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#जीवनसंवाद: नेहरू और हंसी का साथ!

दयाशंकर मिश्र | News18Hindi
Updated: November 15, 2019, 2:08 PM IST
#जीवनसंवाद: नेहरू और हंसी का साथ!
जीवन संवाद

Jeevan Samvad: नेहरू जी ने अपनी आत्‍मकथा ‘मेरी कहानी’ में लिखा है कि गांधी जी ने एक बार कहा था कि अगर नेहरू में हंसी मजाक करने की आदत न होती, तो शायद नेहरू आत्‍महत्‍या कर लेते.

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  • Last Updated: November 15, 2019, 2:08 PM IST
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काश! हमारे पास साफ हवा को मापने वाले एयर क्‍वालिटी इंडेक्‍स (एक्‍यूआई) की तरह हमारे स्‍वभाव में प्रसन्‍नता का पैमाना तय करने वाला कोई इंडेक्‍स भी होता. हमारे जीवन से सहज हास्‍यबोध गायब होता जा रहा है. ठहाके लगाने के लिए दस-बीस बरस पहले जो हास्‍य (Laughing) क्‍लब बनाए गए थे, उनकी गूंज भी अब वैसी सुनाई नहीं देती.

मेडिकल जर्नल्‍स समय-समय पर इस बात की ओर ध्‍यान दिलाते रहते हैं कि अगर हमारे मन में घुटन बढ़ती रही, तो हम बीमारियों से ठीक तरह से मुकाबला नहीं कर पाएंगे. मन में प्रेम की कमी भीतर चेहरे की मुस्‍कान पर सबसे अधिक असर डालती है. इसलिए, अगर ठहाकों की गूंज कम हो रही है, तो इसका असर हमारे मन में गहरे तक होगा. हमारे इनकार, स्‍वीकार से इसमें कोई फर्क नहीं पड़ने वाला. जो खुलकर हंस नहीं सकता, उसकी दूसरी योग्‍यता पर तो नहीं, लेकिन उसकी मानसिक सेहत पर जरूर संदेह बना रहता है.

हास्‍य, विनोद, हंसी-मजाक जीवन का ऑक्‍सीजन है. इसके बिना बहुत देर तक जिंदगी का खिलखिलाना संभव नहीं.


जिस तरह कृत्रिम ऑक्‍सीजन से मनुष्‍य को सीमित समय तक ही जिंदगी मिल सकती है, वैसे ही अपने मन, चेहरे पर प्रसन्‍नता के स्‍वभाव को ओढ़े रहने वाले को कुछ समय तक ही राहत मिल सकती है. हमेशा के लिए नहीं.

हमारे आसपास बढ़ी संख्‍या में तनाव, निराशा बढ़ने का कारण यही है कि हमने मिलकर हंसना, विनोद करना छोड़ दिया है. अपने भीतर की घुटन से मुक्ति तब तक संभव नहीं, जब तक मन का मैल आत्‍मा से अच्‍छी तरह न छुड़ाया जाए.

हमें लगता है कि हम बड़ी जिम्‍मेदारी निभा रहे हैं. हमारा हंसना, बोलना हमारे पद के अनुकूल नहीं है, तो याद रखिए कि हमारी आजादी की लड़ाई के दोनों सबसे बड़े नायक गांधी (Mahatma Gandhi) और नेहरू (Jawaharlal Nehru) हमसे कहीं अधिक बड़े काम में जुटे थे. लेकिन उसके बाद भी सहज हंसी उनके स्‍वभाव का अभिन्‍न हिस्‍स्‍सा थी. उनने मुस्‍कराना, हंसना, मजाक करना कभी नहीं छोड़ा था.

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इतना ही नहीं, नेहरू जी (Nehru) ने अपनी आत्‍मकथा ‘मेरी कहानी’ में लिखा है कि गांधी जी ने एक बार कहा था कि अगर नेहरू में हंसी मजाक करने की आदत न होती, तो शायद नेहरू आत्‍महत्‍या कर लेते. बापू की इस टिप्‍पणी को स्‍वीकार करते हुए नेहरू कहते थे कि भले ही मैं आत्‍महत्‍या न करता, लेकिन अगर मेरे जीवन में हंसी मजाक करने वाले लोग न होते तो शायद, मेरी जिंदगी बोझ बन जाती.​

नेहरू जी की जिम्‍मेदारी हमारी तुलना में कहीं अधिक बड़ी थी. उनके तनाव कहीं अधिक गहरे थे. इसके बाद भी वह हंसी को अपने से दूर नहीं रखते थे. इतना ही नहीं, वह बकायदा कह रहे हैं कि मेरी जिंदगी में अगर हंसी मजाक करने वाले लोग न होते, तो जिंदगी बोझ बन जाती.


बाल दिवस (Bal Diwas) पर बच्‍चों से अटूट प्रेम करने वाले चाचा नेहरू को बस यह तोहफा दीजिए कि बच्‍चों के आसपास हंसी कम न हो. हम तनाव तो कम कर नहीं सकते, कम से कम हंसी को बढ़ाते चलें. इससे बच्‍चे उस तनाव का सामना सरलता से कर पाएंगे, जो एक समाज के रूप में हम उनकी ओर उड़ेलते जा रहे हैं.

बाल दिवस (Children's Day) की शुभकामना सहित.

पता: दयाशंकर मिश्र (जीवन संवाद)
Network18
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First published: November 14, 2019, 11:45 AM IST
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