#जीवनसंवाद : डर और आस्था!

जिंदगी, हुनर से अधिक साहस की परीक्षा है! जो निर्णय लेता है, डटा रहता है, जीवन उसका ही अभिनंदन करता है!

दयाशंकर मिश्र | News18Hindi
Updated: July 22, 2019, 5:09 PM IST
दयाशंकर मिश्र | News18Hindi
Updated: July 22, 2019, 5:09 PM IST
रजत पेशे से शिक्षक हैं. मध्य प्रदेश, इंदौर में रहते हैं. उनको अध्यापन पसंद है. बच्चों से स्नेह करते हैं. तीन महीने पहले की बात है, उन्होंने 'डियर ज़िंदगी' जीवन संवाद को लिखा कि वह एक मोबाइल कंपनी में एचआर की नौकरी छोड़ना चाहते हैं, क्योंकि वह अपने काम में कुछ नवीनता नहीं देखते. हमने उनसे पूछा कि क्या करना चाहते हैं तो उन्होंने पढ़ाने की इच्छा प्रगट की. मैंने कहा, अध्यापन से इतना स्नेह है तो इसी काम में क्यों नहीं जुट जाते. उन्हें बात ठीक लगी लेकिन उनका कहना था कि यह काम अब तक कभी किया नहीं तो उन्हें अवसर कैसे मिलेगा!

रजत की बात तकनीकी रूप से ठीक थी, लेकिन उसमें बस एक कमी थी. रजत शर्मा, अपने ही बारे में कुछ भूल गए थे. एमए हिंदी में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के गोल्ड मेडलिस्ट हैं. भाषा विज्ञान में उनके शोध पत्र प्रतिष्ठित जर्नल में छप चुके थे. सबसे बड़ी बात वह हिंदी से प्रेम करने ऐसे व्यक्ति हैं, अध्यापक और बच्चों से भी उतना ही प्रेम है.

रजत 'डिप्रेशन और आत्महत्या के विरुद्ध' इस विनम्र प्रयास के आरंभिक पाठक हैं. मेरे आग्रह पर वह इंदौर के कुछ प्रतिष्ठित स्कूलों में आवेदन के लिए तैयार हो गए. लगभग दस स्कूलों में उनका आवेदन खारिज कर दिया गया. लेकिन अंततः ग्यारहवीं बार उनको सफलता मिल गई! वह जब भी निराश हुए, मैंने उनसे केवल इतना कहा, 'इसलिए, मत डरिए कि लोग क्या कहेंगे. क्योंकि 'लोग' कहने के अलावा कुछ नहीं करते. वह जो आपने छोड़ा है, आपके जीवन के लिए छूटने योग्य ही था. बिना कुछ छोड़े आज तक किसी को कुछ भी हासिल नहीं हुआ!'

रजत के लिए, नौकरी छोड़कर 'तमन्ना' के लिए निकल जाना और उसके बाद सफल होना, इतना ही आसान और मुश्किल है, जैसा एक पर्वतारोही के लिए उसका सफर! सब कुछ आसान भी है और सब कुछ मुश्किल भी! इस बात को कभी भी सैद्धांतिक, दर्शनशास्त्र का विषय मानकर खारिज मत कीजिए. मेरा इस बात में बहुत गहरा यकीन है कि जैसे पानी किसी डूबने वाले को तीन अवसर देता है, बचने के. (ऐसा हमारे गांव में कहा जाता है, गहरी नदी भी तीन मौके देती है बाहर निकलने के) ठीक वैसे ही, जिंदगी भी हर किसी को कम से कम तीन मौके जरूर देती है!

बस इतना जरूर है कि, अक्सर हम इन अवसरों को पहचानने में गलती करते हैं. जिंदगी, हुनर से अधिक साहस की परीक्षा है! जो निर्णय करता है, डटा रहता है, जीवन उसका ही अभिनंदन करता है!


रजत जैसे खयाल हम सबको अक्सर आते रहते हैं. लेकिन हम उसे उतनी ही तेजी से जाने-अनजाने खारिज करते रहते हैं. सपनों की यात्रा के प्रति समर्पण, निष्ठा और आस्था ही जीवन में उसे पाने का रास्ता है, जो असल में हम होना चाहते हैं! इसलिए, मेरा अनुरोध है कि जब भी कोई डर आपको सताए, आपकी बांहों में आशंका की बेड़ियां डालना चाहे, उसका हमेशा जीवन की आस्था से मुकाबला करिए!

पता : दयाशंकर मिश्र (जीवन संवाद)
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First published: July 22, 2019, 7:54 AM IST
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