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#जीवन संवाद: जिंदगी रिश्तों की उम्र होती है!

#जीवन संवाद: जिंदगी रिश्तों की उम्र होती है!

किसी रिश्ते को इतना मूल्यवान नहीं बनाना कि बाकी रिश्तों की रंगत, जिंदगी उसके आगे फीकी पड़ जाए! जीवन हर रिश्ते से कीमती और संग्रहणीय है!

किसी रिश्ते को इतना मूल्यवान नहीं बनाना कि बाकी रिश्तों की रंगत, जिंदगी उसके आगे फीकी पड़ जाए! जीवन हर रिश्ते से कीमती और संग्रहणीय है!

किसी रिश्ते को इतना मूल्यवान नहीं बनाना कि बाकी रिश्तों की रंगत, जिंदगी उसके आगे फीकी पड़ जाए! जीवन हर रिश्ते से कीमती और संग्रहणीय है!

    हर रिश्ते की एक उम्र होती है! उसके बाद उसे छोड़कर आगे बढ़ जाना ही नियति है. पहली नजर में यह बात कुछ अजीब लग सकती हैलेकिन बीस बरस में तेजी से हुए सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन ने सोचनेसमझने और रिश्ते निभाने की क्षमता को बदल दिया है. हम परंपरा के रूप में सघन पारिवारिक समाज का हिस्सा रहे हैं.

    ग्रामीण कृषि आधारित समाज में रिश्तों का महत्व बहुत था. इसका कारण परस्पर निर्भरता और खेती किसानी के कारण नियमित अंतराल पर मिलने वाला अवकाश था. खेती में हर फसल के बीच कुछ समय होता है. जैसे रबी और खरीफ के बीच का समयजब सामाजिक रूप से मिलने-जुलने के लिए लोग तत्परतैयार होते हैं. जैसे-जैसे हम खेती से शहर की ओर जा रहे हैं यह समय न्यूनतम से 'न्यूनहोता जाता है.

    शहरी जीवन की अपनी चुनौतियां हैं. एक-दूसरे के साथ रहकर एक-दूसरे के लिए समय की शिकायत बढ़ती जा रही है. संतोष की गली से निकलकर महत्वाकांक्षा का भंवरा जिंदगी की भागदौड़ में गुंजन का अपना मूल गुण ही भुला बैठा!

    'डियर जिंदगीमें हम पहले भी समय की कमी पर विस्तार से बात कर चुके हैं. यह समय कहां गयाजबकि हमें न तो रेलवे टिकट लेने हैंन ही बैंक की लाइन में खड़ा होना हैन ही एक जगह से दूसरी जगह जाने के लिए अब पहले जितना समय लगता है! तो यह समय की चोरी कौन करता है! समय की चोरी और रिश्तो में दरार का घनिष्ठ संबंध है. परिवार के अर्थ हमारे लिए बेहद संकुचित होते जा रहे हैं. वो जमाना कुछ और थाजिसमें परिवार का अर्थ संयुक्त था. उसमें मित्रों और रिश्तेदारों के लिए पर्याप्त 'जगहथी. लेकिन अब यह 'जगहधीरे-धीरे सिमटती जा रही है. इससे रिश्तों की उम्र घटना तय है. अकेलापन बढ़ेगा ही. यह कुछ ऐसा है कि भारी बारिश में बांध को बचाने के लिए उसके द्वार खोलने ही पड़ेंगे. इस खतरे के बाद भी कि पानी बाहर निकलकर तबाही मचाएगाक्योंकि नदीनालों में गाद जमा है. पानी के निकलने का कहीं रास्ता ही नहीं है. तो वह घर में ही घुसेगा!

    हसरतजरूरत बढ़ने के साथ शहर जरूरी हो गए. जब तक तकनीक और महत्वाकांक्षा की बंद गली ने हमें नहीं घेरातब तक हमारा जीवन बहुत सुखद था. उसमें आशासह-अस्तित्व की भावना का भाव प्रबल था. हमें रिश्तों की गुत्थी को लेकर बहुत सारे सवाल मिल रहे हैं. इसी को लेकर एक छोटी-सीलेकिन सच्ची कहानी. यह एक पाठक के ईमेल पर आधारित है. इस कहानी में सवाल भी हैं और जवाब भी!


    कहानी हरियाणा से निकलकर महानगर में बसे दोस्तों की है. इनमें से दो मित्रों के बीच भाईघर-परिवार से अधिक मित्रता थी. एक-दूसरे के पूरकसुख-दुख में सहायक जैसे शब्द इनके लिए पूरे नहीं पड़ते थे. एक शादीशुदा थे,दूसरे अपने परिवार के साथ थे. अविवाहित थे. समय का बंधन नहींपारस्परिक निर्भरता से अधिक एक-दूसरे के साथ में बंधे हुए थे. इतने अधिक कि उसमें शादीशुदा मित्र के लिए पत्नीबच्चों से अधिक वरीयता मित्र को हासिल थी. आगे चलकर वह मित्र भी पारिवारिक बंधन में बंधे. उसके बाद वह मित्र से ऐसे कटे कि उसको हमेशा के लिए स्वयं से दूर कर दिया. मित्र ही नहींउनके परिवार के अन्य सदस्यों ने भी उनसे ऐसी कन्नी काटी कि हमेशा के लिए उन्हें भुला दिया! इसकी वजह रही कि परिवार के सदस्यों को मित्र के विवाह के बाद अचानक लगा कि नवदंपति का बहुत सारा समय दूसरे मित्र और उनका परिवार ले लेते हैं. इसलिए कुछ इस तरह की बातेंचीजें पैदा की गईंजिससे यह परिवार हमेशा के लिए उनसे दूर हो जाए. कुछ समय लगा दूसरे मित्र को यह समझने में. इस बीच वह पति-पत्नी न जाने किस-किस पीड़ा से गुजरते रहे!

    कई बरस बादजब वह मित्र से मिलेतो उनके 'दार्शनिकमित्र ने समझाया, 'हर रिश्ते की उम्र होती है. कई बार हम चाहते हुए भी उसे आगे नहीं ले जा सकते. परिवार की खुशीउनके प्रति उत्तरदायित्व किसी भी दूसरे अन्य रिश्ते से बड़ा है. यह जो कुछ हुआ परिवार के लिए हुआ!'

    अगर आपको भी इन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा है तो आप इससे संतोष कर सकते हैं कि इस तरह की चीज केवल आपके साथ ही नहीं घट रही. यह समय के नए आयामघुमावदार मोड़ हैं. जिंदगी इन मोड़ों से अधिक बड़ी है. सुंदर है और सृजनात्मक भी! किसी रिश्ते को इतना मूल्यवान नहीं बनाना कि बाकी रिश्तों की रंगतजिंदगी उसके आगे फीकी पड़ जाए! जीवन हर रिश्ते से कीमती और संग्रहणीय है! हमेशा की तरह आपकी प्रतिक्रिया का इंतजार रहेगा.

    पता : दयाशंकर मिश्र (जीवन संवाद)
    Network18
    एक्सप्रेस ट्रेड टावर, 3rd फ्लोर, A विंग
    सेक्टर 16 A, फिल्म सिटी, नोएडा (यूपी)
    ईमेल : dayashankarmishra2015@gmail.com
    अपने सवाल और सुझाव इनबॉक्‍स में साझा करें:
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    Tags: Dayashankar mishra, Dear Zindagi, Effect on your life, JEEVAN SAMVAD, Life Talk, Lifestyle, Motivational Story

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