लाइव टीवी

#जीवनसंवाद: अजीब व्‍यवहार के मायने!

दयाशंकर मिश्र | News18Hindi
Updated: November 8, 2019, 4:54 PM IST
#जीवनसंवाद: अजीब व्‍यवहार के मायने!
जीवन संवाद

Jeevan Samvad: माना कि हम खूब व्‍यस्‍त हैं लेकिन जो संकट में है, वह कौन है! वह भी तो जिंदगी का हिस्‍सा है. इसलिए, दूसरों के व्‍यवहार के प्रति मन को सजग, स्‍नेहिल रखिए.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 8, 2019, 4:54 PM IST
  • Share this:
हमारे अपने बीच से कई बार किसी का व्‍यवहार ऐसा हो जाता है, जिसकी कल्‍पना तक नहीं होती. हम ऐसा करने वाले के बारे में लगातार बात करते रहते हैं. उसे कोसते रहते हैं. शिकायत का अंबार लगा देते हैं. यह सहज है. जिसके साथ भी ऐसा होगा वह इसी तरह बात करेगा.

लेकिन, ऐसा करते हुए हम भूल जाते हैं कि संभव है, उसके जीवन में गहरी उथल-पुथल चल रही हो. उसका मन बीमार हो. उसके भीतर कुछ उबल रहा हो. हमें तो बस भाप बाहर आती दिख रही है. इसलिए, ऐसा होने पर निंदा से अधिक हमें परवाह करनी चाहिए.

एक छोटी सी कहानी. मन के खराब होने पर, जिंदगी से ऊब होने पर हम क्‍या-क्‍या कर सकते हैं. किस हद तक जा सकते हैं. इसे समझने में मदद कर सकती है.


जंगल में बड़ा खुशमिजाज बंदर रहा करता था. किसी कारण वह अपने दोस्‍तों से ऐसे रूठा कि जिंदगी से ही उसका मन भर गया. उसे लगा अब जीवन का कोई अर्थ नहीं. सब बेकार है. उसके पेड़ के पास ही शेर की गुफा थी. उसने फैसला किया, अब नहीं जीना. उसने तुरंत गुफा की ओर दौड़ लगा दी.

शेर गहरी नींद में था. बंदर ने अपने फैसले की ओर बढ़ते हुए शेर के कान खींच लिए. जंगल का राजा इतनी गहरी नींद में था कि उसे पता ही नहीं चला. बंदर ने अबकी बार पूरी ताकत से कान खींचे.

शेर की नींद टूटी. गहरी नींद हो जाए तो टूटने पर हमेशा गुस्‍सा नहीं आता. भरभूर नींद के बाद मिज़ाज में मस्‍ती, प्रसन्‍नता रहती है. शेर के साथ भी ऐसा ही था. लेकिन उसे पता चल गया कि बंदर ने उसके कान को छुआ है.

उसने राजसी गुस्‍से से कहा, कौन है, जिसे जीवन प्रिय नहीं रहा.
Loading...

बंदर ने कहा, महाराज मैं मरना चाहता था. मैंने ही यह अपराध किया है. लेकिन अब मेरा इरादा बदल गया.

मौत सामने देख कई बार जीने की चाह प्रबल हो जाती है. शेर के सामने यह अपनी तरह का पहला मामला था. उसने कहा, ‘जंगल में आत्‍महत्‍या का नियम नहीं है. सबको जीना होता है. इसलिए, तुमने गलती तो की. लेकिन अच्‍छी बात यह है कि तुम सच बोल रहे हो. इसलिए, माफ किया. बस, यह बताओ कि किसी ने कान खींचते वक्‍त देखा तो नहीं.'

बंदर के इनकार करने पर शेर ने उसे अपने पास आने का इशारा किया, फिर धीरे से अपना कान आगे बढ़ाते हुए कहा, 'ज़रा एक बार फि‍र खींचकर दिखाओ. उस समय अच्‍छा लगा था.’

यह कहानी, जिंदगी से बस इतना कहती है कि जब कभी आपका कोई अपना, आसपास का ऐसा व्‍यवहार करे जो अजीब है, तो उस पर हमलावर होने की जगह उसके व्‍यवहार को समझने की कोशिश करें.


कई बार मन का दर्द बढ़ने, गहरा होने से भी जीवन के प्रति अस्‍थाई ऊब हो जाती है. ऐसे में हमारा व्‍यवहार शेर की तरह संयत, स्‍नेहिल होना चाहिए. जब वह ऐसा कर सकता है, तो हम क्‍यों नहीं.


माना कि हम खूब व्‍यस्‍त हैं लेकिन जो संकट में है, वह कौन है! वह भी तो जिंदगी का हिस्‍सा है. इसलिए, दूसरों के व्‍यवहार के प्रति मन को सजग, स्‍नेहिल रखिए.

किसी को एक दिन, एक घटना के चश्‍मे से मत देखिए. जिंदगी बड़ी, उदार और आत्‍मीय है. इसे ऐसे ही ग्रहण किया जाना चाहिए. दूसरों से प्रेम हासिल करने का यह सबसे सरल, सरस माध्‍यम है.

पता: दयाशंकर मिश्र (जीवन संवाद)
Network18
एक्सप्रेस ट्रेड टावर, 3rd फ्लोर, A विंग
सेक्टर 16 A, फिल्म सिटी, नोएडा (यूपी)
ईमेल : dayashankarmishra2015@gmail.com अपने सवाल और सुझाव इनबॉक्‍स में साझा करें:
(https://twitter.com/dayashankarmi )(https://www.facebook.com/dayashankar.mishra.54)

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए जीवन संवाद से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: November 8, 2019, 1:22 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...