#जीवनसंवाद: प्रेम का याद रहना!

#जीवनसंवाद: प्रेम का याद रहना!
जीवन संवाद

Jeevan Samvad: अगर जीवन को प्रेम शांति और सुकून से भरना है, तो उसे सुखद स्मृतियों का केंद्र बनाइए. प्रेम में गहरी शक्ति है, उसके सहारे किसी भी अंधेरे से सरलता से बाहर निकला जा सकता है.

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हमारे मन की सबसे बड़ी समस्या क्या है. यह कि हम कैसी परिस्थिति से गुजर रहे हैं/अथवा हम कैसी चीज़ों से घिरे हैं. अगर आप मुझसे यही प्रश्न करें तो मैं कहूंगा इनमें से कुछ भी नहीं. असली प्रश्न है, हमारे मन को याद क्या रहता है. हमारी स्मृति में क्या बसा है. कभी सोचा है, हमारे सिनेमा की सबसे बड़ी शक्ति क्या रही है. नायक/नायिका के जीवन में कितनी ही उथल-पुथल क्यों ना रही हो, उसका अंत सुखांत क्यों होता है. और अच्छा ही है कि सुखांत होता है. क्योंकि उससे दर्शक रस के साथ घर लौटता है. यह जानते हुए भी कि जो कुछ पिछले दो-तीन घंटे में उसके साथ घटा है वह केवल आभासी था, वह गहराई से उसके साथ जुड़ जाता है.

क्योंकि वह आत्मीयता महसूस करता है किरदार के साथ. सुखांत इसलिए जरूरी है ताकि वह ऊर्जा लेकर लौटे दुख और निराशा लेकर नहीं. क्योंकि हमारा समाज बहुत अधिक विषमता आधारित है. हम बुनियादी चीजों के संघर्ष में हैं. इसलिए उसे कहीं से तो आत्मीयता चाहिए. कुछ लोग दर्शन की तलाश में हो सकते हैं, कुछ लोग सिनेमा से बड़े प्रश्नों की अपेक्षा कर सकते हैं लेकिन अधिकांश लोगों के लिए इन सबसे परे वह सुकून की जगह है. इसका अर्थ यह नहीं कि मैं लोकप्रिय सिनेमा का पक्षधर हूं. मैं केवल इस बात का निवेदन कर रहा हूं कि याद क्या रहता है!

हमारे मन में कड़वाहट तैरती रहती है. वही स्मृतियां तल पर रहती हैं, जिन्होंने हमें कभी न कभी दुखी किया है. दूसरे का अपमान. उसके कहे शब्द, वह जिसे हम निरादर मानते हैं. मन इन्हीं सब से तो घिरा रहता है. इनमें ही अटका रहता है. भले ही उसके लिए माफी मांग ली गई हो लेकिन हम आसानी से माफ नहीं करते. कितनी मजेदार बात है हम स्वयं से ही झूठ बोलते रहते हैं. सामने वाला बार-बार कह रहा है माफ कर दीजिए. आप भी बार-बार कह रहे हैं माफ कर दिया. लेकिन न उसे संतोष कि माफ कर दिया गया है, न आपको इत्मीनान कि वह सच्चे मन से माफी मांग रहा है.







मन बड़ा रंगरेज़ है. जल्दी-जल्दी नए रंग तैयार करता रहता है. उसे उजले के मुकाबले मटमैले रंग पसंद आते हैं. उजले में बहुत सावधानी चाहिए. इसलिए, वह आपको अशांति, क्रोध, अपमान और बदले के रंगों में उलझाए रखता है!

मन पर नजर रखिए ! क्या आपकी जिंदगी में कभी कोमलता नहीं आई! प्रेम का एक क्षण भी नहीं आया. सुख का संगीत कभी सुनाई न दिया. लेकिन यह सब मन बिसरा देता है! इसीलिए, क्रोध, बदला और अपमान आपको घेरे रखते हैं. आप इनसे घिरे रहेंगे तो मन को चैन कैसे आएगा!


घर में गमले में गुलाब होना ही जरूरी नहीं, उसे खिलना भी चाहिए. बिना पूरी तेरे खिले, उसकी खुशबू नहीं फैलती. अगर जीवन को प्रेम, शांति और सुकून से भरना है तो उसे सुखद स्मृतियों का केंद्र बनाइए. प्रेम में गहरी शक्ति है, उसके सहारे किसी भी अंधेरे से सरलता सेे बाहर निकला जा सकता है. प्रेम और जीवन के प्रति आस्था से हम किसी भी संकट का सामना कर सकते हैं!

दयाशंकर मिश्र

संपर्क: ई-मेल: dayashankarmishra2015@gmail.com. आप अपने मन की बात फेसबुक और ट्विटर पर भी साझा कर सकते हैं. ई-मेल पर साझा किए गए प्रश्नों पर संवाद किया जाता है.

(https://twitter.com/dayashankarmi )(https://www.facebook.com/dayashankar.mishra.54)

 

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First published: May 26, 2020, 7:14 AM IST
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