लाइव टीवी

#जीवनसंवाद: रिश्तों की मिठास!

दयाशंकर मिश्र | News18Hindi
Updated: October 28, 2019, 11:29 AM IST
#जीवनसंवाद: रिश्तों की मिठास!
जीवन संवाद

Jeevan Samvad: अंतर्मन का विरोधाभास देखिए, हम ऐसी चीजों से ही प्रेम करने लगते हैं, जिनका लंबे समय तक हमने विरोध किया हो, कष्ट सहा हो!

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 28, 2019, 11:29 AM IST
  • Share this:
बिहार के साधन संपन्न परिवार से आने वाले पाठक ने 'जीवन संवाद' की संक्षिप्त, महत्वपूर्ण चर्चा में रिश्तों पर सुंदर बात कही. उन्होंने कहा, 'पहले गांव, जिले के किसी एक व्यक्ति के कुछ हासिल कर लेने पर दूसरों को उससे सहारा मिलता था. मानसिक संबल मिलता था. कुछ हासिल करने वाले हमेशा याद रखते कि उन पर बहुत सी लोगों की आशाएं टिकी हैं. अब तो स्थिति यह है कि मैं चचेरे-ममेरे भाई-बहनों के संपर्क तक में नहीं हूं, जो आईएएस अफसर से लेकर अन्य महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर हैं. इसका कारण सीधा-सा है. उन्‍हें लगता है कि हमेशा उनसे किसी न किसी मदद के लिए कहा जाता रहेगा. मदद मांगते समय, यही कहा जाता है कि हमेशा ‘दूसरों’ के चक्कर में क्यों पड़े रहते हो. यह दूसरे अपने ही गांव, परिवार के हैं.'

बीते दस, पंद्रह बरस में यह हमारे समाज का सबसे बड़ा परिवर्तन है. हमारे भीतर ‘कुछ’ होने का भाव बहुत गहरा होता जा रहा है. यह भाव दूसरों से अलग, कटकर 'शानदार' जीवन की इच्छा को प्रबल करने वाला है. हम एक ऐसी दुनिया रचने में व्यस्त हैं, जहां हमारे ऊपर कम से कम जिम्मेदारी हो. सुख, अधिकार तो रहें, लेकिन दायित्व नहीं.

हम ऐसे अनुभवों से परिचित हैं, जहां हम किसी कमजोर व्यक्ति के शक्तिशाली होने पर उसे कमजोर के साथ खड़े होने की जगह उनके साथ खड़ा होता देखते हैं, जो शोषण करने वालों में शामिल हैं. मैं इसे ‘इजराइल’ सिंड्रोम कहता हूं. अत्‍याचारों से अपनी रक्षा के लिए बना देश कैसे दूसरों के अधिकारों के लिए मौन साधे रहता है. मौन ही नहीं, वह तो उनके कष्‍ट में कोई कमी भी नहीं होने देता. ‘इजराइल’ सिंड्रोम हमारे मनुष्‍य होने की बड़ी बाधा में से एक है.




यह हमारे मन की विचित्रता को दर्शाने वाला वाला सहज विकार है. यह बात विचित्र लग सकती है लेकिन परिवार में सास-बहू का संबंध इसकी सबसे अच्छी मिसाल है. मैं अपने ही एक निकट संबंधी को जानता हूं, बचपन से उनके उत्पीड़न का गवाह रहा हूं, लेकिन जैसे ही उनके दिन 'फिरे' वह अपने परिवार में अपनी ही सास वाली कहानी दोहराती नजर आईं.

अंतर्मन का विरोधाभास देखिए, हम ऐसी चीजों से प्रेम करने लगते हैं, जिनका लंबे समय तक हमने विरोध किया हो, उनके कष्ट सहे हों! जो लोग जीवन में बहुत कष्ट उठाकर बड़े होते हैं, अक्सर शक्तिशाली होने पर वह दूसरों को यथासंभव कष्ट देने लगते हैं. ऐसा इस कारण होता है, क्योंकि वह अपनी कुंठा से मुक्त नहीं हो पाते.


कुंठा का निर्माण लंबे समय में होता है. इसलिए कई बार एक पूरी जिंदगी लग जाती है, इससे बाहर आने में. जीवन का सौंदर्य सुख-दुख के बीच समभाव बनाने में है. सुनने में बात जितनी सरल लगती है, व्यवहार में उतनी ही मुश्किल. लेकिन ऐसा करना असंभव नहीं है. बस, इसके लिए मन को प्रशिक्षित करना होता है. जैसे, हम बच्चे को स्कूल जाने के लिए तैयार करते हैं. खुद को नौकरी, काम करने के लिए तैयार करते हैं, ठीक वैसे ही सुख-दुख को समभाव से ग्रहण करने के लिए प्रशिक्षण की जरूरत है.
Loading...

यह भी गुजर जाएगा! कितना सुंदर होता, अगर इसे अपने जीवन का सूत्र वाक्य बना पाते. जीवन के कठिन प्रश्नों के उत्तर इस अकेले वाक्‍य में हैं. चिंता मत करिए, यह भी गुजर जाएगा. सुख और दुख दोनों पर यह सूत्र एक जैसा असर करता है. रिश्‍तों की मिठास कायम रखिए, सबकुछ वही है. अपने को सुखी रखने का इससे अच्‍छा दूसरा तरीका नहीं है.

पता: दयाशंकर मिश्र (जीवन संवाद)
Network18
एक्सप्रेस ट्रेड टावर, 3rd फ्लोर, A विंग
सेक्टर 16 A, फिल्म सिटी, नोएडा (यूपी)
ईमेल : dayashankarmishra2015@gmail.com अपने सवाल और सुझाव इनबॉक्‍स में साझा करें:
(https://twitter.com/dayashankarmi )(https://www.facebook.com/dayashankar.mishra.54)

ये भी पढ़ें :-

#जीवनसंवाद: रिश्तों की गठरी!

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए जीवन संवाद से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: October 28, 2019, 11:00 AM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...