#जीवन संवाद: मंदी का सामना!

दयाशंकर मिश्र | News18Hindi
Updated: August 28, 2019, 5:52 PM IST
#जीवन संवाद: मंदी का सामना!
जीवन संवाद

मंदी (Recession) को किसी एक व्यक्ति ने आमंत्रित नहीं किया. यह पूरे समाज का संकट है, इसलिए हम सबको सजग रहने की जरूरत है.

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  • Last Updated: August 28, 2019, 5:52 PM IST
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कठिन समय की सबकी अपनी परिभाषा है. इसे तरह-तरह से आर्थिक रूप से समझाने के प्रयास किए जा रहे हैं. सरकार और कंपनियां अपनी तरह से इससे बाहर निकलने के जतन कर रही हैं. हम यहां अर्थशास्त्र की चर्चा नहीं करने जा रहे हैं, बल्कि उससे प्रभावित होने वाले जीवन से जुड़ी कुछ बातों पर संवाद करेंगे. सबसे पहले सच को समझना जरूरी है. घर से निकलते वक्त आपको पता होता है, दिन है कि रात.

दिन के समय आप दिन के अनुकूल तैयारी करते हैं, रात के वक्त उसके अनुकूल आचरण करते हैं. सबसे पहले स्थिति को स्वीकार करना जरूरी है. इससे ऐसी चीजों का सामना करना भी आसान हो जाता है, जो नियंत्रण में नहीं होती हैं.

मंदी ऐसा ही संकट है. बड़ा और गहरा. इसे किसी एक व्यक्ति ने आमंत्रित नहीं किया, यह पूरे समाज का संकट है, इसलिए हम सबको सजग रहने की जरूरत है..




छोटे उदाहरण से बात को सरल करते हैं. एक मित्र ने पूछा, घर लेने के लिए क्या यह अच्छा समय है? तैयार मकान एकदम सस्ते हैं. क्यों न ले लिया जाए. वह मुझे बहुत प्रिय हैं, इसलिए मैंने थोड़े संकोच के साथ कहा- 'हम केवल इसलिए घर नहीं खरीद सकते, क्योंकि वह सस्ते हैं. हमें ऐसे देखना चाहिए कि हमारे करियर की दशा कैसी है. जिस क्षेत्र में हम काम कर रहे हैं, वह किस ओर जा रहा है. अपनी आर्थिक स्थितियों को बढ़ी हुई ईएमआई के साथ संभालने में कितने सक्षम हैं.' उन्होंने बात सुनी, उसके कुछ दिन बाद ही घर ले लिया.

#जीवनसंवाद : दुख सहने की कला!

घर लेने के कुछ समय बाद ही मंदी के कारण उनकी नौकरी पर संकट आ गया. जो घर उन्होंने 6 महीने पहले लिया था, आज उसे कोई भी खरीदने को तैयार नहीं. ईएमआई देना मुश्किल पड़ रहा है. मुश्किलों का सामना करने के लिए वह तैयार नहीं हैं. इसके लिए वह अपने भाग्य को दोषी करार दे रहे हैं. अपने भाइयों से आर्थिक सहायता ना मिल पाने के कारण उन्हें दोषी ठहरा रहे हैं. वह घर कुछ कीमत पर अभी भी बिक सकता है, लेकिन केवल अपनी 'गणितीय' बुद्धि के कारण वह नहीं बेच रहे हैं. उनका मानना है कि कुछ वक्त में सब ठीक हो जाएगा. जबकि नौकरी जाने के बाद उन पर कर्ज बढ़ने के अलावा और कुछ कहीं नहीं बढ़ रहा है.
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मैं अर्थशास्त्री नहीं, केवल जीवन को हर चीज़ पर प्राथमिकता देने के सामान्य सिद्धांत पर चलने का निवेदक हूं. संकट कैसा भी हो, चुनना जीवन को ही है. घर, नौकरी, गाड़ी सब कुछ पुनः अर्जित किया जा सकता है, केवल जीवन है, जिसे नष्ट तो किया जा सकता है, लेकिन पाया नहीं जा सकता.

#जीवनसंवाद : खुद तक वापसी का रास्ता !
इसलिए, जीवन को सबसे अधिक महत्व देना है. किसी भी चीज को बचाए रखना, खो देना, पुनः पाना संभव है. बस इसके लिए एक ही शर्त है, जीवन का सुरक्षित, स्वस्थ होना!

इस समय थोड़े पैसे को भी बहुत समझने, उसे मोती की तरह खर्च करने का समय है. याद कीजिए, आपके पिताजी कैसे कम कमाई में सरलता से जीवन का निर्वाह करते थे. ऐसा इसलिए होता था क्योंकि उनका बचत के सिद्धांत पर बहुत गहरा विश्वास था. हमने बचत को खो दिया है. हमने सामाजिक रूप से एक-दूसरे पर अपनी निर्भरता को खो दिया है. अब एक ऐसा समय है, जिसमें हम अकेले भी हैं, बचत भी नहीं है.


#जीवनसंवाद : जो साथ नहीं हैं! 

अपनी जीवनशैली पर गहरा विश्वास रखिए, किसी दूसरे की नकल को एकदम अनदेखा कीजिए. जरूरत और विलासिता के अंतर को अनुशासन के साथ लागू कीजिए. मंदी कुछ और नहीं, अर्थव्यवस्था के आसमान पर छाए हुए बादल हैं. हम सब जानते हैं कि बादल अंततः छंट जाते हैं. मंदी को भी जाना ही है, बस हमें इतना खयाल रखना है कि वह मनुष्य और मनुष्यता को कम से कम चोट पहुंचाए बिना निकल जाए. एक-दूसरे का साथ दीजिए, मदद करने का सिद्धांत लागू कीजिए. किसी भी रकम को छोटा मत समझिए. कर्ज़ को जीवन से बड़ा होने की अनुमति मत दीजिए.

पता: दयाशंकर मिश्र (जीवन संवाद)
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सेक्टर 16 A, फिल्म सिटी, नोएडा (यूपी)
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First published: August 28, 2019, 8:02 AM IST
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