#जीवनसंवाद: कितनी नफ़रत!

#जीवनसंवाद: कितनी नफ़रत!
जीवन संवाद

Jeevan Samvad: जीवन आगे बढ़ने का नाम है, स्मृति से चिपके रहने का नहीं. अगर, वह सुखद है तो उससे प्रेरणा लेकर आगे बढ़िए. दुखद है तो उसे अपने दिमाग से बाहर निकालिए. अगर ऐसा नहीं कर पा रहे हैं, तो उन लोगों की मदद लीजिए जो इसे सहज बना सकें.

  • Share this:
मैं उसका नाम भी नहीं सुनना चाहता. आपको इसका अंदाजा भी नहीं है कि उसने मेरे साथ कितना छल किया है. उसको क्षमा करना, संभव नहीं. इस तरह की बातें हम आए दिन बहुत से लोगों से दूसरों के बारे में सुनते रहते हैं. कभी थोड़ा ठहरकर यह सोचने की भी जरूरत है कि किसी से नफरत करना उससे अधिक नफरत करने वाले के लिए घातक हो सकता है. ऐसा इसलिए क्योंकि जीवन की ऊर्जा उसी तरफ दौड़ती है, जिस तरफ हमारा ध्यान सबसे अधिक होता है! सबसे अधिक ध्यान उस तरफ ही होता है जिस तरफ हम घृणा की दृष्टि रखते हैं.

हमारा ध्यान प्रेम पर कम नफरत पर अधिक होता है. हमें प्रेम करने वालों की जानकारी इतनी गहराई से नहीं होती, जितनी अधिक ऐसे लोगों की सूचना जिन्हें हम पसंद नहीं करते.

जिनको हम पसंद नहीं करते, उनको अनजाने में ही अपने मन का एक कोना किराए पर दे देते हैं. ऐसा व्यक्ति जिसका स्मरण तक हमें परेशान करने को बहुत है, अगर मन के कोने में बैठ जाए तो कभी निकलने को राजी न होगा. इसलिए, मन में किसी को भी बिठाने से पहले अच्छी तरह से समझ लें कि हम क्या चाहते हैं! प्रेम के साथ बहना/ दुखद स्मृति के साथ दलदल में धंसने की तैयारी!



#जीवनसंवाद: अकेलापन और ख़ुद का ख्याल!
अपने जीवन में एक छोटा सा प्रयोग कीजिए. ऐसे लोगों की सूची बनाइए जिन्हें आप बहुत प्रेम करते हैं.देखिए कितने अंतराल पर आप उनसे मिलते जुलते हैं. उनसे संवाद बनाए रखने की निरंतरता कैसी है.दूसरी ओर ऐसे लोगों के प्रति भी सजग रहिए जो आपको बिल्कुल नहीं सुहाते. जिनका साथ आपको आनंद नहीं देता. संभव है कुछ कटु यादों का पिटारा साथ चल रहा हो.


कई बार मनुष्य अनजाने में ऐसी घटनाओं का गवाह बन जाता है, जिसमें वह एकदम मशीन की तरह मजबूर और यंत्रवत हो जाता है. इससे समस्या की मशीन में हाथ फंसने पर जो चोट लगती है उसके लिए हम किसको कसूरवार मानते हैं! कुछ हद तक स्वयं को. उसके बाद भाग्य/संयोग/ नियति का नंबर आता है. लेकिन इस प्रक्रिया में हम जानते हैं कि मशीन की हिस्सेदारी बिल्कुल नहीं है. इसलिए मशीन के प्रति बैर कम होता है. एकदम कम!


इस समय के वातावरण में मनुष्य की भूमिका एकदम मशीन जैसी है. अपनी दुखद स्मृतियों के लिए हम मशीन को तो क्षमा कर सकते हैं, लेकिन उसकी भूमिका में आए मनुष्य को नहीं. यही कारण है कि हम अपनी प्रोफेशनल जिंदगी में कुछ निर्णय के लिए हमेशा ऐसे लोगों का पीछा करते रहते हैं, उनसे उलझे रहते हैं जिनसे किसी तरह हम खुद भी पीछा छुड़ाना चाहते थे. जीवन कोई बंद गली नहीं है. उसमें एक खुला आकाश है. उड़ान है. प्रफुल्लता और आनंद है. अब यह हम पर है कि हम उसे कैसे देखते हैं.

मैं आपसे अपना ही एक छोटा सा संस्मरण साझा करना चाहता हूं. लगभग एक दशक पहले एक कंपनी में काम करते हुए प्रबंधन के साथ मेरी असहमतियां बढ़ती गईं. जीवन में सबकुछ सही और गलत नहीं होता. कई बार बारिश एकाएक तेज हो जाती है और छोटी छोटी नदियों में सैलाब उतर आता है. क्या नदियां सैलाब चाहती थीं! क्या नदी किनारे पेड़-पौधे सैलाब से प्रेम करते हैं! नहीं, उस बारिश पर किसी का नियंत्रण नहीं है. स्वयं बादल का भी नहीं. ठीक, इसी तरह हमारा जीवन है. मैं अपने रास्ते चला गया, कंपनी अपने रास्ते पर आगे बढ़ गई. जाहिर है इससे मुझे ही असुविधा उठानी पड़ी होगी.

कुछ समय तक मुझे भी व्यक्ति और व्यक्तियों के प्रति कटुता का बोध रहा. मेरे मन में उनके प्रति नकारात्मकता रही. लेकिन जैसे ही मुझे यह एहसास हुआ कि इसमें किसी का कोई दोष नहीं, जैसे बाढ़ के लिए नदी दोषी नहीं. वैसे ही जीवन में सफर के उतार-चढ़ाव के लिए किसी एक व्यक्ति के इर्द-गिर्द अपने मन को चिपकाए रखना, मन की सेहत के लिए खतरनाक है. मैंने स्वयं को इससे हमेशा के लिए दूर कर लिया.

उसके बाद मेरा उन व्यक्ति और व्यक्तियों से मिलना जुलना एकदम सहज होता गया. मुझे नहीं पता उनके मन में मेरे लिए क्या है! यह मेरे नियंत्रण में नहीं. मेरे नियंत्रण में जो था, मैंने उसे ठीक कर लिया. उसके बाद से कहीं कोई दुविधा नहीं!

#जीवनसंवाद: अभिमान और घर!

जीवन आगे बढ़ने का नाम है, स्मृति से चिपके रहने का नहीं. अगर, वह सुखद है तो उससे प्रेरणा लेकर आगे बढ़िए. दुखद है तो उसे अपने दिमाग से बाहर निकालिए. अगर ऐसा नहीं कर पा रहे हैं, तो उन लोगों की मदद लीजिए जो इसे सहज बना सकें.


हमारा मन हमारे शब्दों और विचारों से ही खाद-पानी ग्रहण करता है. इसलिए हमेशा ध्यान रहे कि हम उसे किस तरह की चीजों से सींच रहे हैं. शुभकामना सहित...

संपर्क: ई-मेल: dayashankarmishra2015@gmail.com. आप अपने मन की बात फेसबुक और ट्विटर पर भी साझा कर सकते हैं. ई-मेल पर साझा किए गए प्रश्नों पर संवाद किया जाता है.

(https://twitter.com/dayashankarmi )(https://www.facebook.com/dayashankar.mishra.54)
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज

corona virus btn
corona virus btn
Loading