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#जीवनसंवाद: घर, सपने और परिवार!

दयाशंकर मिश्र | News18Hindi
Updated: January 22, 2020, 1:26 PM IST
#जीवनसंवाद: घर, सपने और परिवार!
#जीवनसंवाद: घर, सपने और परिवार!

Jeevan Samvad: परिवार जिंदगी का वह हिस्‍सा है, जिसकी हम सबसे अधिक उपेक्षा करते हैं, जबकि परिवार ही हमारा सबसे बड़ा जिरह-बख्‍तर (रक्षा कवच) है.

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  • Last Updated: January 22, 2020, 1:26 PM IST
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सपने घर में बुने जाते हैं. सपने घर से बाहर दुनिया देखने की प्रेरणा देते हैं. सपने, हमें परिवार से दूर एकांत की ओर धकेलते हैं. आपको यह बातें दकियानूसी की हद तक अजीब लग सकती हैं. आप इनसे असहमत हो सकते हैं, लेकिन मन में थोड़ा स्‍नेह उड़ेलकर, थोड़ी नरमी लाकर सोचेंगे तो धीरे- धीरे सहमत होते जाएंगे. परिवार जिंदगी का वह हिस्‍सा है, जिसकी हम सबसे अधिक उपेक्षा करते हैं. जबकि परिवार ही हमारा सबसे बड़ा जिरह-बख्‍तर (रक्षा कवच) है. बच्‍चा जब छोटा होता है तो परिवार उसके लिए अपने सुखों को पीछे कर देता है. माता-पिता से लेकर परिवार से जुडे़ हर व्‍यक्ति का लक्ष्‍य बच्‍चे के सपनों के समीप मंडराता रहता है.

इस तरह घर पर सपनों की भूमिका तैयार होती है. संभव है कई बार परिवार चाहकर भी बच्‍चे के सपनों में सहयोग न कर पाए, लेकिन उसका हर तरह का समर्थन तो बच्‍चे के साथ होता ही है. इसके कुछ अपवाद भी हो सकते हैं. कई बार परिवार चाहकर भी आपके सपने के साथ खड़ा नहीं हो सकता, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं हुआ कि वह आपके विरुद्ध है. साथ खड़े न होने के हमेशा यही मायने नहीं होते कि कोई आपको पसंद नहीं करता. वह आपका समर्थन नहीं करता.

हम में से हर कोई अपनी-अपनी मजबूती के साथ अपनी कमजोरी से भी उतना ही जुड़ा हुआ है, इसलिए लोग अपने स्‍वभाव के अनुसार व्‍यवहार करते हैं. वह चाहते तो वही हैं, लेकिन उनमें उतना साहस नहीं होता कि वह खुलकर आपके सपने के पक्ष में आ जाएं. इसलिए, बाहर से देखने पर वह दूसरे पाले में नजर आ सकते हैं, लेकिन असल में वह आपके साथ ही होते हैं. इस तरह घर और सपने एक-दूसरे से जुड़े होते हैं.

‘जीवन संवाद’ को हर दिन आपके ई-मेल और फेसबुक मैसेंजर के माध्‍यम से संदेश मिलते हैं. कभी-कभी इनमें एक किस्‍म का गुस्‍सा होता है. अपने परिवार के प्रति. शि‍कायत होती है. कड़वाहट का गहरा भाव होता है. इसकी वजह यह बताई जाती है कि परिवार ने उस समय ठोस कदम नहीं उठाए, जब आपको उसकी जरूरत थी.

यह संभव है. यहीं आकर हमें प्रेम और नाराजगी के अंतर्संबंध को समझने की जरूरत है. हम भूल जाते हैं कि लोगों के व्‍यवहार का केंद्र क्‍या है? उनके विचार को शक्ति कहां से मिलती है!

आपने पढ़ा/सुना होगा कि भूकंप का एक केंद्र होता है. भूकंप के कारण दिल्‍ली डोल जाती है, लेकिन भूकंप का केंद्र दूर कहीं अफगानिस्‍तान में होता है. मन और भूकंप के व्‍यवहार में गहरी समानता है. भूकंप से हमारे शहर डोलने लगते हैं, जबकि उसका केंद्र दूसरे देश में होता है. ठीक ऐसे ही मन जो करता है, उसके कारण अवचेतन, परवरिश और परिवार में होते हैं.


जैसे-जैसे हम परिवार से दूर होते जाते हैं. असल में हम जिंदगी में अनुभव और प्रेम की छाया से दूर होते जाते हैं. हम बहुत से रिश्‍ते हासिल कर सकते हैं. बना सकते हैं. लेकिन परिवार की एकता में भाई-बहन ही नहीं, बल्कि सभी चचेरे-ममेरे भाई-बहनों के साथ का कोई मुकाबला नहीं है. इस जोड़ को दुनिया का कोई बुलडोजर नहीं तोड़ सकता. हर परिवार से दूर कैसे होते हैं!सपनों की तलाश में आरंभ हुआ सफर घूम-फिरकर वहीं लौटता है, जहां से शुरू हुआ था. जो अपने सुख को सहन नहीं कर पाते. उसे समंदर और नदियों की तरह नहीं संभालते. उनके लिए सपने अक्‍सर दुख का अध्‍याय आरंभ कर देते हैं. सपनों के लिए जाने, अपनों से दूर बसने में कोई समस्‍या नहीं. असल में दूरी संकट का कारण नहीं है. संकट का मूल कारण मानसिक दूरी है. अपने सपने से मिलने वाले सुख का सही बंटवारा नहीं होना है.

जब बंटवारा अनुचित होता है, संघर्ष वहीं से आरंभ होता है. हमें स्‍वयं और अपने से जुड़े हर व्‍यक्ति को ऐसे संघर्ष से यथासंभव दूर रखने की जरूरत है. यह इस नए दौर की नई कहानी है. इसलिए पात्रों के व्‍यवहार में बदलाव स्‍वाभाविक है. इससे डरना नहीं. भागना नहीं, इसका सामना करना है, बस नैतिक मूल्‍य नहीं बदलने हैं. जीवन में गहरी आस्‍था हमें ऐसे सभी संकटों से निकालने में सक्षम है. बस अपने मन को स्‍नेह, अनुराग और प्रेम से भरा रखिए.

पता: दयाशंकर मिश्र (जीवन संवाद)
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ईमेल : dayashankarmishra2015@gmail.com अपने सवाल और सुझाव इनबॉक्‍स में साझा करें:
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First published: January 22, 2020, 1:26 PM IST
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