#जीवनसंवाद : अकेलापन और ख़ुद का ख्याल!

#जीवनसंवाद : अकेलापन और ख़ुद का ख्याल!
जीवन संवाद

Jeevan Samvad: जो एकांत का अर्थ नहीं जान रहे, सही अर्थ में एकांत को खोज नहीं पाते, वह अकेलेपन की ओर चले जाते हैं. ऐसे ही मन को अकेलापन काटने को दौड़ता है. एकांत और अकेलेपन का कोई सीधा रिश्ता नहीं है. यह हमारा बनाया हुआ असंगत गठबंधन है.

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हम अक्सर एकांत और अकेलेपन का अंतर नहीं समझ पाते हैं. एकांत का अर्थ है, खुद को दुनिया से निश्चित समय के लिए अलग कर लेना. कुछ देर के लिए अपने पास चले जाना. ऐतिहासिक संदर्भों को याद कीजिए. जब भी कोई सोच-विचार की बात आती थी, राजा-महाराजा, विद्वान, ऋषि-मुनि एकांत में चले जाते थे. गहन चिंतन के लिए! किसी चीज़ पर पूर्णता से विचार के लिए. वह अपने आप को कुछ समय के लिए एकांत में ले जाते थे.

वह दुनिया से अलग करके अपने मन को ऐसे अकेले कोने में ले जाते थे जहां से चीज़ों के बारे में कोई फ़ैसला आसान हो जाता था. वह ख़ुद को दुनिया से अलग नहीं करते थे, दुनिया के मामलों में अपनी राय दुरुस्त करने के लिए दुनिया से थोड़ा समय मांग लेते थे. इसलिए वह सब सूचित नहीं करते थे कि एकांत में जा रहे हैं बल्कि कहते थे कि हमें थोड़ा एकांत दीजिए.

ख़ुद को हम दुनिया से अलग ले जाकर ही अच्छी तरह समझ सकते हैं. इसलिए एकांत में हमारे रस निखर कर आते हैं. हमारा विवेक प्रकाशवान हो उठता है.




गीतकार, लेखक, वैज्ञानिक सब अपने जीवन की श्रेष्ठतम उपलब्धि को उसी क्षण प्राप्त हुए हैं जब वे अकेलेपन को उपलब्ध हुए. न्यूटन के सिर पर जब सेब गिरा तो उस वक्त वह नितांत अकेले थे. इसके मायने यह भी हुए कि उन दिनों जब वह अपने सबसे महत्वपूर्ण सिद्धांत पर काम कर रहे थे तो कितने एकांत और केंद्रित थे. एकांत में एक रस है जो अपने साथ होने का है. जो एकांत का अर्थ नहीं जान रहे, सही अर्थ में एकांत को खोज नहीं पाते, वह अकेलेपन की ओर चले जाते हैं. ऐसे ही मन को अकेलापन काटने को दौड़ता है.


एकांत और अकेलेपन का कोई सीधा रिश्ता नहीं है. यह हमारा बनाया हुआ असंगत गठबंधन है. इसके प्रति सतर्कता जरूरी है. हमें यह समझना होगा कि एकांत गुण है, अकेलापन मन को चिंतित करने वाली दशा. हमें इस बात को समझना है कि हम अकेलेपन की ओर तो नहीं बढ़ रहे अनजाने में कहीं. हमारे आसपास पसरती उदासी, आत्महत्या की बढ़ती खबर इस बात का स्पष्ट संकेत है कि हम तेेज़ी से अकेलेपन की ओर बढ़ रहे हैं.

एकांत की चाहत स्वयं के विकास के लिए जरूरी है. बच्चोंं को पढ़ने के लिए एकांत चाहिए. अपनी धुन में लगे लोगों को अपने लक्ष्योंं को प्राप्त करने केे लिए एकांत चाहिए. एकांत अपनेे काम में रस तलाशने की इच्छा है. अनिवार्यता है. ‌दूसरी ओर अकेलापन मन का उचटना है. मन का कुछ घटनाओंं के कारण उदास हो जाना है. किसी कारण से मन का टूट जाना है. इसलिए अगर कोई व्यक्ति अकेलेपन की ओर बढ़ता हुआ दिखता है तो उसका ख्याल करना है. उसे संभालना है. समझना है कि उसके मन भीतर कोई अकेलापन तो नहीं पसर रहा है.

रोशनी कम होते ही अंधेरा तेजी से बढ़ना शुरू करता है. प्रेम, अनुराग का उजाला सिमटता लगे तो मन में अंधेरा घर करने लगता है. सब तरफ से आशा के दीए बुझते हुए लगते हैं जबकि ऐसा होता नहीं. जीवन में गहरी आस्था उसे हर संकट से बाहर लाने की शक्ति रखती है. संंकट बाहर कम, मन के भीतर अधिक है!


अपना ख्याल कैसे रखा जाए. इस समय सबसे अधिक प्रश्न यही आ रहा है. अपना ख्याल रखने की कला बीते दस से पंद्रह बरस में भूलते ही जा रहे हैं. सोचते हैं कि नौकरी न रही तो क्या होगा. सामाजिक प्रतिष्ठा कैसे बचेगी. संकट के समय घर कैसे चलेगा. लेकिन जो लोग आत्महत्या करने की ओर बढ़ते हैं, वह भूल जाते हैं उनके नहींं रहने के बाद संकट टल नहीं जाएगा. इसलिए सबसे पहली जरूरत है अपना ख्याल रखना और अपने आप को जिंदा रखने लिए पूरी मानसिक शक्ति लगाए रखना. खुद का ख्याल रखने का अर्थ है अगर मन में कुछ संकट बैठ गया है तो उसे दोस्तोंं से संवाद करके ठीक कीजिए. परिवार के साथ सब कुछ साझा कीजिए. किसी भी संकट में शर्मिंदगी ठीक नहीं. किसी गलती पर शर्मिंदा होना दूसरी बात है और संकट का जिम्मेदार मानते हुए सामाजिक प्रतिष्ठा के कारण शर्मिंदगी का सारा भार अपने ऊपर लाद लेना दूसरी बात.

हमें सबसे अधिक इससे ही खतरा है इसलिए इससे खुद का ख्याल रखिए. जैसे शरीर को परेशानी होने पर तुरंत डॉक्टर की ओर भागते हैं वैसे ही मन की परेशानी होने पर तुरंत मनोचिकित्सक, सलाहकार और मन के डॉक्टर की ओर बिना हिचक जाइए. इसमेंं कहीं कोई संकोच नहीं रखना है. आपकी खुशी जिंदगी के लिए सबसे जरूरी है इसे किसी भी कीमत पर कम नहीं करना है.

संपर्क: ई-मेल: dayashankarmishra2015@gmail.com. आप अपने मन की बात फेसबुक और ट्विटर पर भी साझा कर सकते हैं. ई-मेल पर साझा किए गए प्रश्नों पर संवाद किया जाता है.​
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