लाइव टीवी

#जीवन संवाद : आत्‍मीयता के आंगन में अपेक्षा!

दयाशंकर मिश्र | News18Hindi
Updated: February 14, 2020, 9:23 AM IST
#जीवन संवाद : आत्‍मीयता के आंगन में अपेक्षा!
#जीवन संवाद : आत्‍मीयता के आंगन में अपेक्षा!

Jeevan Samvad: आत्‍मीयता की मिठास जीवन के उस मोड़ पर फीकी पड़ने लगती है, जहां अपेक्षा का रंग गहरा होने लगता है. अपनी मिठास को दूसरे के कड़वे व्‍यवहार से दूर रखना कठिन है, मुश्किल नहीं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 14, 2020, 9:23 AM IST
  • Share this:
आत्‍मीयता की मिठास जीवन के उस मोड़ पर फीकी पड़ने लगती है, जहां अपेक्षा का रंग गहरा होने लगता है. अपनी मिठास को दूसरे के कड़वे व्‍यवहार से दूर रखना कठिन है, नामुमकिन नहीं. इसलिए आत्‍मीयता और अपेक्षा को एक-दूसरे से अलग रखने का हुनर सीखना होगा. अपने आसपास हम हर दिन ऐसे उदाहरण देखते हैं, जहां गहरी दोस्‍ती, रिश्‍ते एक अपेक्षा का दवाब नहीं संभाल पाते.

रिश्‍तों पर अपेक्षा की छाया पड़ते ही रि‍श्‍ते अक्‍सर कुम्‍हलाने लगते हैं. हम कह सकते हैं कि अपेक्षा सहज, स्‍वाभाविक है. इससे बचना संभव नहीं. जहां संबंधों में गहराई होती है, अपेक्षा का बंधन बंधने लगता है. ऐसे में एक छोटी-सी बात हमको संभाल सकती है. इसमें जरूर कुछ ऐसा है, जो हमें अभी नहीं दिख रहा.
रास्‍ता वहीं तक नहीं होता, जहां तक हमें दिख रहा होता है. वह तो बहुत आगे तक होता है.
कई बार जिंदगी हमें उस दिशा में ले जाना चाहती है, जहां हम अपनी मर्जी से कभी न जाना चाहें. ऐसे मोड़ की ओर हम अक्‍सर तभी मुड़ते हैं, जब हम उपेक्षा महसूस करते हैं. हमें लगता है कि हमारी जिनके साथ आत्‍मीयता है, वह हमारे प्रति गंभीर नहीं. उन्‍हें हमारे हितों से सरोकार नहीं.


ऐसे में दो बातें समझना बहुत जरूरी है. जिनसे हमें आत्‍मीयता है, वह हमारे हितों के साथ हमेशा खड़े हों यह जरूरी नहीं . क्‍योंकि हमारे दृष्टिकोण में अंतर हो सकता है. इसलिए यह भी संभव है कि जिससे आपकी आत्‍मीयता है, वह आपका हित कुछ अलग तरीके से देख रहे हों. वैसे नहीं जैसे आप देख पा रहे हैं.

लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि हमारे उनसे रिश्‍ते में कड़वाहट हो जाए जो हमारी अपेक्षा को पूरा नहीं कर सकते. व्‍यावहारिक रूप से ऐसा कई बार हो सकता है कि हम बहुत से लोगों की योजना का हिस्‍सा नहीं बन पाते. लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि हम उनके लिए आत्‍मीय नहीं.
आत्‍मीयता और अपेक्षा हम जितना अलग रख पाएंगे, संबंध उतने ही खूबसूरत हो पाएंगे. आज कोई आपकी मदद नहीं कर पा रहा इसका अर्थ यह नहीं कि वह आगे भी ऐसा नहीं कर पाएगा. हर किसी के अपने संकट होते हैं. हम अपनी मजबूरी तो खूब समझते हैं, उसका प्रचार भी करते हैं. अगर थोड़ी सी नरमी सामने वाले के लिहाज से मन में रखी जाए तो अपेक्षा के खरपतवार को आत्‍मीयता के आंगन में उगने से रोका जा सकता है.

हमें जयपुर से राहुल तिवाड़ी ने खूबसूरत अनुभव साझा किया है.

राहुल लिखते हैं कि दो बरस पहले उनकी नौकरी पर संकट आया. उस समय उन्‍होंने अपने एक मित्र जो उस समय किसी कंपनी में बड़े पद पर थे ,उनसे नौकरी के लिए कहा. बार-बार कहा. लेकिन उनको वहां नौकरी नहीं मिली. जबकि वह राहुल को लंबे समय से जानते थे. इसके कारण राहुल के मन में उनके लिए आदर जाता रहा. उन्‍होंने उनसे बात करनी भी बंद कर दी. इस बीच उनको दूसरी जगह नौकरी मिल गई.
लेकिन इसी बीच राहुल के बेटे की तबीयत खराब हो गई. वह बहुत परेशान हो गए. तभी एक दिन राहुल के पास उनके उसी मित्र का फोन आया जिनसे राहुल नाराज थे. उन्‍होंने राहुल के बेटे के लिए ऐसे डॉक्‍टर का नाम सुझाया, उनके पास पहुंचने का तरीका बताया. जिन तक पहुंचना आसान नहीं था. अंतत: राहुल के बेटे का इलाज हो गया. अब वह एकदम स्‍वस्‍थ है.

राहुल का अनुभव बताता है कि अपेक्षा के खरपतरवार स्‍नेह को कितना प्रभावित कर देते हैं. जीवन की सुगंध को बाधित कर देते हैं. इसलिए स्‍वयं को सक्षम बनाइए. अपने बल पर टिकने का साहस, सामर्थ्‍य रखें. दूसरों के साथ संबंध उतने ही सहज रहेंगे, जितनी कम से कम आप उनसे अपेक्षा रखेंगे.

पता: दयाशंकर मिश्र (जीवन संवाद)
Network18 एक्सप्रेस ट्रेड टावर, 3rd फ्लोर, A विंग
सेक्टर 16 A, फिल्म सिटी, नोएडा (यूपी)
ईमेल : dayashankarmishra2015@gmail.com अपने सवाल और सुझाव इनबॉक्‍स में साझा करें:
(https://twitter.com/dayashankarmi )(https://www.facebook.com/dayashankar.mishra.54)

ये भी पढ़ें-
#जीवनसंवाद: मन का कचरा!

#जीवनसंवाद: बच्‍चों के लिए आसान होना!

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए जीवन संवाद से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: February 11, 2020, 3:50 PM IST
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर