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#जीवनसंवाद: अलगाव के समय मन...

दयाशंकर मिश्र | News18Hindi
Updated: October 18, 2019, 4:20 PM IST
#जीवनसंवाद: अलगाव के समय मन...
हमारा मन परतदार है. एक ही साथ हम प्रेम, घृणा, स्नेह से भरे होते हैं. समंदर की लहरों की तरह यही भाव मन में तैरते रहते हैं.

Jeevan Samvad: हमारा मन परतदार है. एक ही साथ हम प्रेम, घृणा, स्नेह से भरे होते हैं. समंदर की लहरों की तरह यही भाव मन में तैरते रहते हैं.

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  • Last Updated: October 18, 2019, 4:20 PM IST
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जब तक हम किसी के साथ होते हैं, उसके प्रति हमारे विचार, स्नेह, आत्मीयता दूसरे पड़ाव पर होते हैं. उससे अलग होते ही हमारे भीतर शत्रुता का भाव घर करने लगता है. व्यक्ति वही होता है, उसकी जीवन, विचार शैली वही होती है. अगर कुछ बदल जाता है तो बस इतना कि हमारा उससे रिश्ता पहले जैसा नहीं रहता. गुरुवार को नई दिल्ली एयरपोर्ट पर जल्दबाजी में मेरा बोर्डिंग पास किसी से बदल गया. मैंने ध्यान नहीं दिया, आगे बढ़ गया. कुछ ही मिनट में एक महिला मेरे पास आईं. उन्होंने कहा, शायद हमारे बोर्डिंग पास बदल गए हैं. गलती सुधारने के बाद हम अपनी अपनी दिशा में आगे बढ़ गए.

उड़ान में कुछ विलंब था. अचानक एक कोने में मैंने किसी को थोड़ा तेज आवाज में बात करते, रोते हुए देखा. एयरपोर्ट हमारे व्यवहार को दिखाने वाली सबसे शालीन जगहों में से एक है. हम अपना नाम भी इतने धीमे बताते हैं कि सामने वाले को दोबारा पूछना पड़े. हर व्यक्ति अपने को श्रेष्ठ, सभ्य, बड़ा दिखाने का प्रयास करता है. अगर हम ऐसे व्यक्तियों का अध्ययन कर पाएं जो रेलवे स्‍टेशन और एयरपोर्ट दोनों जगह का उपयोग करते हैं तो यह बहुत दिलचस्प होगा.

कैसे हमारा व्यवहार दोनों जगह बदल जाता है. जो लोग रेल के सफर में अच्छे भले हंसते बोलते रहते हैं, उन्हीं के मुंह से उड़ान के दौरान एक भी शब्द निकलना अजीब लगता है. ‌‌मैंने आज तक किसी को एयरपोर्ट पर इस तरह रोते नहीं देखा था. इसलिए, यह दृश्य मेरे लिए नया था.


मुझे लगा बात करनी चाहिए. कुछ देर पहले हमारी मामूली लेकिन बात हुई थी. इसलिए,मैंने थोड़े संकोच से केवल इतना पूछा, 'सब कुशल है.आप ठीक तो हैं! ' बड़े-बड़े आंसुओं के साथ उन्होंने कहा, ‘हां, हां सब ठीक है.’ वह फिर नम आंखों के साथ बातचीत में जुट गई. उनके शब्द तीखे, तेज थे. वह किसी से उसके बदले व्यवहार का उलाहना देते हुए, उसे सबक सिखाने की बात कर रही थीं. एयरपोर्ट पर अपनी छवि को लेकर सर्तक रहने वाले समय का वहां पर इस तरह से व्‍यवहार को को मन से जोड़ने का आशय केवल इतना है कि मन में कितना कुछ भरा होगा. टूटा होगा. ऐसी ही टूटन के बीच कई बार जीवन को नुकसान पहुंचाने वाले कदम उठा लिए जाते हैं.

वह बात करने वाले से नाराज, दुखी, गुस्‍सा होने के साथ बीच-बीच में उसके प्रति अपने प्रेम को भी प्रकट कर रही थीं. हम भारतीय किसी से अलग होने को लेकर बहुत अधिक भावुकता से पेश आते हैं. जबकि यह बड़े जीवन की एक बहुत छोटी घटना है. जीवन, असीम संभावना है. किसी से अलग होने का अर्थ ऐसी शत्रुता नहीं होनी चाहिए, जिसमें प्रेम की संभावना हमेशा के लिए समाप्त हो जाए. अलग रास्‍ते का चयन किसी का भी हो सकता है. यह एक सामान्‍य प्रक्रिया है.



ऐसे रिश्‍ते जो केवल डर,स्‍वार्थ से बंधे रहते हैं. वह किसी के लिए सुखद नहीं हो सकते. हां, उनमें गहरी घुटन जरूर होती है. ऐसी घुटन जो हमें अंदर से उदासी, अवसाद से भरती जाती है. इसलिए, रिश्‍ते समय लेकर बनाए जाएं लेकिन अगर उनमें रहना संभव न हो तो अलगाव के समय यथासंभव कटुता से बचना चाहिए.

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हमारा मन परतदार है. एक ही साथ हम प्रेम, घृणा, स्नेह से भरे होते हैं. समंदर की लहरों की तरह यही भाव मन में तैरते रहते हैं. एक ही समय में हम कैसे अलग अलग चीजों से जूझ रहे होते हैं. ऐसे में ही हमारे चित्त की एकाग्रता, स्थिरता का परीक्षण होता है.

अलगाव के समय खुद को संभाले रखना मुश्किल लेकिन जरूरी काम है. मैं एक बार फिर आपसे कहूंगा, जीवन सबसे बड़ा है. उसके सामने सभी रिश्‍ते, चुनौतियां छोटी हैं.

पता : दयाशंकर मिश्र (जीवन संवाद)
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ईमेल : dayashankarmishra2015@gmail.com
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First published: October 18, 2019, 12:23 PM IST
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