#जीवनसंवाद: सुकून शायद है!

#जीवनसंवाद: सुकून शायद है!
जीवन संवाद

Jeevan Samvad: हमसे प्रकृति का साथ छूट रहा है. हम प्रकृति के उल्टी दिशा में भाग रहे हैं. इस शरीर को जिस मिट्टी में मिलना है, वह एकदम उसी मिट्टी, पानी और हवा के विपरीत जा रहा है! सुख कहां से आएंगे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: June 23, 2020, 10:43 AM IST
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दिमाग की स्थिरता में अनूठी योग्यता है, जो हमें जीवन के अनेक संकटों से बचाने की क्षमता रखती है. दिमाग में ठहराव का होना जिंदगी को सरल बनाता है. ठहरने में कोमलता, प्रेम है, जिसे गति के चक्कर में हम भूल गए! ठहरना, मानो जिंदगी से कहीं दूर चला गया. किसी को ठहरने के लिए कहने पर वह नाराज़ हो सकता है. दुखी हो सकता है. इसलिए तो हम सब बहुत तेज़ी से भाग रहे हैं. थोड़ा पीछे लौट कर देखेंगे तो समझ पाएंगे कि धीमी दुनिया में जिंदगी में गहरा सुकून था.

सुकून ने ही जीवन को लंबी आयु से लेकर उन सभी चीजों को संभव बनाया जिन्हें हम सुख कहते हैं. लेकिन इधर गति के फेर में हम धीमे का महत्व भूल गए. अपने दिमाग और उससे जुड़ी बीमारियों को बहुत ध्यान से देखने पर हम पाएंगे कि इसमें गति का बढ़ना बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. ठीक उसी तरह जैसे जब तक चौबीस घंटे के न्यूज़ चैनल नहीं आए थे, हम दर्शक के रूप में खबरों की प्रतीक्षा करते थे. धीरे-धीरे खबरें बाढ़ बन कर आने लगीं, टेलीविजन अपनी मुख्य भूमिका से दूर चले गए. अब उनके सामने विचित्र-विचित्र संकट आ रहे हैं.

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गति और गुणवत्ता एक-दूसरे के सहयोगी नहीं हैं. इसलिए गति और गुणवत्ता का मिजाज अलग है. जहां केवल दौड़ना ही है, गति उनके लिए उत्तम है. लेकिन जहां मूल्य हैं, जीवन की आशा है. कोमलता और सुकून है. कुछ करने का सुख है, वहां गुणवत्ता गति का साथ पकड़कर नहीं चल सकती. उसे दूसरा रास्ता पकड़ना होगा!




जैसे-जैसे दिमाग़ भागने लगा, रात-दिन एक ही तरह के काम में खपने लगा. उसका सीधा असर जीवन की गुणवत्ता पर पड़ा. हमारी आंखें, आंतें, लीवर और फेफड़े सहित हर हिस्सा गति के कारण ही संकट में आ रहा है. हमसे प्रकृति का साथ छूट रहा है. हम प्रकृति के उल्टी दिशा में भाग रहे हैं. इस शरीर को जिस मिट्टी में मिलना है, वह एकदम उसी मिट्टी, पानी और हवा के विपरीत जा रहा है! सुख कहां से आएंगे.

अत्यधिक चिंता, हर दिन नई चीजों की लालसा, हर समय केवल और केवल उपभोग की चिंता और संग्रह का आय की तुलना में कई गुना बढ़ जाना हमारी बीमारियों की मुख्य वजह हैं.


अब तो डॉक्टरों के साथ, मनोचिकित्सक मनोवैज्ञानिक भी इस बात को कह रहे हैं कि हाई ब्लड प्रेशर, हाइपरटेंशन, डायबिटीज, आंतों की समस्या का भी तनाव से गहरा संबंध है. तनाव हमारे दिमाग से लेकर रोग प्रतिरोधक क्षमता तक पर असर करता है. यह सभी बीमारियां हमारी जीवन शैली से ही आई हैं. यह पहले उस जीवन का हिस्सा नहीं थे, जहां सुकून बड़ी मात्रा में था, भौतिक सुविधा कम! हम किस रास्ते जा रहे हैं, यह हमें ही तय करना होगा! कहां तक जाना है, कहां रुकना है इस ओर ध्यान दिए बिना यात्रा ठीक तरह पूरी नहीं होगी.

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हमेशा ध्यान रखिए रास्ते कितने ही लुभावने, सुरक्षित क्यों न हों, गति अवरोधक (स्पीड ब्रेकर) जरूर होते हैं! हमें जिंदगी में भी स्पीड ब्रेकर चाहिए. जिससे जीवन को संतुलन मिले. गति और प्रेम का. जीवन और गति संतुलित होकर चलने से ही यात्रा के उस पड़ाव पर पहुंचेंगे, जिसे जीवन का हासिल कहा जा सके. एक छोटी सी कहानी कहता हूं, आपसे! संभव है, इससे दिमाग की स्थिरता की बात और अधिक स्पष्ट हो सके.


एक धनी किसान था. एक दिन उसका बहुत अच्छा घोड़ा बाड़ तोड़कर भाग गया. गांव वालों को पता चला तो किसान के पास पहुंचे और कहा- घोड़ा भाग गया बड़े दुख की बात है. किसान ने कहा, शायद है! तीन दिन बाद घोड़ा जंगल से वापस आया और साथ में तीन और बेहतरीन जंगली घोड़े भी ले आया. गांव वालों ने कहा तुम बहुत खुश किस्मत हो यह तो बहुत खुशी की बात है! किसान ने शांत मन से उत्तर दिया- शायद है!

कुछ दिन बाद नए घोड़े को काबू करने के चक्कर में उसका इकलौता जवान बेटा घायल हो गया. गांव वाले आए और कहा आपके बेटे की जीवन और मृत्यु का प्रश्न आ गया बड़े दुख की बात है. किसान ने कहा- शायद है! कुछ दिन बाद राजा के सैनिक गांव आए. पड़ोसी राज्य से भीषण युद्ध छिड़ गया था. सैकड़ों लोग मारे गए थे. सैनिकों की कमी पड़ रही थी. राजा ने आदेश दिया सभी जवान लोगों को अनिवार्य रूप से सेना में भर्ती कर लिया जाए. गांव के सभी जवान लोगों को सैनिक अपने साथ ले गए. उस किसान के यहां भी सैनिक आए बेटे को देखा लेकिन उसकी दशा इतनी खराब थी कि उसे वहीं छोड़ गए!

गांव के लोगों ने कहा हमारे बेटे तो युद्ध में गए! अब पता नहीं लौटें कि नहीं तुम्हारा बेटा बच गया. तुम्हारी किस्मत कमाल की है. किसान ने एकदम शांत और स्थिर चित्त से कहा, शायद है! थोड़ा रुकिए और स्वयं से पूछिए, कितना सुकून है जिंदगी में! अगर नहीं तो वह कहां गया और कैसे आएगा.

शुभकामना सहित...

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