#जीवनसंवाद: वीजी सिद्धार्थ की आत्महत्या और घर का तनाव!

संघर्ष, कल पर भरोसा भारतीय लोक जीवन का यह सबसे प्रबल पक्ष था. मन की गहराई में उतरा हुआ अध्यात्म. जो अब जीवन से विलुप्त होने की कगार पर है.

दयाशंकर मिश्र | News18Hindi
Updated: August 3, 2019, 2:17 PM IST
#जीवनसंवाद: वीजी सिद्धार्थ की आत्महत्या और घर का तनाव!
जीवन संवाद
दयाशंकर मिश्र | News18Hindi
Updated: August 3, 2019, 2:17 PM IST
जब कभी हमें ऑफिस, कार्य क्षेत्र से तनाव मिलता है तो हम क्या करते हैं! तनाव संभालने की कोशिश, बचने का प्रयास. अगर ऐसा नहीं हो सकता तो उस जगह से मुक्ति पाना चाहते हैं. अगर तुरंत संभव नहीं है, तो तैयारी शुरू कर देते हैं. कुछ दिनों में हम स्वयं को ऐसी जगह पर ले जाने में कामयाब हो जाते हैं, जहां तनाव हमारे 'अनुकूल' है. अनुकूल इसलिए, क्योंकि शून्य तनाव तो कहीं होता ही नहीं.

चांद अपनी जगह है, धरती से मर्यादित दूरी पर. तो इसके मायने यह भी हैं कि दोनों के बीच संतुलित तनाव है. विज्ञान की भाषा में इसे किसी और तरह भी कहा जा सकता है. लेकिन यहां मेरा आग्रह केवल रिश्तों को सही संदर्भ में अभिव्यक्त करना है! ‌हमने गुरुवार के जीवन संवाद में कैफे कॉफी डे के संस्थापक, मालिक वीजी सिद्धार्थ पर विस्तार से संवाद किया था.

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इस संबंध में हमें आपकी प्रतिक्रिया सबसे अधिक मैसेंजर पर मिली है. देश के प्रमुख अखबार, टीवी चैनल और वेबसाइट सिद्धार्थ की आत्महत्या कुल लगभग उल्टे तरीके से समझ रहे हैं. समझा रहे हैं. किसी ने जीवन की ओर ध्यान देने का प्रयास ही नहीं किया. सबकी दिलचस्पी उनकी संपत्ति, कंपनियों में ही है. कंपनी के घाटे, उसे न संभाल पाने की विफलता से इंटरनेट भरा हुआ है.

मुझे यह एकतरफा मजाक जैसा लगता है. देश के एक इतने बड़े उद्यमी ने आत्महत्या की है तो इसके कारण केवल आर्थिक नहीं हो सकते. बुधवार को ही हिंदी के लाडले लेखक प्रेमचंद की जयंती थी. उनकी लोकप्रिय कहानी है, 'पूस की रात'. कहानी का नायक अपनी पूरी कमाई के रात भर में उजड़ जाने पर अगले दिन आत्महत्या की बात नहीं करता. विचार भी नहीं करता. गंभीर आर्थिक संकट के बीच वह जीवन के संघर्ष पथ की ओर बढ़ता है.


हिंदी के सुपरिचित, सुचिंतित पत्रकार, लेखक आलोक पुतुल जी ने यह संदर्भ 'डियर जिंदगी' जीवन संवाद को दिया! आलोक जी जैसे सुधी पाठकों के स्नेह से प्रतिदिन लेखन की ऊर्जा मिलती है.

संघर्ष, कल पर भरोसा भारतीय लोक जीवन का यह सबसे प्रबल पक्ष था. मन की गहराई में उतरा हुआ अध्यात्म. जो अब जीवन से विलुप्त होने की कगार पर है. पहले जीवन के सभी आयामों के बीच संतुलन था. अब हमारा दृष्टिकोण इतना अधिक आर्थिक हो गया है कि हम दूसरे सभी पक्षों की अवहेलना करते रहते हैं. घर में दंपति के बीच बढ़ रही घुटन, दुविधा, तनाव को हम कमतर आंक रहे हैं, जबकि जीवन को सबसे अधिक चुनौती इनसे ही मिल रही है. इस कलह का कारण हमेशा धन हो, जरूरी नहीं. एक दूसरे की पीड़ा, दृष्टिकोण की उपेक्षा और अपनी राय तो अपने से कितने जीवन तबाह हो रहे हैं, इसका सही अनुमान लगाना मुश्किल है.
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इसलिए, जिस तरह हम नौकरियों के तनाव से मुक्ति के लिए उन्हें बदल देते हैं. वैसे ही हमें घर के तनाव की समीक्षा करने की जरूरत है. वीजी सिद्धार्थ के रिश्तों, घर पर आत्मीयता की कमी से इनकार नहीं किया जा सकता, जिससे उनके भीतर हो रही घुटन, तनाव, अकेलेपन को बांटना संभव नहीं हो सका.

हमें सजगता से देखना चाहिए कि घर पर तनाव का प्रबंधन कैसा है! भारत में आत्महत्या के तेजी से बढ़ने का कारण, घर पर रिश्तों के बीच बढ़ती दूरी और आत्मीयता की कमी है. घर पर भी जो तनाव कम न हुआ, उसे लेकर कहीं और जाना बहुत मुश्किल होता है. ऐसे तनाव का बोझ सबसे मुश्किल है, जिसे आपके पास कहने वाले कोई न हो.


बहुत जरूरी है कि घर के तनाव को सबसे पहले चुनौती के रूप में स्वीकार किया जाए, उसके बाद समाधान का प्रयास किया जाए! घर पर जितना संभव हो स्नेह और आत्मीयता की मात्रा बढ़ाएं. एक दूसरे के काम की सराहना, एक दूजे के प्रति आस्था ही जीवन के सबसे बड़े मूल्य हैं. अगर घर बच गया तनाव से तो सब कुछ बचा रहेगा!

पता: दयाशंकर मिश्र (जीवन संवाद)
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First published: August 3, 2019, 2:17 PM IST
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