#जीवन संवाद: दुख संभालने की कला!

Jeevan Samvad: हमें जीवन को बहुआयामी, लोचदार, सरल, शांतिपूर्ण बनाने की जरूरत है. यह सभी चीजें हमारे साथ ही देश, समाज की स्थिति से भी जुड़ी हुई हैं, इसलिए दूसरों को अपने जीवन की बागडोर कभी नहीं सौंपनी चाहिए.

News18Hindi
Updated: September 2, 2019, 2:53 PM IST
#जीवन संवाद: दुख संभालने की कला!
जीवन संवाद
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Updated: September 2, 2019, 2:53 PM IST
मुझे उन्होंने कुछ संदेश भेजे, जो बेहद गुस्से से भरे हुए थे. कुछ संदेशों के बाद उन्होंने बताया कि वह जीवन से बहुत अधिक परेशान हैं. इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वह कभी भी आत्महत्या का फैसला कर सकती हैं. मेरा परिचय उनसे बहुत अधिक औपचारिक, सीमित था. ऐसे में कुछ भी कह पाना थोड़ा मुश्किल होता है.

मैंने उन्हें जो लिख कर भेजा वह इस प्रकार था-
1.जिसे आप जीवित रहकर नहीं बदल सकते, उसे जीवन देकर नहीं बदला जा सकता. आपके जीवित रहने से जिन्हें फर्क नहीं पड़ता, उन्हें मरने से भी अंतर नहीं पड़ेगा. इसलिए इन बातों पर 'मरना' स्थगित कीजिए.

2.किसी को भी खुद को दुखी करने की अनुमति नहीं देना. ऐसे लोग बड़ी संख्या में आपकी तरफ ऐसी चीजें उछालते रहते हैं, जिनसे आपके मन पर नकारात्मक असर पड़ता है. मन को इनकी छाया से बचाने के लिए अपने मन की दीवारों पर यह बोर्ड टांग दीजिए कि मुझे मेरी अनुमति के बिना कोई दुखी नहीं कर सकता. किसी को भी सुखी करने के मुकाबले दुख देना बहुत सरल है.



#जीवन संवाद : जब 'कड़वा' ज्यादा हो जाए!

शनिवार को उनका फोन आया. उन्होंने बताया, 'मैं इस समय बहुराष्ट्रीय कंपनी में काम कर रही हूं. जीवन के कठिन समय में 'डियर ज़िंदगी : जीवन संवाद' से बहुत मदद मिली. मैंने खुद को संभाल लिया है. अब अपना जीवन अपने बच्चे और स्वयं को समर्पित करने का फैसला किया है. अपने को दुखी करने की अनुमति दूसरों को नहीं देने का विचार काफी मददगार साबित हुआ है.'
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‌इस पठनीयता, विनम्रता का आभार. हमें जीवन के उस मोड़ पर सबसे अधिक सजग रहने की जरूरत है, जहां अचानक कोई जिंदगी में आकर इतनी उथल-पुथल मचा देता है कि उसके बिना हमारा अस्तित्व ही बेइमानी मालूम होता है.
कोई कितना भी मूल्यवान क्यों ना हो, लेकिन आप से अधिक कीमती नहीं है. उसे यह कभी भी अनुमति नहीं दी जानी चाहिए कि वह आपके सारे जीवन पर ग्रहण लगा कर चला जाए. इसे ही दूसरों को अपने जीवन में दुख फैलाने की अनुमति के नियम के रूप में हमें लागू करना है.


#जीवन संवाद: रिश्ते में श्रेष्ठता का पेंच!

मैं एक छोटी सी बात, अपने ही जीवन से साझा करता हूं. मेरे एक मित्र ने सोशल मीडिया पर कुछ ऐसा लिखा जिसकी अपेक्षा नहीं थी. पहले मुझे भी अच्छा नहीं लगा. लेकिन जब इस 'दुखी नहीं करने की अनुमति' वाले नियम से इसे समझा तो सब कुछ साफ हो गया. किसी दूसरे की मूर्खता, असहिष्णुता, नकारात्मकता को अपने जीवन से दूर रखना सरल नहीं है. मुश्किल है, लेकिन थोड़े अभ्यास, अनुशासन और आत्म चिंतन से दुख को संभालने की कला सीखी जा सकती है.

कुछ समय पहले मैं जीवन के प्रति गहरी श्रद्धा और अनुराग रखने वाले समूह से मिला. जिसने विपश्यना कार्यक्रम में हिस्सा लिया था. मुझे कहते हुए बहुत संतुष्टि हो रही है कि उन्होंने जीवन की ऊर्जा से जुड़ी जिन चीजों पर सबसे अधिक बल दिया, इस कॉलम में हम निरंतर ऐसा ही संवाद कर रहे हैं.

#जीवनसंवाद: सुख की खोज और EMI!

हमें जीवन को बहुआयामी, लोचदार, सरल, शांतिपूर्ण बनाने की जरूरत है. यह सभी चीजें हमारे साथ ही देश, समाज की स्थिति से भी जुड़ी हुई हैं, इसलिए दूसरों को अपने जीवन की बागडोर कभी नहीं सौंपनी चाहिए.
हम में से हर एक का जीवन संभावना, आशा और स्नेह से परिपूर्ण है. यह अनुराग बनाए रखते हुए दुख की कला को अगर सीख लिया जाए तो जीवन से 'डिप्रेशन और आत्महत्या' का संकट न्यूनतम किया जा सकता है!

पता : दयाशंकर मिश्र (जीवन संवाद)
Network18
एक्सप्रेस ट्रेड टावर, 3rd फ्लोर, A विंग
सेक्टर 16 A, फिल्म सिटी, नोएडा (यूपी)
ईमेल : dayashankarmishra2015@gmail.com
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First published: September 2, 2019, 8:03 AM IST
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