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#जीवनसंवाद: सबसे कीमती!

दयाशंकर मिश्र | News18Hindi
Updated: November 13, 2019, 4:55 PM IST
#जीवनसंवाद: सबसे कीमती!
जीवन संवाद

Jeevan Samvad: मूल्यवान होने के तर्क बहुत निजी, उलझे हुए हैं. मुझे मेरे गांव का पुराना, कच्चा पक्का घर मूल्यवान लग सकता है. तो दूसरी ओर मेरे परिजन शहर में अपने घर को सबसे अधिक मूल्यवान मान सकते हैं. संसार से पूछेंगे तो वह भी शायद भौतिक मूल्य के आधार पर ही कीमत तय करेगा.

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  • Last Updated: November 13, 2019, 4:55 PM IST
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‌आज छोटी-सी कहानी से शुरू करते हैं. गांव में एक फकीर रहा करते थे. लोगों को समझाने का उनका तरीका थोड़ा अलग था. वह हर समय एक कुएं की देखभाल में लगे रहते थे. हर कोई कहता, इस कुएं में आखिर क्या है! वह कहते, समय आने पर बताऊंगा. एक दिन एक युवा अड़ गया. आखिर इस कुएं में क्या है! फकीर ने कहा ' कुएं में ईश्वर है!' उसने कहा, मैं नहीं मानता. फकीर ने उसे कुएं में जाकर झांकने के लिए कहा. उसने झांकते हुए कहा, 'लेकिन यह तो मैं ही हूं.' फकीर ने कहा, ‘सही कहा, अब तुम जान गए ईश्वर कहां है! तुम्हें यह भी समझ में आ गया होगा, सबसे कीमती क्या है!

उस युवक को यह बात कितनी समझ में आई, नहीं मालूम. लेकिन हम सब यह समझने से बहुत दूर हैं कि सबसे कीमती क्या है? हमारी सबसे बड़ी दुविधा यही है कि हम सबसे मूल्यवान चीज़ को संभाल पाने में सक्षम नहीं हैं. हम सब कीमती चीजों के संग्रह में जुटे हुए संग्रहकर्ता से अधिक कुछ और नहीं हैं. हमें लगता है, खुशी बाहर की चीजों पर निर्भर करती है.

इसलिए, हम बाहर-बाहर टहलते हुए मन की ओर से अपना मुंह मोड़े रहते हैं. सबसे कीमती क्या है? वह जो हमें लगता है. वह, जिसे दुनिया कीमती कहती है. ऐसे लोग जिसे कीमती कहते हैं, जिन्हें हम बड़ा मानते हैं. ‌‌‌‌‌


मूल्यवान होने के तर्क बहुत निजी, उलझे हुए हैं. मुझे मेरे गांव का पुराना, कच्चा पक्का घर मूल्यवान लग सकता है. तो दूसरी ओर मेरे परिजन शहर में अपने घर को सबसे अधिक मूल्यवान मान सकते हैं. संसार से पूछेंगे तो वह भी शायद भौतिक मूल्य के आधार पर ही कीमत तय करेगा. इसलिए किसी चीज के मूल्यांकन का कोई भी एक नियम उचित नहीं दिखता. हम जिस तेजी से भाग रहे हैं, वहां सबसे अनमोल अब मन की शांति है. ऐसा क्या है, जिसके पास ठहर कर थोड़ा सा सुकून मिल जाए.


मेरे ख्याल में हमने चार्ल्स डार्विन के 'सबसे मजबूत ही बचेंगे' वाले सिद्धांत को जरूरत से अधिक महत्व देने के साथ ही संपूर्णता में नहीं समझने की भी गलती की है.

सबसे मजबूत किस स्तर पर होंगे? यह प्रश्न तो कभी उठाया ही नहीं गया. बस यही मान लिया गया कि खुद को मशीन की तरह मजबूत और लोमड़ी की तरह चतुर बनाना है. यह सिद्धांत तब तक अधूरा है जब तक मजबूत होने में मन शामिल नहीं होगा. केवल भारत ही नहीं जापान, अमेरिका, ब्रिटेन भी उन देशों में शामिल हो गए हैं जहां मन की कमजोरी सबसे बड़ी चिंता बन रही है. ब्रिटेन ने तो सबसे पहले उदासी और मन की गिरह खोलने के लिए बाकायदा मंत्रालय तक बना दिए.
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सबसे कीमती आप हैं. आपसे बढ़कर कुछ नहीं. सब कुछ आपके होने पर ही है. इसलिए, अपने मन को मजबूत बनाइए. उसे मुश्किलों से लोहा लेने के लिए तैयार कीजिए. मन को छुईमुई नहीं, अपना रक्षा कवच बनाइए! जिससे वह हर संकट में आपकी रक्षा कर सके.

पता: दयाशंकर मिश्र (जीवन संवाद)
Network18
एक्सप्रेस ट्रेड टावर, 3rd फ्लोर, A विंग
सेक्टर 16 A, फिल्म सिटी, नोएडा (यूपी)
ईमेल : dayashankarmishra2015@gmail.com अपने सवाल और सुझाव इनबॉक्‍स में साझा करें:
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First published: November 13, 2019, 11:17 AM IST
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