#जीवन संवाद: हमें सताने वाले!

#जीवन संवाद.
#जीवन संवाद.

#Jeevan Samvad: अपने मन को हम दूसरों के हिसाब से चलने की अनुमति नहीं दे सकते. किसी खास अनुभव से अपने को अलग नहीं कर पाना, मन का कहीं फंसने सरीखा है. कांटों में फंसने पर जैसे शरीर कष्‍ट पाता है, वैसे ही अतीत में उलझे मन भी जीवन ऊर्जा को उपलब्‍ध नहीं हो पाते! इसलिए मन की सफाई करते रहना जरूरी है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 14, 2020, 11:47 PM IST
  • Share this:
बहुत से लोग यह मानने को राजी नहीं होंगे कि उनको सताने वाले असल में उतने नहीं, जितने उनके ख्‍याल में रहते हैं. अपने ख्‍याल में तो एक अकेले हम ही भले हैं, बाकी दुनिया तो बस हमें सताने में लगी है. एक हमीं हैं, जो निर्दोष हैं. सबके भले के लिए चिंतित रहते हैं, दूसरों को तो हमारी परवाह नहीं. थोड़ी सजगता से अपने आसपास के लोगों के वाट्सऐप, फेसबुक स्‍टेटस देखेंगे, तो वह इसी तरह की शिकायत से भरे मिलेंगे. लॉकडाउन के बाद तो यह काफी ज्‍यादा हो गया है, क्‍योंकि भीतर के अकेलेपन को बाहर की चिंता का साथ मिल गया.


जब भी हम अकेले होते हैं, जरूरी नहीं चिंता में हों, लेकिन कोरोना के कारण घर में बंद होने की मजबूरी ने हमारे मन को कमजोर किया है. एक नए तरह का अकेलापन बढ़ रहा है. सबके बीच का अकेलापन. साथ रहते हुए दूसरों द्वारा नहीं समझे जाने का दुख. दूसरों के प्रति कोमलता में भारी कमी आई है.

मन के इस छल को समझने की जरूरत है. अपने मन को हम दूसरों के हिसाब से चलने की अनुमति नहीं दे सकते. किसी खास अनुभव से अपने को अलग नहीं कर पाना, मन का कहीं फंसने सरीखा है. कांटों में फंसने पर जैसे शरीर कष्‍ट पाता है, वैसे ही अतीत में उलझे मन भी जीवन ऊर्जा को उपलब्‍ध नहीं हो पाते! इसलिए मन की सफाई करते रहना जरूरी है.

अपने जीवन में मेरा सामना दो तरह के लोगों से हुआ. एक जो दूसरों से प्रेम से पेश आते, भीतर से आनंद से भरे रहते और किसी को डराने के प्रति उत्‍सुक नहीं होते थे. दूसरे इसके एकदम उलट थे. उनका संपूर्ण ज्ञान, पूरी शक्ति इसी बात में लगी रहती कि किस तरह से दूसरों को प्रताड़ित किया जाए. वे हर बात में खोट न‍िकालने को तैयार द‍िखते. यह जरूर हुआ कि कुछ समय के लिए दूसरी तरह के लोग कुछ आगे बढ़ते हुए दिखे. ऐसा लगा वह जीवन में बहुत आगे निकल जाएंगे, लेकिन कुछ ही समय में उनके भीतर की ऊष्‍मा, ऊर्जा और आनंद सूखता हुआ नजर आया.



अमृतलाल नागर के प्रेरणा से भरे अद्भुत उपन्‍यास ‘नाच्‍यो बहुत गोपाल’ और महात्‍मा गांधी की आत्‍मकथा 'सत्‍य के प्रयोग' ने हमेशा दूसरी तरह के लोगों से दूरी बनाए रखने में मदद की. उनसे दूर रहने का साहस दिया. ऐसे लोगों से बचना आसान नहीं होता. यह बाहर से आपको इतने आकर्षक, लुभावने लगेंगे कि मन उनकी ओर सहज चल देगा. यहीं मन को संभालना है. उसे दूसरों के ग्‍लैमर से बचाना है. अपने स्‍वभाव के अनुकूल रखना है!


जिस ओर सब जा रहे हों, उसी ओर दौड़ना नई बात नहीं. नया है, उस ओर देखना जिस तरफ अभी लोग देख ही नहीं पा रहे हैं. उन दिशाओं की ओर बढ़ना जहां से कोई उजाला नहीं आ रहा. भरोसा, आत्‍मविशवास उस सुबह को देखने में नहीं जो होने को है, उस गहरी, अंधेरी रात में मन को संभाले रहने में है, जब सब ओर से केवल अविश्‍वास का सन्‍नाटा है! हमें केवल दूसरे नहीं सताते. हमें हमारी रची, बुनी मन की दुनिया भी उतना ही सताती है. केवल आज पर ध्‍यान रहे. इससे सुकून बना रहता है. प्रेम गहरा होता है. जितनी आशा रखेंगे, उतनी ही निराशा हाथ आएगी. इसलिए, संबंधों में आशा नहीं प्रेम रखिए. केवल प्रेम!

आप अपने मन की बात फेसबुक और ट्विटर पर भी साझा कर सकते हैं. ई-मेल पर साझा किए गए प्रश्नों पर संवाद किया जाता है.

ईमेल: dayashankarmishra2015@gmail.com
https://www.facebook.com/dayashankar.mishra.54
https://twitter.com/dayashankarmi
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज