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#जीवनसंवाद: क्या टूटा होगा कुशल के भीतर!

दयाशंकर मिश्र | News18Hindi
Updated: January 3, 2020, 3:22 PM IST
#जीवनसंवाद: क्या टूटा होगा कुशल के भीतर!
जीवन संवाद

Jeevan Samvad: एक-दूसरे का साथ केवल जश्न में नहीं देना होता. महफ़िल, दावतों में साथ रहने से स्वभाव की निराशा, दुख की छाया को नहीं पकड़ा जा सकता. इसके लिए अपने दोस्त, चाहने वालों के साथ समय बिताना होगा.

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  • Last Updated: January 3, 2020, 3:22 PM IST
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जिस तरह समंदर के बीच में बर्फ के पहाड़ का ठीक-ठीक अंदाजा नहीं लगता. भारी पहाड़ को किला मान लेने की गलती बड़े-बड़े जहाज के कप्तान कर लेते हैं. कुछ इसी तरह बाहर से सकुशल, सुंदर, मजबूत और सफल मन के भीतर बैठे अवसाद का भी पता नहीं चलता. हम बाहर से दिखने के आधार पर व्यक्तियों के बारे में अनुमान लगाते रहते हैं. हम मान कर चलते हैं, अरे! उसके जीवन में तो सब कुछ ठीक ही होगा. जबकि ऐसा होता नहीं. हमारे भीतर क्या-क्या टूट रहा है, इस तरफ बहुत कम लोगों का ध्यान जाता है.

आत्महत्या से कुछ दिन पहले पत्नी से मिलने गए थे कुशल पंजाबी, यह थी वजह...

भीतर की पीड़ा को समय रहते अगर नहीं पकड़ा जाएगा तो उसके परिणाम कुछ इसी तरह हो सकते हैं, जैसे कुशल पंजाबी का निर्णय. 42 बरस के कुशल पंजाबी की छवि हंसमुख, फिटनेस प्रेमी और लोकप्रिय अभिनेता की थी. उनके पास ठीक-ठाक काम आ रहा था. उन्होंने अपने सुसाइड नोट में जीवन को अलविदा कहने का कोई ठोस कारण नहीं बताया है. हां, उन्होंने जिस तरह से अपनी संपत्ति का बंटवारा किया है, उससे यह कहा जा रहा है कि अपनी पत्नी के साथ उनके संबंध तनावपूर्ण थे.

उन्होंने अपनी संपत्ति को दो भागों में बांटा है. तीन साल के बेटे को पचास प्रतिशत, शेष माता-पिता और बहन को दिया है. कुशल की मां और दोस्तों ने कुशल के इस निर्णय के लिए घरेलू तनाव और फ्रांसीसी मूल की पत्नी के साथ संबंधों को ही जिम्मेदार बताया है.



पांच साल पहले ही कुशल का विवाह हुआ था. हालांकि दोनों लंबे समय से एक-दूसरे के संपर्क में थे. उनका तीन साल का बेटा है. वह लगभग दो साल से पत्नी से अलग रह रहे थे. कुशल पंजाबी ने छोटी-बड़ी दस फिल्मों में काम किया. उन्होंने बीस से ज्‍यादा टीवी शो में अभिनय किया.

कुशल पर कोई बड़ा कर्ज़/आर्थिक तंगी नहीं बताई गई है. 1995 से वे लगातार अभिनय जगत में सक्रिय हैं. उन्हें लगातार काम मिलता रहा है. इस तरह से जो बातें अब तक सामने आई हैं उसमें कुशल की आत्महत्या के पीछे विशुद्ध रूप से तनाव, डिप्रेशन, संबंधों को ठीक तरह से न समझने और नहीं सुलझाने की बात सामने आई है.
'जीवन संवाद' में हम निरंतर इस बात पर संवाद करते रहे हैं कि अगर किसी वजह से संबंधों को ठीक नहीं किया जा सकता तो उसकी सजा स्वयं को न दें. अपने घर वालों को न दें. कुशल अपने माता-पिता और बेटे कियान को हमेशा के लिए ऐसे सवालों के बीच छोड़ गए हैं जिनका कोई ठोस उत्तर नहीं है.

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हम किसी के प्रेम से इतना कैसे टूट सकते हैं कि जिन्होंने हमें पाल पोस कर तैयार किया है, उनसे सारे संबंधों को ही भूल जाएं. पांच साल पुराने रिश्ते से तंग आकर कुशल ने जीवन को अलविदा कहा लेकिन ऐसा करते हुए वह अपने माता-पिता के साथ 42 वर्ष पुराने रिश्ते को भूल गए. माता-पिता अब कैसे जिएंगे. उनके जीवन का हर दिन कितना भारी होगा! पचास प्रतिशत संपत्ति से संभव है उनको आर्थिक परेशानी ना उठानी पड़े लेकिन उनके हृदय में स्थाई पीड़ा घर कर गई है, उसका क्या! उसे किसी संपत्ति से कम नहीं किया जा सकता.

तनाव, डिप्रेशन कितना बड़ा खतरा है, कुशल के एक निर्णय से इसकी क्रूर झलक हमारे सामने है. उनके मित्र चेतन हंसराज ने डिप्रेशन के चलते आत्महत्या की बात को सबसे पहले साझा किया. हम ऐसे समय की ओर बढ़ रहे हैं, जहां अति से पहले किसी भी चेतावनी की ओर हमारा ध्यान ही नहीं जाता. अपने किसी ऐसे व्यक्ति के बारे में जिससे हम प्रेम करते हैं, उसे अकेला नहीं छोड़ना है. एक-दूसरे का साथ केवल जश्न में नहीं देना है. महफ़िल, दावतों में साथ रहने से स्वभाव की निराशा, दुख की छाया को नहीं पकड़ा जा सकता.


इसके लिए अपने दोस्त, चाहने वालों के साथ समय बिताना होगा. मन जब दर्द की गठरी बांध लेता है, तो अकेला पड़ जाता है. ऐसे में मदद वही करते हैं, जो उससे प्रेम करते हैं, उसके कुछ होने से नहीं. ऐसे ही साथी/सखा/रिश्तेदार परिजन उस उदासी की छाया को पकड़ पाएंगे जो मन के भीतर धीरे-धीरे घर कर जाती है.

कुशल के भीतर ऐसा कुछ टूटा था, जिसका बाहरी दुनिया से उतना अधिक संबंध नहीं था, जितना उसके अपने भीतर से था. प्रेम करना अच्छा है. रिश्ते निभाना भी अच्छा है. लेकिन किसी भी रिश्ते की कीमत दूसरे का जीवन नहीं होना चाहिए.

अपने मन को मजबूत बनाइए. उसे कांच की तरह कमजोर, सजावटी बनाने की जगह उसे रक्षा कवच की तरह बनाइए, जो शरीर पर बड़े से बड़ा आक्रमण भी विफल कर देता है. मन की मजबूती का ख्याल वैसे ही रखिए जैसे तन की खूबसूरती और मजबूती का रखते हैं.

पता : दयाशंकर मिश्र (जीवन संवाद)
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First published: December 30, 2019, 9:17 AM IST
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