है. यह ऊर्जा ही है जो उन पलों में खड़े रहने का साहस देती है जब संसार हमारे विरुद्ध होता है. 'डियर जिंदगी : जीवन संवाद ' को हर दिन बड़ी संख्या में पाठकों से प्रतिक्रियाएं मिलती हैं. इनमें सबसे अधिक बात इस पर ही होती है कि 'मेरे लिए सही वातावरण नहीं है', अगर ऐसा हो जाए तो मैं कमाल कर दूंगा/दूंगी. ‌‌‌‌


वैसा कभी होता नहीं, जैसा हमेशा हम चाहते हैं. यह दुनिया हमारी चाहत से अधिक इच्छाशक्ति से चलती है. इसलिए, ऐसेे वातावरण में जहां मंदी पांव पसार रही है. हमारे आसपास रोजगार, नौकरी के संकट बढ़ रहे हैं, हमें भी पहले से कहीं अधिक मजबूत और सबल बने रहने की जरूर है. हमेंं दूसरे की नकल में गहराई से अंतर करने की जरूरत है. दुनिया का आर्थिक संकट अपनी जगह है, लेकिन यह भी तो सच है कि हमने दूसरों जैसी जीवनशैली अपनाने के फेर में बड़े संकट खड़े कर लिए हैं. आर्थिक मंदी यूरोप और अमेरिका के रास्ते भारत में दाखिल हो चुकी है. यह मत समझिए कि आपसे संकट दूर है. क्योंकि इसकी कड़ियां जीवन से बारीकी से जुड़ी हुईं हैं. हम सब एक दूसरे से कहीं न कहीं जुड़े हुए हैं.

#जीवनसंवाद : खुद तक वापसी का रास्ता!
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दूसरों का संकट हमारी ओर नहीं आएगा, ऐसा मानना स्वयं से छल करना है. इस छल के प्रति सजग बनिए, जीवनशैली को अपने अनुरूप बनाइए, दूसरों जैसा नहीं! अपनी ऊर्जा की रक्षा कीजिए, क्योंकि यही आपको जीवन के अनेक संकटों से सरलता से बचा सकती है.

पता : दयाशंकर मिश्र (जीवन संवाद)
Network18
एक्सप्रेस ट्रेड टावर, 3rd फ्लोर, A विंग
सेक्टर 16 A, फिल्म सिटी, नोएडा (यूपी)
ईमेल : dayashankarmishra2015@gmail.com
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First published: September 8, 2019, 9:58 AM IST
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