#जीवन संवाद: रिश्तों का पुल, वादों की नींव!

वादा खिलाफी किसी भी संबंध के लिए बेहद घातक है. इसलिए अगर आप के आसपास ऐसे रिश्ते आकार ले रहे हैं, जिनमें आगे चलकर टकराव की जरा भी संभावना है तो अपना दायित्व निभाइए और सारी चीजों को जितना संभव हो स्पष्ट कीजिए.

दयाशंकर मिश्र | News18Hindi
Updated: August 7, 2019, 5:37 PM IST
दयाशंकर मिश्र | News18Hindi
Updated: August 7, 2019, 5:37 PM IST
हम एक ऐसे देश और समाज से आते हैं, जहां महिलाओं, लड़कियों की पहचान परिवार के साथ अभिन्न रूप से जुड़ी रही है. उनकी भूमिका में सबसे पहले यही देखा जाता है कि वह परिवार को कितनी 'सूट' करती है. यही कारण है कि अब तक शिक्षित लड़कियों, महिलाओं के प्रति हमारा दृष्टिकोण परिपक्व नहीं हुआ है. हम समय के साथ 'उदार' हो रहे हैं, इससे खुश तो हुआ जा सकता है लेकिन इसकी 'गति' बहुत धीमी है.

'डियर जिंदगी' जीवन संवाद में हम इस विषय पर निरंतर बात कर रहे हैं कि कैसे जीवन रथ के दोनों 'पहिए' सही तरह से काम करें. जिंदगी को एकाकी ढंग से अपनी- अपनी दौड़ में जीना अलग बात है, एक दूसरे का साथ निभाते हुए सबरंग 'जीवनसाथी' बनना दूसरी बात!


#जीवन संवाद: प्रेम की अभिव्यक्ति!

इस समय जितनी तेजी से रिश्ते बन रहे हैं, उसकी दोगुनी तीव्रता से बिखर रहे हैं. इस बिखराव के पीछे के बड़े कारणों में 'अपनी' पहचान भी है! जब युवा साथ मिलकर सपने देखते हैं, तो उनके सपनों के रंग में एकता होती है. सपने एकरंंग होते हैं. लेकिन जैसे ही रिश्ता शादी में बदलता है, रिश्तों की टूटन शुरू हो जाती है. यह एक विचित्र लेकिन दुखद मोड़ है. स्त्री-पुरुष संबंधों की परीक्षा रिश्तों के पुल बनने के बाद ही आरंभ होती है. दूसरे के लिए मन में भरोसा, विश्वास होना बड़ी बात नहीं है, इससे अधिक कहीं बड़ी बात इस भरोसे का कायम रहना है.

सीआईएसएफ के लिए किए जाने वाले संवाद के दौरान मुझे एक चौंकाने वाली जानकारी मिली. वहां बड़ी संख्या में लड़के-लड़कियों की भर्ती होती है, जो अविवाहित होते हैं. उसके बाद उनके बीच प्रेम के अंकुर फूटते हैं, जो स्वाभाविक रूप से शादी की ओर बढ़ते हैं. लेकिन उसके बाद उतनी ही तेजी से उनके रिश्ते में तनाव बढ़ने लगता है. यह बेहद चिंताजनक स्थिति है. इसका असल कारण यह है कि हम एक दूसरे की ओर सरल आकर्षण को भी प्रेम मान बैठते हैं. रिश्तों की अपरिपक्व समझ, स्त्री-पुरुष संबंध के प्रति वैज्ञानिक दृष्टिकोण की कमी ऐसे आधे-अधूरे रिश्तों के जन्म लेने का कारण बनती है.

#जीवन संवाद : आप घर में क्या हैं!

इसमेंं एक दिलचस्प तथ्य यह भी है कि संबंधों के आकार लेते वक्त लड़के और उनके घरवाले अक्सर झूठेे वादे करते हैं. जिनमें लड़की के लिए तमाम तरह के वादों की बातें होती हैं, लेकिन इन बातों को जिंदगी में लागू करना सबके लिए संभव नहीं होता. यहीं से टकराव शुरू होता है. शिक्षित और सक्षम लड़कियोंं के लिए यह एक छल की तरह है. ऐसे मामले बहुत तेजी से सामने आ रहे हैं. शादी के वक्त लड़के, उसके परिवार की तरफ से ऐसे वादों का किया जाना बंद होना चाहिए जिन्हें बाद में निभाया ना जा सके.
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#जीवनसंवाद: अपनेपन की निरंतरता!

यह वादा खिलाफी किसी भी संबंध के लिए बेहद घातक है. इसलिए अगर आप के आसपास ऐसे रिश्ते आकार ले रहे हैं, जिनमें आगे चलकर टकराव की जरा भी संभावना है तो अपना दायित्व निभाइए और सारी चीजों को जितना संभव हो स्पष्ट कीजिए.


एक अनसुलझे, झूठे रिश्ते से कहीं अधिक अच्छा है, रिश्ते का न होना. जीवन हमेशा ही चीजों को सुलझाते रहने का नाम नहीं है... इससे बहुत ऊर्जा और समय नष्ट होता है. रिश्तों की कड़ी जितनी अधिक स्पष्ट और स्नेह की ऊर्जा से लबरेज होगी, जिंदगी उतनी ही 'प्रिय' बनेगी.

#जीवन संवाद : पुराने, गहरे दुख!

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First published: August 7, 2019, 10:52 AM IST
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