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#जीवनसंवाद: सुख की खोज और EMI!

दयाशंकर मिश्र | News18Hindi
Updated: August 31, 2019, 11:34 AM IST
#जीवनसंवाद: सुख की खोज और EMI!
सुख की खोज और EMI

वर्तमान को सुरक्षित कीजिए. जीवन, असीम संभावना है. इसके प्रति आस्थावान बनिए. लोग क्या कहते हैं, इसकी जगह सहज विवेक को केंद्र में रखिए.

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  • Last Updated: August 31, 2019, 11:34 AM IST
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इस समय आपको अर्थव्यवस्था के उतार-चढ़ाव के बारे में कई सूचनाएं मिल रही हैं. विनम्र निवेदन है कि इनको गंभीरता से लीजिए. अमेरिका, यूरोप से होते हुए बाजारों में गिरावट भारत की ओर बढ़ रही है. इससे लगभग एक दशक पहले भी हम इसी तरह की परिस्थिति में थे. सामाजिक और आर्थिक रूप से भारत उस मंदी से बहुत कम नुकसान से बाहर निकल आया था. इसके दो प्रमुख कारण थे.

पहला, भारत का समाज संयुक्त परिवार से इतनी अधिक दूरी पर नहीं था. समाज में एक-दूसरे के लिए अपनापन कहीं अधिक गहराई से दिखता था. हमारे पास सब की हैसियत के अनुसार संचित निधि जरूर थी. हम पहले बचत करते थे उसके बाद खर्च.

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दूसरा, क्रेडिट कार्ड हमारे जीवन से दूर था. हम ईएमआई के इतने करीब नहीं थे. जूते से लेकर रुमाल तक हर चीज उस समय नगद पैसे से खरीदी जा रही थी. अगर ऐसा करना संभव नहीं होता तो कुछ समय के लिए उस इच्छा को टाल दिया जाता. आज हम इन दोनों ही चीजों से बहुत आगे निकल आए हैं. पहले बचत नहीं करते. खर्च करते हैं, उसके बाद अगर गलती से कुछ बच गया, तो वह बचत में गिना जाता है. हर इच्छा को हम पैदा होते ही पूरा करना चाहते हैं.

मध्य प्रदेश के जबलपुर से निधि यादव लिखती हैं, 'हम पति-पत्नी एक निजी कंपनी में काम करते हैं. कुछ समय पहले हमने एक फ्लैट लिया, जो बजट से थोड़ा अधिक था. उसके बाद बड़ोंं के समझाने के बाद भी पर्सनल लोन लेकर उसमें 'अपने हिसाब' से काम कराया. दोस्तों के दबाव में एक दावत भी दी. दावत की क्षमता खत्म हो गई थी, लेकिन लोग क्या कहेंगे, हम इसका सामना करने के लिए तैयार नहीं थे. हर दिन कोई ना कोई टोकता रहता और हमें अच्छा नहीं लगता. इसलिए हमने एक मित्र से पचास हजार रुपए उधार लेकर दावत दी.

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हमने सोचा था इस साल अप्रैल में वेतन बढ़ जाएगा. दोनों मिलकर पर्सनल लोन और दावत के लिए गए उधार पैसे लौटा देंगे. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. ऊपर से दोस्त की नौकरी भी चली गई. उसने पैसे लौटाने पर जोर दिया तो हमने एक बार फिर पर्सनल लोन लेकर किसी तरह उसके पैसे लौटाए.

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कंपनी की स्थिति भी‌ अच्छी नहीं दिख रही. अब क्या करें कुछ समझ नहीं आ रहा. हम दोनों एक ही कंपनी में हैं, यह संभव है किसी एक की नौकरी चली जाए. अब कुछ समझ नहीं आ रहा है, बचत एकदम जीरो है. फ्लैट बेचने का विकल्प भी है. लेकिन एक बार फिर सामाजिक रूप से आलोचना का डर ऐसा करने से रोक रहा है.'

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निधि को सबसे पहले वह करना चाहिए, जिससे उनकी आर्थिक मुश्किलें कम हो सकती हैं. अगर फ्लैट की सही कीमत से कुछ कम दाम भी मिल रहे हैं, तुरंत उसे बेचकर संकट से बाहर हो जाना चाहिए. खर्चों में कटौती, बचत की ओर ध्यान देना चाहिए. क्योंकि जैसा उन्होंने बताया किसी एक की नौकरी कभी भी खतरे में पड़ सकती है.

वर्तमान को सुरक्षित कीजिए. जीवन, असीम संभावना है. इसके प्रति आस्थावान बनिए. लोग क्या कहते हैं, इसकी जगह सहज विवेक को केंद्र में रखिए. ऐसे मकान आगे चलकर कई लिए जा सकते हैं. लेकिन आज की जरूरत स्वयं को तनाव, डिप्रेशन, गंभीर आर्थिक संकट से बचाने की होनी चाहिए.


यह निधि का प्रश्न होने के साथ ही गहरे सामाजिक संकट का संकेत भी है. आपको अपने सुख को 'नए' तरह से परिभाषित करने की जरूरत है. गंभीर आर्थिक स्थितियों की शुरुआत हो चुकी है. जितना संभव हो क्रेडिट कार्ड, पर्सनल लोन से दूर रहें. जरूरत और 'किसी भी इच्छा की तीव्रता' के बीच सही दूरी जरूरी है.

पता: दयाशंकर मिश्र (जीवन संवाद)
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First published: August 31, 2019, 11:20 AM IST
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