#जीवनसंवाद: अपना उजाला!

#जीवनसंवाद: अपना उजाला!
#जीवन संवाद

Jeevan Samvad: दूसरों की फेंकी हुई दुखी चादर मत ओढ़िए. हमें दुखी करने वाले लोग बड़ी संख्या में हैं. उनसे अपने मन की रक्षा कुछ वैसे ही करनी होती है, जैसे आंधियों के बीच दीए को संभालना होता है. उस वक्त संभल गया दीया ही हमें गहरे अंधेरे से बचाता है.

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हमारे भीतर की प्रसन्नता ही बाहर प्रकट होती है. जीवन में गहरी सहज, प्रफुल्लता वरदान की तरह है. किसी के पास नैसर्गिक रूप से है, कोई धीरे-धीरे हासिल करता है. लेकिन बहुत कम लोग ऐसे हैं जो पूरी तरह से उपलब्ध हो पाते हैं. जो उपलब्ध हो पाए उनका जीवन एक ऐसे ऊंचे तल पर पहुंच जाता है जहां से बहुत सी चीज़ें आसान हो जाती हैं.

सारा प्रकाश हमारे भीतर है, अगर हम उसे ठीक से महसूस कर पाएं. आनंद बाहर से आने वाली चीज़ नहीं. वह तो हमारे गहरे अवचेतन मन में ही जन्म लेती है. पौधों की पत्तियों को पानी देने से कुछ नहीं होता, क्योंकि असली शक्ति तो जड़ को चाहिए. जीवन उनको अधिक सरलता से प्राप्त होता है जो इसे संपूर्णता में ग्रहण करते हैं.

हमारे बीच अधिकांश लोग चंद्रमा की तरह होते हैं. पूरी जिंदगी दूसरे के प्रकाश से चमकते हैं. शक्ति का केंद्र कहीं और होता है. जो जानते हैं, उनका जीवन दमकता है, जो नहीं जानते वह ग्रहण के खतरे में रहते हैं. इसलिए, अपने प्रकाश से परिचय जरूरी है! रास्ता बहुत साफ है, हमारे पास अपना प्रकाश होना चाहिए, अगर ऐसा नहीं है तो हमें अच्छी तरह पता होना चाहिए हमने किससे उधार का उजाला लिया है! कुल मिलाकर जनों के प्रति सजगता जीवन में अनेक संकटों का सामना करने में सहायक होती है.

आशा, आनंद और आंतरिक खुशी जीवन के लिए पर्याप्त हैं. हम इनको किस तरह समझते हैं, यह हम पर निर्भर करता है. जो आंतरिक प्रसन्नता, आनंद और‌ बोध को उपलब्ध हो जाते हैं, उन पर बाहरी चीज़ों का असर कम होता है.



बरगद को बारिश की इतनी जरूरत नहीं होती, जितनी अमरूद के पेड़ को है. बरगद धीरे-धीरे अपना पानी बनाता रहता है.


वह भीतर से समृद्ध हो जाता है. उसकी जड़ें कई बरस के सूखे को सह सकती हैं. दूसरी ओर अमरूद के साथ ऐसाा नहीं है. ठीक यही अंतर हमको एक दूसरे से अलग करता है. एक ही तरह का अनुभव होने पर हममें से हर कोई अलग-अलग तरह से अपनी प्रतिक्रिया देता है. जो भीतर से गहरे हैं वह ठोस प्रतिक्रिया देंगे. अगर सजग हुए तो प्रतिक्रिया नहीं भी देंगे. दूसरी ओर जल्दबाजी में रहने वाले हमेशा प्रतिक्रिया को ही अपना धर्म समझते हैं.

इसलिए वह हर छोटी-मोटी बात पर 'लाल पीले' होते रहते हैं. खुद भी परेशान होते हैं और उनको भी परेशान करते हैं, जिनसे वह उजाला ले रहे हैं. हर तरह की परिस्थिति जीवन में आने पर उस से मुकबला करने के दृष्टिकोण में अंतर ही मनुष्य को एक दूसरे से भिन्न बनाता है.


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इसलिए कोरोना के इस मुश्किल वक़्त में खुद को भीतर से मजबूत बनाइए. अपने फैसले पूरी सावधानी और सजगता से कीजिए. दूसरों की फेंकी हुई दुखी चादर मत ओढ़िए. हमें दुखी करने वाले लोग बड़ी संख्या में हैं. उनसे अपने मन की रक्षा कुछ वैसे ही करनी होती है, जैसे आंधियों के बीच दीए को संभालना होता है. उस वक्त संभल गया दीया ही हमें गहरे अंधेरे से बचाता है.

अंतर्मन का उजाला भी ऐसे ही हमारी रक्षा करता है, आज जैसे मुश्किल वक्त में. इसलिए अपने अवचेतन मन के प्रति सजग बनिए. जीवन में आस्था रखिए. जिंदगी कभी आपको निराश नहीं करेगी.

संपर्क: ई-मेल: dayashankarmishra2015@gmail.com. आप अपने मन की बात फेसबुक और ट्विटर पर भी साझा कर सकते हैं. ई-मेल पर साझा किए गए प्रश्नों पर संवाद किया जाता है. https://twitter.com/dayashankarmi https://www.facebook.com/dayashankar.mishra.54
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