#जीवनसंवाद : खुद तक वापसी का रास्ता !

हम खुद तक लौटने का रास्ता भूलकर जीवन से प्रसन्न नहीं रह सकते. हम खुश तो दिख सकते हैं लेकिन आनंदित नहीं. दो इंच की मुस्कान दूसरों को लुभाती है, लेकिन भीतर की रिक्तता से संकट गहराता है.

दयाशंकर मिश्र | News18Hindi
Updated: August 16, 2019, 1:28 PM IST
दयाशंकर मिश्र | News18Hindi
Updated: August 16, 2019, 1:28 PM IST
आप घर, परिवार से दूर जा सकते हैं. मित्रों से दूर जा सकते हैं. चाहने वालों की पहुंच से आगे निकल सकते हैं. आप जहां चाहें, वहां जा सकते हैं. बस, इस प्रक्रिया में यह ध्यान रहे है कि आप इतना आगे न निकल जाएं कि खुद तक लौट न सकें! खुद तक लौटना बहुत मुश्किल होता है. इसलिए, जिंदगी में कितनी भी दूर निकल जाएं, बस इतना खयाल रहे कि खुद के पास रहें. खुद तक लौटने के सारे दरवाजों की अच्छी तरह जांच करते रहें कि कहीं वह बंद तो नहीं हो रहे.

आपने बचपन में 'अलीबाबा और चालीस चोर की कहानियां सुनी होंगी (अगर नहीं तो अब सुनिए लीजिए). उसमें ऐसी गुफा का जिक्र है, जिसमें सोने का अंबार है. कुछ मनुष्य उसमें किसी तरह प्रवेश करने का भेद तो संयोगवश जान लेते हैं, लेकिन स्वर्ण मुद्रा के लालच में इतने बौरा जाते हैं कि लौटते समय उसी 'पासवर्ड' को भूल जाते हैं, जिसके सहारे वह स्वर्ण भंडार तक पहुंचे. जबकि वह बेहद सरल था.

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हमारी स्थिति भी कुछ इसी तरह है. हम जिन सपनों, चाहतों के साथ जीवन की यात्रा आरंभ करते हैं, बहुत जल्द, आधे रास्ते ही उन्हें भूल बैठते हैं. हम घर से जिस चीज के लिए निकले हैं, रास्ते में उसे भूलने पर कई बार उससे मिलती-जुलती चीज़ लेकर घर लौट आते हैं. अगर अंदाजा ठीक निकला तो कोई बात नहीं. लेकिन अगर दांव उल्टा पड़ गया तो कई बातें सुनने को मिल सकती हैं. यहां तक तो फिर भी स्थिति नियंत्रण में रहती है, जैसे उस स्वर्ण मुद्रा भंडार के भीतर पहुंचा व्यक्ति पासवर्ड भूलने की स्थिति में जीवित नहीं लौट सकता, उसी तरह हम खुद से बहुत दूर निकलकर, खुद तक लौटने का रास्ता भूल जीवन से प्रसन्न नहीं रह सकते.

हम खुश तो दिख सकते हैं लेकिन आनंदित नहीं. बाहर से दो इंच की मुस्कान दूसरों को लुभाती है, लेकिन भीतर की रिक्तता से संकट गहरा जाता है.


आपने कभी सोचा है, कैसे एक दिन अच्छा भला करोड़पति, अरबपति, विचारवान, लोकप्रिय व्यक्ति जीवन से हार कर उसके अग्निपथ की जगह आत्महत्या को चुन लेता है. इसकी मूल वजह क्या है? बस इतनी कि वह खुद तक लौटने का रास्ता भूल गया है. जीवन की बड़ी समस्या के हल अक्सर बहुत छोटे, सरल, सामान्य होते हैं. उन तक पहुंचने के लिए केवल आपका स्वयं से संपर्क होना जरूरी है. आप क्या हैं जीवन को इससे कोई अंतर नहीं पड़ता. उसे केवल एक ही चीज़ से अंतर पड़ता है कि आपकी जीवन में आस्था कितनी है.

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समाधान अक्सर विशिष्टता में नहीं, बल्कि सामान्य चीजों को सही तरह ग्रहण करने से मिलता है.
हम ख़ुद तक इसलिए नहीं लौट पाते क्योंकि अपनी यात्रा के आरंभ से खुद को दूर कर लेते हैं. अपनी कसौटी पर जिंदगी को कसने की जगह उसे हमेशा दूसरों के नजरिए से कामयाब बनाने की कोशिश करते रहते हैं. इसलिए, संसार, दूसरों को जानने की अपेक्षा स्वयं को जानने, अपने नजदीक रहने का जितना अधिक प्रयास किया जाएगा, जीवन उतना ही प्रिय बना रहेगा!

पता : दयाशंकर मिश्र (जीवन संवाद)
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First published: August 15, 2019, 8:22 AM IST
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