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#जीवनसंवाद: लौटना अपने पास!

दयाशंकर मिश्र | News18Hindi
Updated: October 2, 2019, 3:10 PM IST
#जीवनसंवाद: लौटना अपने पास!
जीवन संवाद

Jeevan Samvad: हम किसके लिए इतना श्रम कर रहे हैं? रात-दिन एक किए हुए हैं? इसका सटीक, सही और निष्‍पक्ष उत्‍तर केवल आपके पास होता है. दूसरों को जो आप बताते हैं, वह असल में रचा हुआ होता है.

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  • Last Updated: October 2, 2019, 3:10 PM IST
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हम इतने व्‍यस्‍त हो चले हैं कि अपने मन, चित्‍त का खयाल रखने का खयाल ही नहीं. हम मशीन होने के समीप हैं. हमारा व्‍यवहार, सोचने का सलीका आहिस्‍ता-आहिस्‍ता दिल की पहुंच से दूर होता जा रहा है. सबकुछ समय के अनुसार हो रहा है. बस, भोजन, नींद, सपने और स्‍नेह हमसे दूर हो चले हैं. भोजन की ओर हम तक जाते हैं, जब शरीर हमें पुकारते हुए थक जाता है. सपने रूठ गए. नींद कच्‍ची हो चली. स्‍नेह का रस आत्‍मा से सूखता जा रहा है. व्‍यस्‍तता का ठोस कारण तक हमारे पास नहीं!

जब बाहर की सारी व्‍यस्‍तता घेर ले तो ऐसे में जरूरी हो जाता है कि हम भीतर से स्‍वयं को सहेजें. संभालें. स्‍नेह, प्रेम करें. हम किसके लिए इतना श्रम कर रहे हैं? रात-दिन एक किए हुए हैं? इसका सटीक, सही और निष्‍पक्ष उत्‍तर केवल आपके पास होता है. दूसरों को जो आप बताते हैं, वह असल में रचा हुआ होता है. इसलिए जरूरी है, हम स्‍वयं को समझें. अपने को हम कहां झोंक रहे हैं. किसी कठिन भट्टी में तपा रहे हैं. यह तो हमें पता होना ही चाहिए. हर स्थिति में.

इसलिए अपने से प्रेम करना हमारी जिंदगी का हिस्‍सा होना चाहिए. स्‍वयं को वक्‍त देते रहने से खुद से प्रेम बना रहता है. दूसरों का खयाल रखना अच्‍छा है, लेकिन इसकी सीमा होनी चाहिए. जैसी ही आप इस सीमा का अतिक्रमण करते हैं, आप अपने साथ उन सबको दुखी कर बैठते हैं, जो आपसे प्रेम करते हैं. जिनसे आप प्रेम करते हैं. इसलिए स्‍वयं को अपने से जोडे़ रखि‍ए.


हर दिन स्‍वयं को थोड़ा समय दीजिए. अगर, यह समय सुबह का है, तो बहुत सुंदर. अगर नहीं तो यह ऐसा समय किसी भी वक्‍त निकाला जा सकता है. सुबह का समय सबसे अच्‍छा इसलिए होता है क्‍योंकि उस समय आपको प्रकृति के साथ एकांत मिल जाता है. मुझे तो अपने प्रश्‍नों के उत्‍तर अक्‍सर सुबह के वक्‍त ही मिले हैं. पेड़, पौधों के बीच भोर में शांत आसमान के बीच अपने को अपनी ही नजर से देखना एक अच्‍छा प्रयोग है. स्‍वयं को आनंदित रखने में यह हमारी यह सहायता करता है. डिप्रेशन, गुस्‍से और अत्‍यधिक चिंता से परेशान दोस्‍तों को इससे मदद मिली. अगर हममें से किसी को अपनी जिंदगी से ऊब होने लगी है. सबकुछ एक जैसा होने से थकने लगे हैं, तो इसके प्रयोग से आपको मदद मिल सकती है.

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हम जब छोटे होते हैं तो तितली के पीछे दौड़ने से, फूलों के पास रहने से कितने खुश होते हैं. धीरे-धीरे हम अपने खुश रहने के काम को हम पीछे छोड़ते जाते हैं. हमें लगता है, हम आगे बढ़ रहे हैं. लेकिन असल में हम पीछे जा रहे होते हैं, खुद से. एकांत रच रहे होते हैं, अपने से.

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एक दिन हम खुश होना ही भूल जाते हैं. हम साधन/ सुविधा/धन से लदे रहते हैं. लेकिन खुश नहीं होते. एटीएम मशीन की तरह. हमें एटीएम नहीं बनना है. जो दूसरों के सुख की पूर्ति करते हुए स्‍वयं को आनंद से रिक्‍त कर लेता है. सबके साथ रहना है. सबको सुख देना है. ऐसा करते हुए बस इतना खयाल रहे कि अपने मन, दिल और आत्‍मा से दूर नहीं निकल जाना है. जहां से लौटना मुश्किल जाए. अपने पास लौटिए. स्‍वयं से प्रेम कीजिए. दूसरों को प्रेम करने की क्षमता के साथ ही इससे जीवन के हर क्षेत्र में आपकी सकारात्‍मकता बढ़ेगी.

पता: दयाशंकर मिश्र (जीवन संवाद)
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First published: October 2, 2019, 9:55 AM IST
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