Home /News /jeevan-samvad /

#जीवनसंवाद: दूसरों को नहीं जीतना...  

#जीवनसंवाद: दूसरों को नहीं जीतना...  

जीवन संवाद

जीवन संवाद

स्वतंत्रता, खूबसूरत शब्द है लेकिन हम जीवन में इसका उपयोग दूसरे के लिए 'गुलामी' के संदर्भ में कहीं अधिक करते हैं.

    रिश्तों में सबसे बड़ी बाधा एक दूसरे को जीतने की चाहत है! एक दूसरे को 'काबू' करने जैसी चीजें बहुत सामान्य होने के साथ तनाव का बड़ा कारण भी हैं. स्वतंत्रता, खूबसूरत शब्द है. लेकिन  ज्यादातर लोग जीवन में इसका उपयोग दूसरे के लिए 'गुलामी' के संदर्भ में कहीं अधिक  करते हैं.

    अपनी स्वतंत्रता की घोषणा करते हुए असल में अपने आसपास उन सभी लोगों पर अधिकार का प्रयास आरंभ कर देते हैं जो किसी न किसी रूप में हमारे संसार का हिस्सा हैं. 'डियर जिंदगी' जीवन संवाद के पिछले अंकों में जंगल के अभिभावक के रूप में व्यवहार की चर्चा कर चुके हैं. जंगल जिस तरह से विविधता, भिन्नता का पोषण, संरक्षण करता है, वैसा ही हमें निजी संबंधों में करने की जरूरत होती है.

    #जीवन संवाद : भूलने का सुख!

    विवाह इसका सबसे सरल उदाहरण हैं. अक्सर वर पक्ष की ओर से लड़के को समझाया जाता है कि पत्नी के 'अनुसार' नहीं चलना है. उसे स्वयं पर हावी नहीं होने देना है. तो दूसरी ओर वधु पक्ष की ओर से समझाया जाता है कि कैसे लड़के को 'काबूू' में रखना है. यह समझाइश, काउंसलिंग इतनी अधिक हम पर हावी हो चुकी है कि इसका उपयोग  परंपरा की तरह हो रहा है.

    जो कुछ बरसों से सिखाया जाता रहा है, वह इतनी आसानी से हमारी समझ से कैसे 'बाहर' हो जाएगा. इस संबंध में देश के अनेक हिस्सोंं से ई-मेल मिल रहे हैं. जिसमें घर के तनाव का सबसे बड़ा कारण एक-दूसरे पर काबू करने के अभियान हैं. अब जबकि समाज के दरवाजे स्त्रियों के लिए खुलनेे आरंभ हो रहे हैं, पुरुषों के मन मस्तिष्क की खिड़कियों का खुलना भी जरूरी हैं. जो रिश्ता जीवन भर की कसमों के साथ शुरू होना है, इसका आरंभ एक-दूसरे को 'काबू', नियंत्रित करने जैसे सामंती विचारों के साथ कैसे हो सकता है. हमें इस बात को समझना होगा कि जैसे हर चीज बदल रही है रिश्तों को भी बदलते समय के अनुसार अपना व्याकरण, परिभाषा बदलनेे की जरूरत है.

    भारत में जिस तेजी से तलाक की संख्या बढ़ रही है, उतनी ही अधिक तेजी से रिश्तों में तनाव, गहरी उदासी और डिप्रेशन भी बढ़ रहा है. हम छोटी-छोटी बातों को इतना बड़ा कर देते हैं कि वह हमारे जीवन पर भारी पड़ जाती हैं. जैसे छोटे-छोटे मनमुटाव को राई का पहाड़ नहीं बनाना है, वैसे ही पहाड़ जैसी जिंदगी को भी 'राई' नहीं समझना है.


    विवाह, साथ रहने का अर्थ किसी के जीवन पर अधिकार करना नहीं है. उसेे काबू में रखना, करना नहीं है. जिसे प्रेम से नहीं जीता जा सकता, डर से नियंत्रित करना संभव नहीं. कुछ हद तक व्यावसायिक जीवन,करियर में यह संभव हो भी जाए लेकिन जीवन के लिए 'नियंत्रण' की भावना निरर्थक है. जितना संभव हो सके एक-दूसरे से प्रेम, आत्मीयता और स्नेह को सूत्रधार बनाया जाए!

     

    पता : दयाशंकर मिश्र (जीवन संवाद)
    Network18
    एक्सप्रेस ट्रेड टावर, 3rd फ्लोर, A विंग
    सेक्टर 16 A, फिल्म सिटी, नोएडा (यूपी)
    ईमेल : dayashankarmishra2015@gmail.com
    अपने सवाल और सुझाव इनबॉक्‍स में साझा करें:
    (https://twitter.com/dayashankarmi )(https://www.facebook.com/dayashankar.mishra.54)

     

    #जीवन संवाद : पुराने, गहरे दुख!

    #जीवनसंवाद: ईर्ष्या का तनाव!

    Tags: Dayashankar mishra, JEEVAN SAMVAD, Life Talk, Motivational Story

    विज्ञापन

    राशिभविष्य

    मेष

    वृषभ

    मिथुन

    कर्क

    सिंह

    कन्या

    तुला

    वृश्चिक

    धनु

    मकर

    कुंभ

    मीन

    प्रश्न पूछ सकते हैं या अपनी कुंडली बनवा सकते हैं ।
    और भी पढ़ें
    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज

    अधिक पढ़ें

    अगली ख़बर