लाइव टीवी

#जीवनसंवाद: मन का कबाड़

दयाशंकर मिश्र | News18Hindi
Updated: September 23, 2019, 5:29 PM IST
#जीवनसंवाद: मन का कबाड़
जीवन संवाद

Jeevan Samvad: मन की सफाई नियमित रूप से करना आरंभ कीजिए. मन खराब है. किसी के लिए कुछ ‘उबल’ रहा है. उससे क‍ह दीजिए. उबलते मत रहिए. जलते मत रहिए. सामने नहीं कह सकते. लिखकर कह दीजिए. पर कह दीजिए.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 23, 2019, 5:29 PM IST
  • Share this:
मन को लेकर हम खासे रूखे, अनमने हैं. जबकि शरीर को लेकर उतने ही सजग. उसे हल्‍की असुविधा होते ही उसकी देखभाल में जुट जाते हैं. दूसरी ओर मन को टालते, टहलाते रहते हैं. मन ठीक नहीं, उदास है. ऐसे प्रश्‍नों को टालते रहते हैं. इनके प्रति एक प्रकार की उदासीनता हमारे भीतर घर कर गई है. बचपन से सीखा है, ‘दो और दो’ चार होते हैं. यह बात गणित पर लागू होती है, जीवन में नहीं. जिंदगी में ‘दो और दो’ को साथ रख दिया जाए तो वह बाईस हो जाता है. यहां तक कि अगर इनके बीच बेकार माने जाने वाले शून्‍य को रख दें तो बाईस से हम सीधे दो सौ दो पर पहुंच जाते हैं.

बात सीधी, सच्‍ची, सरल है. हम जैसा समझना चाहते हैं, जीवन हमें उसी दिशा में मोड़ देता है. जीवन से अब तक मैंने जो भी सीखा है, उसका सारांश है, चीज़ों को समझने का दृष्टिकोण वैज्ञानिक हो. उदार, स्‍नेह और आत्‍मीयता से भरपूर. कठोर से कठोर बात पर भी संवाद करते समय मन गुलाब की तरह खिला हो. तेज़ बारिश, तूफान का सामना करते समय भी गुलाब के चेहरे पर चिंता नहीं आती. उसकी जिंदगी उसे चाहे जहां ले जाए, वह मुस्‍कान नहीं छोड़ता. मन में उसके प्रेम गहरे बैठा है.

दूसरी ओर हमारे मन हैं. जिनमें एक दूसरे के लिए नाराजगी, कटुता का लेप गहरा हो चला है. हम एक-दूसरे से जरा सा दुखी हुए नहीं कि उसके प्रति मन को गुस्‍से से भर लेते हैं. अगर कोई हमारे उस गुस्‍से वाले चेहरे की तस्‍वीर खींच ले तो बाद में हमारे लिए उस पर यकीन करना मुश्‍किल हो जाएगा कि अरे! हमें इतना गुस्‍सा आता है.

इतना गुस्‍सा किसलिए! इससे तो हमारा मन ही दूषित हो रहा है. हमें जो छोड़ गए, हम उसके हिस्‍से का कबाड़ लादे अंदर ही अंदर घुटते रहते हैं. यह उनके प्रति अन्‍याय है, जो हमारे साथ रहते हुए प्रेम, स्‍नेह को तरसते रहते हैं!


इसलिए, मन को दूसरों की स्‍मृति, याद, कटुता, खराब अनुभव से मुक्त करना मन की अच्‍छी सेहत के लिए अनिवार्य है. जब तक मन सेहतमंद नहीं होगा, शरीर कितना ही सुंदर, सजीला, स्‍वस्‍थ क्‍यों न हो, वह जिंदगी के लिए हितकारी नहीं होगा.

यहां सुने पूरा जीवन संवाद


Loading...

हम उन विचारों, यादों का बोझ लादे जीवन को सृजनात्‍मक, रचनात्‍मक मोड़ नहीं दे सकते, जिनसे हमें घुटन हो रही है. इसलिए, स्‍वयं को ऐसे अनुभव, याद, घटना से मुक्‍त कीजिए, जो आपकी चेतना को दर्द, पीड़ा और कटुता से भर देती है. जीवन केवल उसका है, जो जिंदा है. सक्षम है. उसके पास ही करने को कुछ बाकी है. अपने भीतर की क्षमता को समझिए.

मन की सफाई नियमित रूप से करना आरंभ कीजिए. मन खराब है. किसी के लिए कुछ ‘उबल’ रहा है. उससे क‍ह दीजिए. उबलते मत रहिए. जलते मत रहिए. सामने नहीं कह सकते. लिखकर कह दीजिए. पर कह दीजिए. गुजारिश, बस इतनी है कि कहते समय अपनी भाषा में यथासंभव संयम, प्रेम और आत्‍मीयता रखिए.


आज जिसके लिए आप गुस्‍से से कांप रहे हैं, कभी उसके साथ खुशी से झूमे भी थे. रस के रंग भी उसके साथ बिखेरे थे. खुशियां उसके साथ ही तो बांटते थे. दुश्मन होने की जरूरी शर्त कभी दोस्‍त होना भी है. इसलिए, जब मन कटुता के बोझ से झुलसा जा रहा हो तो सावधानी से उस बोझ को उतार कर रख दीजिए. उस बोझ से लदे, दबे मत रहिए.

एक वादा कीजिए. अगले दो दिन अपने मन के कबाड़ को खोजिए. सजगता से. उसके बाद धीरे-धीरे उसके बोझ से मुक्‍त होने का प्रयास कीजिए. यह सरल नहीं है, लेकिन मुश्किल भी नहीं. अपने लिए, अपनों के प्रेम और स्‍नेह को संवारने के लिए इससे बेहतर उपाय दूसरा नहीं. प्रयोग कीजिए. अनुभव साझा कीजिए!

पता: दयाशंकर मिश्र (जीवन संवाद)
Network18
एक्सप्रेस ट्रेड टावर, 3rd फ्लोर, A विंग
सेक्टर 16 A, फिल्म सिटी, नोएडा (यूपी)
ईमेल : dayashankarmishra2015@gmail.com अपने सवाल और सुझाव इनबॉक्‍स में साझा करें:
(https://twitter.com/dayashankarmi )(https://www.facebook.com/dayashankar.mishra.54)

#जीवन संवाद: स्नेह की चादर!

#जीवन संवाद: मन के टूटे तार!

#जीवन संवाद: रिश्ते में श्रेष्ठता का पेंच!

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए जीवन संवाद से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: September 23, 2019, 9:45 AM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...