#जीवनसंवाद: हमारी कीमत क्या है!

#जीवनसंवाद: हमारी कीमत क्या है!
#जीवनसंवाद

Jeevan Samvad: हम किसी व्यक्ति का सारा मूल्य उसके द्वारा ही हासिल की गई संपदा से तय करते हैं. इस प्रक्रिया में हम यह भूल जाते हैं उस व्यक्ति का अपना मूल्य क्या है. बिना किसी चीज़ को हासिल किए/ उन नौकरियों के बिना जिनके कारण उसके आगे पीछे लोग मंडराते रहते हैं.

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'बहुत मुश्किलों में पले-बढ़े परिवार के इकलौते बेटे ने एक दिन अपने दोस्तों से पूछा कि उसका मन इस काम में नहीं लग रहा है, उसे क्या करना चाहिए! उसके दोस्तों ने उसे समझाने के बाद सारे निर्णय खुद करने के लिए कहा. उन्होंने यह भी कहा कि वह उसके साथ हैं. लेकिन जिसको यह निर्णय करना था उसके साथ अनेक युवाओं का भविष्य था. इसमें से बहुत सारे लोग उसके दोस्त भी हैं. इसलिए वह इसे टालता ही रहा. उसके दोस्त जो भी उसे सलाह दे रहे थे, वह सही तो थी, लेकिन उसकी प्रकृति के अनुकूल नहीं थी!'

धीरे-धीरे उनकी सेहत नकारात्मक असर पड़ने लगा. अब वह ठीक हैं! आप जहां कहीं भी हैं, थोड़ा सजग होकर अपने आसपास दोस्तों, मित्रों, प्रियजनों का ख्याल रखिए. कहीं आपके आसपास भी तो कोई ऐसे सवालों से नहीं गुजर रहा!

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सबका अपना एक मिज़ाज होता है. समय के साथ उसमें थोड़ा बहुत परिवर्तन हो जाता है, लेकिन वह ऐसा नहीं है जो पूरी तरह बदल जाए. अगर आपका दोस्त आपसे कहता है कि वह अपने काम से ऊब गया है. उसका मन नहीं लग रहा. तो उसे यह मत बताइए किस की नौकरी कितनी मूल्यवान है. किसी व्यक्ति की कीमत उसकी नौकरी से मत लगाइए. हम ऐसे समय में पहुंच गए हैं, जहां सब तरफ डिप्रेशन, निराशा, चिंता खतरनाक गति से आगे बढ़ रहे हैं. अगर कोई दोस्त कह रहा है कि उसका मन काम में नहीं लग रहा, तो इसे बहुत गंभीरता से लेने की जरूरत है!

उसकी नौकरी कितनी भी मूल्यवान क्यों न हो, लेकिन उसके जीवन से बढ़कर नहीं है. जब हम किसी व्यक्ति के मूल्यवान होने की बात करते हैं तो अक्सर ही है भूल जाते हैं कि उसका मूल्य कैसे तय होता है. कैसे तय होना चाहिए. अक्सर मूल्य कंपनी/संस्था द्वारा दिए जा रहे वेतन से तय होता है. उसके पास कितनी सुविधाएं हैं, इससे तय होता है.

हम किसी व्यक्ति का सारा मूल्य उसके द्वारा ही हासिल की गई संपदा से तय करते हैं. इस प्रक्रिया में हम यह भूल जाते हैं उस व्यक्ति का अपना मूल्य क्या है. बिना किसी चीज़ को हासिल किए/ उन नौकरियों के बिना जिनके कारण उसके आगे पीछे लोग मंडराते रहते हैं. हम व्यक्तियों का मूल्य भूल गए. केवल नौकरी और वस्तुओं के मूल्य में उलझ गए हैं.


इसलिए, जब हमारे बीच से कोई बात नहीं आकर कहता है कि उसका काम में मन नहीं लग रहा तो आप उसके मन को टटोलने की जगह उसे समझाते हैं कि देखो यह नौकरी कितने कीमती है. हम उसके मन की दशा, चिंता और मानसिक सेहत से जुड़े सवालों को स्वीकार करने से ही लगभग दूर चले जाते हैं. हमारा सारा ध्यान इस बात पर होता है कि कहीं वह नौकरी न छोड़ दे और उसकी जिम्मेदारी कहीं हमारे ही सिर पर आ जाए.

इसलिए सभी परेशानियों के बीच में नौकरी में डटे रहने को बेहतर मानते हैं. यह हमको भाने वाली व्यवस्था है. आर्थिक अनिश्चितता और बेरोजगारी के बीच ऐसी सोच होना बहुत अप्रत्याशित नहीं है. लेकिन इसके साथ ही यह भी समझना होगा कि अगर जीवन रहा तो किसी भी तरीके की मुश्किलों से लड़ा जा सकता है. लेकिन अगर मानसिक सेहत एक बार हाथ से निकल जाए तो उसे लौटने में समय लगता है. इसलिए, उससे किसी भी तरह का समझौता न किया जाए!

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यह तो एक प्रकार की स्थिति हुई. अब दूसरी प्रकार के अवसाद, गहरी निराशा की बात. कोरोनावायरस अपने साथ बहुत सारे ऐसे सवाल लेकर आया जिनसे बड़ी संख्या में लोग उलझे है. इनमें से कुछ स्वाभाविक रूप से बहुत बड़े हैं. तो कुछ ऐसे हैं जो बहुत अधिक चिंता से लिपटे हैं. बहुत सारे लोग इस बात से परेशान हैं कहीं उनकी नौकरी 'कल' छूट न जाए.

अखबार बता रहे हैं कि मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार के साथ ही दिल्ली में भी कुछ आत्महत्या केवल इस वजह से हुई हैं क्योंकि लोगों ने नौकरी जाने के डर को अपने जीवन पर बहुत भारी मान लिया. नौकरी गई नहीं, लेकिन उसकी चिंता, उसका तनाव मन पर इतना गहरा बैठ गया कि दिमाग़ ने सारे रास्ते बंद मान लिए.


दिमाग को ऐसी स्थिति के लिए तैयार तो कीजिए लेकिन कुछ देर में फंसना नहीं है. कल क्या होगा, इस चिंता में आज स्वयं को समाप्त नहीं किया जा सकता. आपके परिवार के संकट आपके जाने से हल नहीं होंगे. उनको, आपके साथ की जरूरत है. जब भी मन में निराशा के भाव हैं, दुनिया के सवालों को हवा में उछाल दीजिए और केवल इतना सोचिए कि आपके बिना आपका परिवार कितना कमजोर, अकेला हो जाएगा.

इस तरह अपना ख्याल रखिए और उन सब की भी खबर लेते रहिए जिनसे आप प्यार करते हैं. यह संवाद में कोमलता का समय है, भूलकर भी कड़वी बातें न कहें. आपको नहीं पता जिससे आप यह कह रहे हैं, वह कौन से दुख की छाया में बैठे हैं. शुभकामनाएं सहित...

संपर्क: ई-मेल: dayashankarmishra2015@gmail.com. आप अपने मन की बात फेसबुक और ट्विटर पर भी साझा कर सकते हैं. ई-मेल पर साझा किए गए प्रश्नों पर संवाद किया जाता है.

(https://twitter.com/dayashankarmi )(https://www.facebook.com/dayashankar.mishra.54)
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