#जीवनसंवाद: असफलता को सहना!

#जीवनसंवाद: असफलता को सहना!
जीवन संवाद

Jeevan Samvad: बचपन से सफलता के प्रति हमारा गहरा अनुराग है. इस गहरे मोह के कारण ही असफलता को हम स्वीकार नहीं कर पाते. असफल होते व्यक्ति के साथ खड़े नहीं होते. केवल हम ही खड़े नहीं होते, जो मुश्किल से गुजर रहा है, उसके भीतर यह भाव ही नहीं है कि उसका जीवन किसी चीज़ को हासिल करने से बड़ा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: June 16, 2020, 10:16 PM IST
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बचपन से हमें एक ही चीज़ रटाई जाती है, खानदान का नाम रोशन करना. इसके लिए तरह-तरह से उदाहरण दिए जाते हैं. सफलता की घुट्टी हमारी रगों में दौड़ने लगती है. हम बच्चों को केवल सफलता के लिए तैयार करते हैं. उन्हें यह कौन बताएगा कि अगर तुम असफल हुए तो भी कलेजे के टुकड़े हो! यह भावना गायब हुई. अपेक्षा की बेल मन पर ऐसी चिपकी कि हम केवल सफलता पर मुग्ध हैं.प्यार और सफलता को इतनी गहराई से जोड़ दिया कि असफलता के लिए जगह ही नहीं बची! असफलता को समझे बिना सुख तक कैसे पहुंचेंगे.

सफलता का सारा विचार कुछ ऐसा है जैसे एक समय हम सांवलापन दूर करने केे लिए बाजार के बताए रास्ते पर चल पड़े थे. हर घर में सभी बड़े, समझदार लोग अपने बच्चों के लिए गोरेेपन की क्रीम खरीदने से पीछे नहीं रहते थे. विशेषकर लड़कियों के लिए यह बहुत अपमानजनक था. लेकिन कौन इसमें दखल देता. बाजार की माया कुछ ऐसी थी कि बड़े से बड़ा समझदार आदमी भी इस कुएं का पानी पीने से खुद को नहीं रोक पा रहा था.

हम इसी समाज की बात कर रहे हैं जो कृष्ण के श्याम रंग पर मोहित है. उनका उपासक है. लेकिन अपने मनुष्य के लिए उसके मन में अगले ही क्षण भेद पैदा हो जाता है. अगर कृष्ण से प्रेम है तो सांवले और काले रंग से दूरी क्यों! दूरी बहुत कोमल शब्द है. लेकिन जिन लोगों ने इसे सहा है उनके मन में इसको लेकर आज तक पीड़ा है.




मैंने इस मन के रंगभेद को असफलता से इसलिए जोड़ा क्योंकि दोनों के बीच सुविधा, मन के रचे भ्रम का का रिश्ता है. बेटी की शादी हमारे यहां सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक रही है. इसलिए क्योंकि हमारे समाज ने उसे कुछ इसी तरह स्वीकार किया. इस पूरी प्रक्रिया में सबसे अधिक नुकसान किसका हुआ. बेटियों का ही न! क्योंकि उन्हें संकट की तरह माना गया. लाखों-करोड़ों लोग ऐसे हैं, जिन्होंने किसी भी तरह एक ही उद्देश्य रखा, किसी तरह बेटी की शादी हो सारी चिंताओं से मुक्त हो जाएं.





बेेटी की शादी को भारत में बड़ी सफलता की तरह लिया जाता है. यह एक किस्म का ऐसा जाल है जिसमें सबकी कड़ियां जुड़ी हुई है. जैसे किसी तरह बेटी की शादी हो जाए, ठीक वैसे ही यह भाव भी प्रबल है कि किसी तरह बच्चे सफल हो जाएं!


इसलिए बचपन से सफलता के प्रति हमारा गहरा अनुराग है. इस गहरे मोह के कारण ही असफलता को हम स्वीकार नहीं कर पाते. असफल होते व्यक्ति के साथ खड़े नहीं होते. केवल हम ही खड़े नहीं होते, जो मुश्किल से गुजर रहा है, उसके भीतर यह भाव ही नहीं है कि उसका जीवन किसी चीज़ को हासिल करने से बड़ा है. पेड़ का उद्देश्य केवल फल देना नहीं है. ऑक्सीजन और छाया भी उसके हिस्से का काम है. पशु पक्षियों का आश्रय भी इसमें जुड़ा है. इसी तरह हमारे भी ना जाने कितने- कितने काम हैं!

सोमवार के जीवन संवाद 'आत्महत्या के विरुद्ध होना क्यों जरूरी' पर आपके संवाद का बहुत-बहुत आभार! हमें हर हाल में जीवन का साथ देना है. केवल यह एक ही रास्ता है.

शुभ कामना सहित…

संपर्क: ई-मेल: dayashankarmishra2015@gmail.com. आप अपने मन की बात फेसबुक और ट्विटर पर भी साझा कर सकते हैं. ई-मेल पर साझा किए गए प्रश्नों पर संवाद किया जाता है.​



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