लाइव टीवी

जीवन संवाद : पढ़े- लिखे का अर्थ!

News18Hindi
Updated: October 24, 2019, 9:09 AM IST
जीवन संवाद : पढ़े- लिखे का अर्थ!
जीवन संवाद

Jeevan Samvad : अपने बच्‍चों को किताबों के साथ जीवन का हौसला दीजिए. असफलता का सामना करना, टूटते मन को संभालना स‍िखाइए. मरना नहीं है, इसे दिमाग में कूटकूटकर भर दीजिए.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 24, 2019, 9:09 AM IST
  • Share this:
पढ़ा-लिखा किसे कहा जाए. उसे जिसके पास डिग्रि‍यां हैं. उन्‍हें, जिनके पास जीवन के अनुभव हैं. इस पर सबके विचार भिन्‍न हैं. मैं इस पर अधिक उलझता नहीं. सीधे दादी की शरण में चला जाता हूं. उनकी शिक्षा को लेकर समझ स्‍पष्‍ट थी. वह कहती थीं, पढ़ना ठीक है, लेकिन लढ़ना (जीवन अनुभव) उससे कहीं अधिक जरूरी है. अक्‍सर वह लढ़ने को पढ़ने पर भारी साबित कर देतीं.

पढ़ाई की बात आते ही वह हंसते हुए कहतीं, ‘हम पढ़े त नहीं आहन, पै लढे बहुत हैंन.’ बुंदेली का सरल हिंदी अनुवाद हुआ, ‘मैं पढ़ी लिखी तो नहीं हूं, लेकिन मुझे जीवन का अनुभव है.’

मुश्किल समय में उनके उपाय, सुझाव बीरबल की तरह होते थे. अब वह हमारे बीच नहीं हैं. लेकिन मुझे अक्‍सर उनकी जीवन दृष्टि से संकट का सामना करने में आसानी होती है. जीवन के प्रति मेरा नजरिया उनके कारण ही व्‍यापक, सहज और हार नहीं मानने वाला बना. विरोधियों के प्रति सहिष्‍णुता उनसे अधिक कहीं सीखने को नहीं मिली. ऐसे परिजनों के साथ वह उदार रहीं, जिनने जीवन-मरण के प्रश्‍न पर उनका साथ छोड़ दिया.

उन्‍होंने कठिनतम, नैतिक मूल्‍य को तोड़ देने वाली गरीबी देखी थी. लेकिन कभी हमने उनके मुंह से जीवन को समाप्त करने का विचार नहीं सुना. बच्‍चों की फीस जमा करने के पैसे उनके पास नहीं थे. सबने मुंह मोड़ लिया, लेकिन उनकी जीवन के प्रति गहरी आस्‍था ने उनको बचाए रखा.

मैं आपको यह कहानी क्‍यों सुनने बैठ गया.

इसलिए, क्‍योंकि सेंट स्‍टीफेंस कॉलेज, नई दिल्‍ली के अस्‍थाई शिक्षक की आत्‍महत्‍या की खबर से यह विषय एक बार फिर चर्चा का केंद्र बन गया है. शिक्षक, जिसके ऊपर समाज को दिशा देने की जिम्‍मेदारी है. उसका मन, विचार और अंतर्मन कितना बिखरा, टूटा हुआ है.


ऐसे व्‍यक्ति को आप कहां तक शिक्षि‍त कहेंगे.
Loading...

इसलिए, आज हम पढ़े-लिखे होने पर बात कर रहे हैं. जिसके पास जीवन के अनुभव नहीं हैं. जीवन के सहज मूल्‍य नहीं हैं, मेरी दृष्टि में वह संसार की सभी शिक्षा लेने के बाद भी अश‍िक्षि‍त है.

घर, परिवार, मि‍त्रों से चर्चा में अक्‍सर मैं ऐसे लोगों को शिक्षि‍त कहता हूं, जिनके पास औपचारिक शिक्षा नाम मात्र की है, लेकिन उनके पास गहरा जीवन बोध है. किताबों से मिली सीख, ज्ञान बहुत दूर तक आगे नहीं ले जाते, अक्‍सर उनके साथ जीवन का अर्थ नहीं है.

निर्णय लेने में जब भी मुश्किल होती है, मैं एक ऐसे व्‍यक्ति से बात करना पसंद करता हूं जो केवल बीए पास हैं. बहुत मामूली अंकों के साथ. उनके पास अकादमिक अनुभव नहीं है.


उनके पास वही है, जिसकी बात हमारी दादी करती थीं. जीवन अनुभव. हार नहीं मानने, जोखिम उठाने का सहज स्‍वभाव. यह पढ़ने से नहीं लढ़ने से आता है. हम शिक्ष‍ित हैं, लेकिन हमारे पास जीवन बोध नहीं. सरल, सहज, सरस जीवन दृष्टि की कमी तनाव, आत्‍महत्‍या का बड़ा कारण बन रही है.
जीवन जीना एकदम सरल है. हां, इसके लिए भीतर से मन उजला होना चाहिए. वहां, अंधेरा नहीं चलेगा. हम मुश्किलों से नहीं अंधेरे से हारते हैं!


अपने बच्‍चों को किताबों के साथ जीवन का हौसला दीजिए.असफलता का सामना करना, टूटते मन को संभालना स‍िखाइए. मरना नहीं है, इसे दिमाग में कूटकूटकर भर दीजिए.
ऐसे दोस्‍तों का खयाल रखिए, जो जल्‍दी उदास हो जाते हैं. हारने लगते हैं. उनके भीतर ऊर्जा, लड़ने का हौसला बनाए रखें.

यह सेंट स्‍टीफेंस का हारने वाला युवा कोई भी हो सकता है, इसका हमेशा ध्‍यान रहे.

पता: दयाशंकर मिश्र (जीवन संवाद)
Network18
एक्सप्रेस ट्रेड टावर, 3rd फ्लोर, A विंग
सेक्टर 16 A, फिल्म सिटी, नोएडा (यूपी)
ईमेल : dayashankarmishra2015@gmail.com अपने सवाल और सुझाव इनबॉक्‍स में साझा करें:
(https://twitter.com/dayashankarmi )(https://www.facebook.com/dayashankar.mishra.54)

ये भी पढ़ें-

#जीवनसंवाद: शहर, गांव और तनाव!

#जीवनसंवाद: जीना सीखना!

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए जीवन संवाद से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: October 23, 2019, 5:30 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...