#जीवनसंवाद : असफल बच्चे से प्रेम !

अगर बच्चा कम नंबर लाता है, तो यह केवल उसका दोष नहीं है. पाठ्यक्रम में त्रुटि,शिक्षक की समझ में कमी संभव है. सारे बच्चों के लिए एक पाठ्यक्रम वैज्ञानिक दृष्टिकोण नहीं, बल्कि हमारी सुविधा है!

दयाशंकर मिश्र | News18Hindi
Updated: July 24, 2019, 4:36 PM IST
दयाशंकर मिश्र | News18Hindi
Updated: July 24, 2019, 4:36 PM IST
बच्चे की परवरिश करते हुए क्या हम उससे आशा रहित स्नेह कर पाते हैं! 'डियर जिंदगी' जीवन संवाद से अब तक के मिले अनुभव, पत्र, ई-मेल इस प्रश्न का उत्तर न देते हैं. अपवाद स्वरूप कुछ माता पिता ऐसा कर सकते हैं, लेकिन हमें ध्यान रखना होगा कि अब बात कभी आदर्श नहीं होते. बच्चे की परवरिश में जुटे माता-पिता स्कूल की तरफ से मिल रहे दिशा निर्देशों से इतने डरे होते हैं कि वह अपनी सहज बुद्धि से भी दूर चले जाते हैं.

कुछ महीने पहले, एक दिन किसी बात पर मैंने बेटी को डांट दिया, जो उसके लिए मेरे स्वभाव के एकदम विपरीत है. मैंने तुरंत उससे क्षमा याचना की. उसने मेरी ओर अत्यधिक स्नेह से देखते हुए कहा, ' कोई बात नहीं पापा आप बहुत अच्छे हैं. आपको नहीं पता है बच्चों के साथ उनके माता-पिता कितना बुरा बर्ताव करते हैं.'

उसकी बात सुनकर मैं स्तब्ध रह गया. मैंने जानना चाहा कि ऐसा कहने के पीछे कारण क्या है. उसने कहा, 'कम नंबर आने पर, विभिन्न गतिविधियों में पीछे रह जाने पर कुछ माता-पिता ना केवल बच्चों से हिंसा करते हैं, बल्कि उन्हें हमेशा प्रताड़ित करते रहते हैं!

बच्चों की दुनिया कितनी तेजी से हमसे अलग होती जा रही है. कितना कुछ अपने भीतर दबाए बैठे हैं. जिस दिन से मेरे साथ यह अनुभव हुआ मैंने महसूस किया कि बच्चों से बात करते हुए मेरा स्वर और भी धीमा, संवेदनशील हो रहा है.

मेरा विचार है कि सबसे पहले हमें बच्चों को बच्चा समझने से आगे निकलना पड़ेगा. बच्चा आपसे केवल आयु में छोटा है, इसलिए उसके साथ कैसा भी व्यवहार करने की इजाजत आपको नहीं दी जा सकती. यूरोप में बच्चों के मानवाधिकार की रक्षा सबसे अधिक इसी बुनियादी तर्क पर आधारित है. जबकि हमारे यहां बच्चे की शिक्षा, परवरिश के नाम पर शारीरिक हिंसा की सामान्य हदें पार करना असामान्य नहीं माना जाता. अगर बच्चा कम नंबर लाता है, तो यह केवल उसका दोष नहीं है. पाठ्यक्रम में त्रुटि, शिक्षक की समझ में कमी संभव है. सारे बच्चों के लिए एक पाठ्यक्रम वैज्ञानिक दृष्टिकोण नहीं, बल्कि हमारी सुविधा है!

इसलिए बच्चे की यह असफलता को केवल उस तक सीमित मत रखिए. उसके लिए डिजाइन किए गए नियमों में हमारी सहूलियत कहीं अधिक है. हम पैदा होते ही बच्चे को स्कूल में भेजने के लिए लालायित हैं. इसलिए, जिसे हमारी समझ से उसे दुनिया को समझने में आसानी होती है. लेकिन हम एक बार भी नहीं सोच रहे हैं कि उसके प्रेम, स्नेह, आत्मीयता में जो कटौती हो रही है उसकी भरपाई कहां से होगी!


हमें अपने जीवन को इस विचार से सहमत करना होगा कि 'बच्चे हमसे हैं, लेकिन हमारे लिए नहीं हैं'. अगर बच्चा जीवन में सफलता के उन शिखरों तक नहीं पहुंच पाया जो मेरा अरमान, स्वप्न, प्रबल इच्छा है, तो भी वह रहेगा तो हमारा ही. बच्चे को उसके कुछ होने से नहीं जोड़ना है. बस होने से जोड़ना है. उसके साथ खड़े रहना है. उसके साथ स्नेह का बंधन इतना गहरा हो कि तनाव और उदासी की घुटन उसके मन और आत्मा तक न पहुंच सके. आत्मीयता की शीतलता को बच्चे के मन का पहरेदार बनाना जरूरी है! हमें याद रखना चाहिए कि यह दुनिया आज जो भी है उसे बनाने में सबसे अधिक भूमिका उनकी रही है, जो हमारी परिभाषा के अनुसार असफल रहे हैं. जितना संभव हो असफल बच्चे से प्रेम कीजिए, उसे समझाइए कि वह आप के नियमों के अनुसार असफल है, अपनी क्षमता के अनुसार नहीं. बच्चे के साथ खड़े रहिए क्योंकि जीवन किसी भी असफलता से महत्वपूर्ण है!
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पता : दयाशंकर मिश्र (जीवन संवाद)
Network18
एक्सप्रेस ट्रेड टावर, 3rd फ्लोर, A विंग
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ईमेल : dayashankarmishra2015@gmail.com

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First published: July 24, 2019, 8:30 AM IST
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