#जीवनसंवाद: स्थायी!

जीवन संवाद
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Jeevan Samvad: कोरोना ने हमें समझाने की कोशिश की है कि अंततः प्रेम, अहिंसा और स्नेह ही हमें बचाएगा. हम इनको छोड़कर जितनी दूर निकलते जाएंगे, हमारा जीवन उतना ही मुश्किल होता जाएगा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 21, 2020, 12:02 AM IST
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जीवन में हम स्थायित्व को लेकर जितने अधिक आशावादी होते जाते हैं, उतनी ही अधिक हमारी जड़ता बढ़ती जाती है. कोरोना ने इस दिशा में सबसे बड़ा काम यह किया है कि उसने हमें जीवन के महत्व को नए सिरे से समझाया है. उसने समझाया है कि अंततः प्रेम, अनुराग और एक-दूसरे का स्नेह ही हमें बचाएगा. हम इनको छोड़कर जितनी दूर निकलते जाएंगे हमारा जीवन उतना ही मुश्किल होता जाएगा. हमारे एक परिचित अक्सर कहते हैं कि पढ़ने के लिए वक्त नहीं मिलता. जीवन में कुछ स्थायी हो जाए, तो पढ़ना-लिखना शुरू करूं. दूसरों के लिए कुछ करने का बहुत मन करता है, लेकिन समय नहीं मिलता. एक बार जीवन में सबकुछ स्थायी हो जाए, फिर मैं कुछ करना चाहता हूं.


जिनकी मैं आपसे कहानी कह रहा हूं. वह जयपुर में रहते हैं. अपने स्थायी घोसले की तलाश करते हुए जीवन के 47 बरस पूरे कर चुके हैं. कोरोना जब फैलने को था, तो सबसे कहते थे कि अपनी चिंता करो. यह समय दूसरे के बारे में सोचने का नहीं है. समय ने करवट ली. वह भी कोरोना की चपेट में आ गए. उनको प्लाज्माा देने के लिए एक ऐसा दोस्त सामने आया, जिससे कई बरस से उन्होंने बातचीत बंद की हुई थी. इसलिए, क्योंकि वह उनकी मनचाही दिशा में जाने को राजी न हुआ था. अब वह वहां कुशलता से हैं, लेकिन जीवन के बारे में उनका नजरिया हमेशा के लिए बदल चुका है. इनकी जीवनसाथी आरती जैन, 'जीवन संवाद' की सुधी पाठक हैं. उन्होंने ही हमसे यह अनुभव साझा किया है!

यह जो स्थायी होना है, अब धीरे-धीरे अप्रासंगिक हो चला है. जब तक सरकारी नौकरियों की आस थी. एक ही शहर में रहते हुए अपने कारोबार और आजीविका के साधन जुटाने की बात थी, तब तक तो हम बहुत ही चीजों को स्थायी होने के नाम पर टालते रहते थे, लेकिन अब दुनिया बहुत अधिक बदल चुकी है. अब तो कुछ भी स्थायी नहीं. बस वही तीन चीजें हैं जिन्हें स्थायी रखने की कोशिश होनी चाहिए. प्रेम, अहिंसा और स्नेह!

पिछले कुछ वर्षों में हमारी महत्वाकांक्षा इतनी तेजी से बढ़ गई है कि इसके मुकाबले तो हमारी उम्र भी नहीं बढ़ती. हमने महत्वाकांक्षा को सबकुछ मान लिया. जीवन में अपने से अधिक कीमती अपने कुछ होने को मान लिया. इसने हमारी पूरी जीवन प्रक्रिया को बदलकर रख दिया. यह जो हमारे जीवन में डायबिटीज, हाइपरटेंशन, ब्लड-प्रेशर और अनिद्रा घुली है, उसका बहुत सारा हिस्सा हमारी उस जीवनशैली से आता है, जिसमें हमने सबकुछ जल्दी-जल्दी और तुरंत पाने का निर्णय किया. अपने बचपन में जब मैं लौटकर जाता हूं, तो पाता हूं कि चीजें कम थीं, लेकिन सुख बहुत गहरा था. अब जबकि हमारे उन्हीं लोगों के आसपास सााधन बढ़े, सुख अकेला और कमजोर हो गया है. सुख के अकेले और कमजोर होते जाने से अधिक नुकसान हमारा कुछ नहीं हुआ. जीवन के आनंद की कीमत पर अगर हम सपनों के स्वेटर बुन रहे हैं, तो हमें थोड़ा ठहरने की जरूरत है!



#जीवनसंवाद: खानाबदोश!

जिनसे आपका प्रेम है, स्नेह है, उनको मत टालिए. उनकी अवहेलना मत कीजिए. अपने लिए तो हम सभी जीते हैं, लेकिन अपने पीछे देखने पर पाइएगा कि पहले हम दूसरे के लिए थोड़ा अधिक जीते थे! कोरोना ने हमारी दूर जाती करुणा को थोड़ा पास लाने का काम किया है. हम सबको अपने अपने जीवन में झांकने का अवसर दिया है. तमाम कष्ट सहते हुए इस जीवन की ओर जाने के अवसर को हमें बेकार नहीं जाने देना चाहिए.

#जीवनसंवाद: दृष्टि का अंतर!

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