लाइव टीवी

#जीवनसंवाद: रिश्तों को सींचना!

दयाशंकर मिश्र | News18Hindi
Updated: February 4, 2020, 9:16 AM IST
#जीवनसंवाद: रिश्तों को सींचना!
#जीवनसंवाद: रिश्तों को सींचना!

Jeevan Samvad: नौकरी, करियर, घर और संपदा का निर्माण मनुष्य के जीवन का महत्वपूर्ण काम है लेकिन संबंधों में खुशहाली के बिना यह रेगिस्तान में फसल उगाने जैसा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 4, 2020, 9:16 AM IST
  • Share this:
हम सभी चीजों की चिंता करते हैं. हम सबसे अधिक चीजों की ही चिंता में जुटे रहते हैं. जिनसे चीजें बनती हैं, जिनके कारण बनती हैं. वह धीरे-धीरे पीछे छूटते जाते हैं. इस पीछे छूटने वाली चीज़ का नाम, मनुष्य और रिश्ते हैं. नौकरी, करियर, घर और संपदा का निर्माण मनुष्य के जीवन का महत्वपूर्ण काम है लेकिन संबंधों में खुशहाली के बिना यह रेगिस्तान में फसल उगाने जैसा है.

उदयपुर से छाया त्रिपाठी ने अनुभव साझा करते हुए लिखा है, 'नौकरी के सिलसिले में मुझे जयपुर बसना पड़ा. मेरे अधिकतर दोस्त उदयपुर में रहते हैं. बहुत दिनों से उनसे मिलना नहीं हुआ था. एक निश्चित तारीख पर मैंने सबके लिए आयोजन किया. उनसे व्यक्तिगत रूप से कहा कि तय समय पर एक जगह पर मिलने आना है. इनमें से केवल दो लोग ही मिलने आए. वह भी दूसरे दिन ईमानदारी से स्वीकार करते हुए कि किसी वजह से वह उस दिन नहीं आ पाए.

मुझे बहुत दुख हुआ कि बुलाने पर भी दोस्त नहीं आए लेकिन बाद में जीवन संवाद के पन्ने पलटने पर ध्यान आया कि इन संबंधों को मैंने सींचना ही बंद कर दिया था. मैंने अपने मन के द्वार बहुत बाद में इन लोगों के लिए खोले. इसलिए उत्तर में मुझे इतनी शीघ्रता से प्रेम की अपेक्षा नहीं करनी चाहिए. मैंने उनके प्रति मन में आ रहे नकारात्मक भाव को जीवन संवाद की उर्जा के साथ सकारात्मक भाव में स्वीकार किया.'

हम छाया जी के दृष्टिकोण की सराहना करते हैं. हम इतनी गैर ज़रूरी चीज़ों में उलझे हैं कि हमारा ध्यान रिश्तों को संभालने की ओर बहुत कम है. इसे इस तरह भी समझा जा सकता है कि हम रिश्तों के नए महल बनाने के चक्कर में बसे बसाए भवन गिराते जाते हैं. मुझे याद आता है कि हम सब जब छोटे थे तो हमारे आसपास रिश्तेदारों और चचेरे-ममेरे भाई-बहनों की लंबी फौज हुआ करती थी. यह संबंध उस वक्त काम आते थे जब परिवार में आपसी तनातनी हो जाया करती थी.


बच्चे जब किसी कारणवश अपने माता-पिता से दूर हो जाते, नाराज हो जाते तो उन्हेंं मनाने की अघोषित जिम्मेदारी ऐसेे ही संयुक्त परिवार की होती थी. इस तरह बच्चे केवल अपने माता-पिता की देखरेख में नहींं होते थे. उनके एक साथ कई अभिभावक होते थे. खूब सारे बच्चों के बीच मेें तनाव का यह बीज अगर कहीं से खरपतवार की तरह आ भी जाता तो उसे संभालने के लिए अनेक लोग होते थे. घर-घर की यही कहानी थी. अब जरा इस चीज को अपनी सेहत से जोड़ कर देखिए.


पिछले दस से पंद्रह बरसों में जिस तेजी से हमारेे परिवार में हाइपरटेंशन, डायबिटीज और ब्लड प्रेेशर की बीमारी बढ़ी है, उससे तनाव और रिश्तों का सीधा संबंध स्थापित होता है. दिलचस्प बात यह है कि कोई भी डॉक्टर यह सब बातें नहीं कहता. वह तो उन चीजोंं में अपना ध्यान केंद्रित करते हैं जो बाहरी मन से जुड़ी होती हैं. हमारा असली मन तो भीतर रहता है. अपने अंतर्मन/अवचेतन मन से ही हम संचालित होते हैं.रिश्तों में प्रेम की कमी के कारण, उनमें स्नेह की कम मात्रा के कारण जो रूखापन पैदा होता है, हमारी अधिकांश बीमारियां उससे जुड़ी हैं. इसलिए, अपने मन को भी वैसेे ही साफ करते रहना है जैसे हम घर और शरीर को करते हैं. रिश्तों को प्रेम से सींचते रहना फूलोंं को सींचने जैसा ही सुंदर, जरूरी काम है.


पता: दयाशंकर मिश्र (जीवन संवाद)

Network18 एक्सप्रेस ट्रेड टावर, 3rd फ्लोर, A विंग
सेक्टर 16 A, फिल्म सिटी, नोएडा (यूपी)
ईमेल : dayashankarmishra2015@gmail.com अपने सवाल और सुझाव इनबॉक्‍स में साझा करें:
(https://twitter.com/dayashankarmi )(https://www.facebook.com/dayashankar.mishra.54)

ये भी पढ़ें: 

#जीवनसंवाद: अपनों का विरोध!

#जीवनसंवाद: संघर्ष की रोशनी!

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए जीवन संवाद से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: February 3, 2020, 8:47 AM IST
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर