#जीवनसंवाद: पूर्णता के दावे!

जीवन संवाद
जीवन संवाद

Jeevan Samvad: हमें अपने अहंकार के दावों से बहुत शक्ति मिलती है. अहंकार को सारा खाद-पानी अपने पूर्ण होने के विचार से मिलता है. हम भूल रहे हैं कि पूर्णता केवल ख़याली पुलाव है. इसकी कोई महक, सुगंध नहीं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 21, 2020, 2:27 PM IST
  • Share this:
गुरु नानक अपनी यात्रा के दौरान गांव के बाहर ठहरे थे. उसी गांव की पहाड़ी पर एक फकीर रहता था. जिसकी पूर्णता के बारे में नजदीकी गांवों में बड़ी प्रसिद्धि थी. उसने पहाड़ी पर स्थित किले में आश्रम बना लिया था. सदैव किले में रहता. किसी से मिलने कभी भी बाहर नहीं आता. बड़े घर, महल, किले में रहने का अहंकार नया नहीं है, यह तो हमारे जितना ही पुराना है.


नानक को उनके बारे में बताया गया कि संसार में एक ही व्यक्ति है, जो पूर्णता को उपलब्ध हो गया है. नानक तो गांव के बाहर छोटी कुटिया में ठहरे थे. उन्होंने फकीर को संदेश भिजवाया, 'मैं भी आपसे मिलना चाहूंगा और जानना चाहूंगा कि पूर्णता को कैसे उपलब्ध हुआ जाता है. मैं आपसे मिलने का इच्छुक हूं'.

जो व्यक्ति नानक का संदेश लेकर गए फकीर ने उनके हाथ एक प्याले में पानी भरकर भेजा. उसने इतने जतन से प्याला भरा कि उसमें एक बूंद की भी गुंजाइश न रहे. नानक को नीचे भिजवा दिया, 'मैं इस तरह पूर्ण हूं'. जब वह व्यक्ति नीचे प्याला लेकर लौटा तो आसपास के लोगों ने कहा, देखो उसने अपनी पूर्णता को कैसे सुंदरता से अभिव्यक्त किया है. वह पूर्णता के अहंकार को नहीं देख पा रहे थे. नानक उसे देख मुस्कराए. एक छोटे फूल को उस प्याली में डाल, वापस लौटा दिया!
ये भी पढ़ेंः- #जीवनसंवाद: सबसे अच्छा कौन!



प्याला मिलते ही फकीर नंगे पांव दौड़ा चला आया. नानक के पैरों में गिर पड़ा. उसने कहा, 'मैं सोचता था कि मैं पूर्ण हो गया. मैं कितना गलत था'. नानक ने उसे गले लगाते हुए कहा, 'आदमी पूर्ण होने की कोशिश में जो भी करे, उसमें कुछ जगह तो खाली रह ही जाती है. एक फूल तो तैराया ही जा सकता है. एक फूल भी कोई कोई छोटी बात नहीं'!


नानक के भाव को समझिए. बीते कुछ समय में जिस एक शब्द ने हमारे जीवन में बहुत अधिक हलचल मचाई, वह यही पूर्णता (परफेक्शन) का अधूरा भाव है. हर कोई अपने को पूर्ण करने की घोषणा में लगा है. इसे सबसे अधिक बल बॉलीवुड इंडस्ट्री से मिला. जहां किसी प्रचार कंपनी ने एक विशेष अभिनेता की छवि के निर्माण के लिए निरंतर दोहराने का काम किया. प्रकृति की बनाई कोई भी कृति पूर्ण नहीं है. जब हम पूर्ण हैं ही नहीं, तो हमारा बनाया कुछ भी पूर्णता को उपलब्ध होना संभव नहीं. हां, उस फकीर की तरह हम भी चाहें तो अपने-अपने किले बनाकर दावे कर सकते हैं. हमें अपने अहंकार के दावों से बहुत शक्ति मिलती है. अहंकार को सारा खाद-पानी अपने पूर्ण होने के विचार से मिलता है.

#जीवनसंवाद: पुरुषों को रोना सीखना होगा!

हम भूल रहे हैं कि पूर्णता केवल ख़याली पुलाव है. इसकी कोई महक, सुगंध नहीं. जीवन, अकेले चलने का नाम नहीं. अकेला केवल रेगिस्तान होता है. हरे-भरे जंगल कभी अकेले नहीं होते. रिश्तों में तनाव की वजह पूर्णता के भाव का बढ़ते जाना है. एक-दूसरे का साथ, निर्भरता कमजोरी नहीं गुण हैं. इसलिए, अपनी विचार प्रक्रिया के प्रति सजग बनिए. देखते रहिए कि कहीं प्याला भरने का भाव तो मन में गहरा नहीं हो रहा. जब कभी होने लगे, तो किसी ऐसे व्यक्ति के पास पहुंचिए, जो स्नेह के फूल से आपको जीवन, प्रेम और आनंद का बोध करा सके.

आप अपने मन की बात फेसबुक और ट्विटर पर भी साझा कर सकते हैं. ई-मेल पर साझा किए गए प्रश्नों पर संवाद किया जाता है.
ईमेल: dayashankarmishra2015@gmail.com
https://www.facebook.com/dayashankar.mishra.54
https://twitter.com/dayashankarmi
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज