लाइव टीवी

#जीवनसंवाद: प्रेम और संदेह के बादल!

दयाशंकर मिश्र | News18Hindi
Updated: January 18, 2020, 4:35 PM IST
#जीवनसंवाद: प्रेम और संदेह के बादल!
जीवन संवाद

Jeevan Samvad: जिंदगी एक खूबसूरत घोंसला है. बस हर परिेंदे को अभी भूमिका सही तरह से निभानी होती है. हम अपनी भूमिकाओं को लेकर स्‍पष्ट रहें तो जीवन में रिश्‍तों के बीच कभी तनाव का कोहरा नहीं आएगा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 18, 2020, 4:35 PM IST
  • Share this:
प्रेम के बिना रिश्‍ते में संदेह संभव नहीं. इसलिए दोनों बहुत हद तक साथ चलते हैं. प्रेम प्रबल रहता है तो संदेह को एक इंच भी जगह नहीं देता. अगर वह जरा भी दुर्बल हुआ तो संदेह बादल की तरह सूरज के सामने आ जाता है. कई बार शक्तिशाली बादल तेजस्‍वी सूरज की राह रोक लेते हैं. रिश्तो में यही बात प्रेम और संदेह के साथ होती है.

रास्‍ता तो वही होता है लेकिन कोहरे के कारण हमें दिखाई नहीं देता. जबकि हम रास्‍ते से परिचित होते हैं. मन में शंका/संदेह भी रिश्‍तों के लिए कोहरे सरीखे ही होते हैं. एक बार वह मन में आ गए तो रिश्‍ते कितने ही मजबूत क्‍यों न हों मन आगे देख नहीं पाता. वह ठहर, रुक, थम जाता है. उस पर संदेह के बादल कुछ ऐसे जम जाते हैं कि मन प्रेम, स्‍नेह की का रास्‍ता चल नहीं पाता.

इसलिए, निरंतर मन का मैल साफ होता रहे तो अच्‍छा है. जब भी कोई बात रिश्‍तों के बीच आए तो सबसे शांत मन से बात की जाए. हां यह जरूर है कि बात करने के पहले मन को शांत किया जाए. मन को शांत करने का सरल तरीका है, उसे बात करने वाले के उन पलों से जोड़ देना, जिनमें गहरा अनुराग था. आज जिससे हम मन को फुलाए बैठे हैं, कभी उनके साथ हमारा गहरा अनुराग था. इस बात को कभी नहीं भूलना चाहिए.

जिस तरह पौधा छोटा होता है, तो कम जगह घेरता है. धीमे-धीमे वह बड़ा होते हुए अपने तने, शाखा को विस्‍तार देता है. उसके रिश्‍ते अपने पड़ोसी पौधों, परिेंदों यहां तक कि हवा से भी बदल जाते हैं. सब इस बदलाव को स्‍वीकार करते हैं.


दूसरी ओर, हम बढ़ती उम्र, रिश्‍तों के आते समय के मोड़ को ठीक से नहीं पहचानते. हम भूल जाते हैं कि समय के साथ रिश्‍तों में बदलाव तय है. मां बेटे का रिश्‍ता अटूट है. बहुत कोमल है. स्‍नेह से लबालब है. लेकिन इसमें बेटे की पत्‍नी के आने के बाद बदलाव आएगा ही. बेटे का कुछ समय तो उसकी पत्‍नी के हिस्‍से जाएगा ही. जाना ही चाहिए. यह समय की सहज पुकार होती है. जिसे सहज रूप से स्वीकार करने की जगह हमने अक्‍सर घरों में मां को परेशान होते देखा है. बहू ने बेटे को पराया कर दिया जैसी बातें असल में हमारे बड़े नहीं होने, समय की गति को अनदेखा करने वाली चीजें हैं.


जिंदगी एक खूबसूरत घोंसला है. बस हर परिेंदे को अभी भूमिका सही तरह से निभानी होती है. हम अपनी भूमिकाओं को लेकर स्‍पष्ट रहें तो जीवन में रिश्‍तों के बीच कभी तनाव का कोहरा नहीं आएगा.
हमें बार-बार यह समझने की जरूरत है कि जीवन में हमसे अधिक मूल्‍यवान कोई नहीं है. जिंदगी सबसे बड़ी पूंजी है. उससे बढ़कर कुछ नहीं.कोई रिश्‍ता इससे बड़ा नहीं है. इसलिए जब भी रिश्‍तों के बीच तनाव आए. घुटन आए. दम घुटने लगे. लगे कि आपको छला गया है. कुछ टूटा है, आपके भीतर तो कभी सारा दर्द अपने मन में मत रखिए. मन दूषित हो जाएगा. रिश्‍ते बिखरने लगेंगे.


शंका के बादल संवाद की कमी से आते हैं. एक दूसरे को नहीं सुनने के कारण आते हैं. इसलिए, थोड़ा ठहरकर, थोड़ा स्‍नेह से एक-दूसरे को सुन‍िए. बंद कर दीजिए चौबीस घंटे इंटरनेट पर टहलना .हर चीज़ पर तुरंत प्रतिक्रिया देना. इससे जीवन की गति थम जाती है. थोड़ा ठहकर मन को देखते, सहलाते, संवारते रहिए. जिससे रिश्‍तों में जम रही बर्फ को पिघलाने में आसानी होगी.

पता : दयाशंकर मिश्र (जीवन संवाद)
Network18
एक्सप्रेस ट्रेड टावर, 3rd फ्लोर, A विंग
सेक्टर 16 A, फिल्म सिटी, नोएडा (यूपी)
ईमेल : dayashankarmishra2015@gmail.com
अपने सवाल और सुझाव इनबॉक्‍स में साझा करें:
(https://twitter.com/dayashankarmi )(https://www.facebook.com/dayashankar.mishra.54)

#जीवनसंवाद : अदृश्‍य खूंटी से बंधा मन!

#जीवनसंवाद : परीक्षा से पहले स्नेह का लेप!

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए जीवन संवाद से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: January 13, 2020, 11:44 AM IST
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर