#जीवन संवाद: वीजी सिद्धार्थ की आत्महत्या और 'कुछ भी नहीं होना'!

कुछ भी नहीं होने का अर्थ है रिक्त हो जाना, वह भी भीतर से. थोड़ी देर के लिए अपने हासिल को खुद से अलग करके देखिए, बहुत सुकून मिलेगा! जब भी कभी गहरी उदासी मन पर दस्तक दे, सोच कर देखिए कि आपके जिंदा रहने से किसे फर्क पड़ेगा!

दयाशंकर मिश्र | News18Hindi
Updated: August 2, 2019, 4:38 PM IST
दयाशंकर मिश्र | News18Hindi
Updated: August 2, 2019, 4:38 PM IST
दोनों के बीच सब कुछ ठीक था. जब तक पत्‍नी ने पति से नहीं कहा था, मत भूलो. मैं कौन हूं. पत्‍नी एक ऑटो कंपनी में मैनेजर हैं. पति उसी कंपनी में प्रमुख मैकेनि‍क. संयोग की बात है कि इसी कंपनी में रहते हुए उन्‍हें प्रेम हुआ. सबसे लड़कर उनने विवाह किया. अब जब सब ठीक हो गया, दुनिया से जंग जीतने के बाद आपस में लड़ने लगे. हमें लड़ने के लिए हमेशा एक दुश्मन की दरकार होती है. जैसे ही हम पुरानी जंग से मुक्‍त होते हैं. जिंदगी में खालीपन आ जाता है. इस खालीपन को ऐसे ही सवाल मिलते हैं, जैसे इस दंपति को मिले. जब लड़ने को कुछ नहीं मिला तो आपस में ही लड़ना है.

हम बाहरी संकट से पहले मिलकर लड़ते हैं, फिर आपस में! दुनिया का तनाव हम आसानी से सह सकते हैं, लेकिन छोटे से कमरे में दो लोगों के बीच उपजी कटुता, क्रोध को बर्दाश्त करना स्वभाव में नहीं है!

'डियर जिंदगी' जीवन संवाद के दौरान अब तक मुझे जो अनुभव मिला है, उसके आधार पर मैं यह कह सकता हूं कि हमें सबसे अधिक नुकसान वह तनाव दे रहा है, जो घर पर मिल रहा है. संभव है कि आप इस तर्क से सहमत न हो, लेकिन मेरे पास इसके ठोस कारण हैं. अपनी कामकाजी जिंदगी से मिलने वाले तनाव से हम सब प्रभावित होते हैं, लेकिन वहां का तनाव कहीं ना कहीं 'अपरिचित' तनाव होता है.

हम नौकरी बदलकर, संबंधित व्यक्ति से दूरी बनाकर उस से बच सकते हैं. लेकिन अगर हमारे घर पर तनाव के बीज हैं. रिश्तों पर अवसाद की छाया है, तो हम पर इसका ग्रहण कहीं भारी होता है. इसलिए घर के तनाव को सही तरह से समझना, इससे समय रहते मुकाबला करना जरूरी है.


इस समय 'कैफे कॉफी डे’ के संस्थापक वीजी. सिद्धार्थ की आत्महत्या का मामला हमारे सामने है. इस पर अब तक जो तथ्य सामने आए हैं, उनके अनुसार सिद्धार्थ आर्थिक रूप से परेशानी में बताए गए हैं. उन्होंने वित्तीय संकट को सही तरह से नहीं संभालने से उपजे तनाव का सामना न कर पाने में अपनी असमर्थता जताते हुए जीवन का अंत कर लिया, ऐसा बताया जा रहा है.

सिद्धार्थ की संपदा इतनी अधिक है कि वह आसानी से उसका कुछ हिस्सा बेचकर से निकल सकते थे. उसके बाद भी उन्होंने वह रास्ता चुना, जिसे हम मनुष्यता और मानवता के खिलाफ मानते हैं. इसके सभी कारणों पर विस्तार से बात कर पाना अभी संभव नहीं है. लेकिन निश्चित रूप से इतना कहा जा सकता है कि यह विशुद्ध आर्थिक मामला नहीं है.

सिद्धार्थ का बचपन तमाम सुविधा और सफलता से भरा है. इसमें बहुत अधिक गहरे उतार-चढ़ाव नहीं हैं. कई बार संघर्ष की धूप का ना होना, जीवन में वैसे ही असर डालता है, जैसे विटामिन डी की कमी. इससे जुड़ी एक और महत्वपूर्ण बात है कि दुनिया में अब तक अनेक अरबपति आत्महत्या कर चुके हैं. उनके जीवन का उपलब्ध अध्ययन करने पर हम पाते हैं कि इसके पीछे आर्थिक कारण न्यूनतम है. कोई भावनात्मक रूप से कमजोर है, किसी ने प्रेम में धोखा खाया. तो अनेक लोग रिश्तों में तनाव को संभाल नहीं पाए. सिद्धार्थ के बारे में भी प्रारंभिक लक्षण बताते हैं कि वह तनाव को सहेजने में असफल रहे.
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धन को हमने बहुत महत्वपूर्ण बना दिया है. धन में यह क्षमता तो है कि वह जीवन की सुविधा को बढ़ा सके, लेकिन गुणवत्ता को प्रभावित करने की शक्ति नहीं है. काश! सिद्धार्थ इसे समझ सकते. उनके पिता कुछ समय से अस्पताल में थे. बताया जा रहा है, तीन दिन पहले ही वह अस्पताल में बेहद गंभीर स्थिति में चले गए पिता से मिलने भी गए थे. ऐसे में पिता को संबल देने की जगह वह उनको अकेला छोड़ कर जाने का निर्णय कर लेते हैं.

प्रख्यात सूफी संत रूमी कहते हैं, 'कुछ भी नहीं हो जाओ', इससे तुम पूरी तरह बदलकर सबकुछ हो जाओगे. सिद्धार्थ जैसे लोग हमारे समाज में तेजी से बढ़ रहे हैं जो अपना सब कुछ खो देने की भ्रम में ऐसी जगह चले जाते हैं कि जीवन ही गंवा बैठते हैं. जो हमारे पास है अगर वह चला भी गया तो क्या हम साधारण होकर नहीं जी सकते! रूमी यही तो कह रहे हैं.

कुछ भी नहीं होने का अर्थ है रिक्त हो जाना, वह भी भीतर से. थोड़ी देर के लिए अपने हासिल को खुद से अलग करके देखिए, बहुत सुकून मिलेगा! जब भी कभी गहरी उदासी मन पर दस्तक दे, सोच कर देखिए कि आपके जिंदा रहने से किसे फर्क पड़ेगा!


अगर ऐसा एक भी व्यक्ति है, तो उसके लिए जीना है. और अगर नहीं तो इसका अर्थ यह हुआ कि कुछ तो ऐसे व्यक्ति बनाए जाएं जिनका हम पर असर बाकी रहे. यानी हर हाल में जीवन को ही चुनना है. जीवन ही अंतिम सत्य है. जीवन से बड़ा कुछ नहीं है, कोई प्रतिष्ठा नहीं. पद नहीं, व्यवसाय नहीं. और हां, धन तो एकदम नहीं!

इस विषय में आपके जो भी प्रश्न हैं मैं उनके लिए प्रस्तुत हूं! जीवन की शुभकामनाओं सहित!

पता: दयाशंकर मिश्र (जीवन संवाद)
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First published: August 1, 2019, 8:17 AM IST
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