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#जीवनसंवाद: दुख के सहयोगी!

दयाशंकर मिश्र | News18Hindi
Updated: February 5, 2020, 3:20 PM IST
#जीवनसंवाद: दुख के सहयोगी!
#जीवनसंवाद: दुख के सहयोगी!

Jeevan Samvad: दुख के सहयोगी वह हैं, जो मन के जालों को हटाने का काम नहीं करने देते. आपको उस ओर नहीं ले जाते, जहां से उजाला आत्‍मा में प्रवेश करता है. बल्कि रोशनदान खोलने से रोकते रहते हैं.

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  • Last Updated: February 5, 2020, 3:20 PM IST
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हम अक्‍सर संकट के समय मदद करने वालों को याद करते हैं. उनके प्रति मन में गहरा आदर रखते हैं. यह हमारा सहज स्‍वभाव है. लेकिन हम अधिक निकट उनके ही रहते हैं, जो हमारे दुख को बनाए रखने में सहयोगी होते हैं. यहां यह समझना जरूरी है कि दुख और संकट अलग-अलग हैं. आपको चोट लग गई, नौकरी नहीं मिल रही तो यह संकट है. रिश्ता टूट गया/साथ छूट गया/कोई साथ छोड़ गया/वादे तोड़ गया, यह दुख है. हम संकट और दुख में अक्सर घालमेल करते रहते हैं.

आपको यह बात थोड़ी खटक सकती है. अजीब लग सकती है. परेशान कर सकती है. लेकिन अपने भीतर थोड़ा ठहरकर सोचने से आप ऐसे लोगों की पहचान सरलता से कर सकते हैं जो आपके दुख के सहयोगी हैं. दुख के सहयोगी वह नहीं, जो दुख में मदद करते हैं. दुख के सहयोगी वह हैं, जो आपको निरंतर दुखी बनाए रखने में मदद करते हैं. ऐसे लोग कभी आपको दुख से बाहर नहीं आने देते. यह आपको हमेशा निराशा के भंवर में उलझाए रखते हैं.

एक मित्र हैं. उनकी प्रतिभा के सब कायल हैं. वह खूब पढ़े लिखे और अपनी बात को मनवाने में सबसे आगे रहने वाले हैं. लेकिन अगर वह किसी बात पर नाराज हो जाएं तो उनको मनाना मुश्किल हो जाता है. दूसरे, वह ऐसी बातों पर नाराज़ हो जाते हैं, जो दूसरे के फैसलों से जुड़ी होती हैं.


उदाहरण के लिए वह अपने एक बहुत अच्‍छे मित्र से केवल इसलिए नाराज हो गए कि उनने अपने घर के एक कार्यक्रम में एक ऐसे व्‍यक्ति को बुलाया जिससे उनकी अनबन है. मजे़दार बात यह देखिए कि जिसको बुलाने के लिए वह नाराज़ हुए उनके साथ वह पिछले पंद्रह बरस में आए हर दो-चार महीने में, टुकड़े-टुकड़े में नाराज़ होते रहते हैं.


जब उनका मन हुआ, उससे बात कर ली. जब न हुआ तो दुश्मनी का ऐलान कर दिया. हां, वह बाकी मित्रों को यह बताते भी नहीं कि उसके साथ उनके रिश्‍तों का अभी कौन सा दौर चल रहा है. वह उन सभी से रिश्‍ते तोड़ लेते हैं, जो उनके अनुसार नहीं चलते.

ऐसा करते हुए वह केवल ऐसे मित्रों से घि‍र गए हैं, जो दुख की जुगाली करने में उनकी मदद करते हैं.यही दुख के सहयोगी हैं. मैं ऐसे ही लोगों को दुख का सहयोगी कहता हूं. जो आपके दुखी मन में उजाला करने की जगह अतीत का अंधेरा फेंकते रहते हैं. आपको अतीत के आंगन से पकड़कर निकालने की जगह उसमें केवल यथास्थिति का दिया जलाते रहते हैं.

दुख के सहयोगी वह भी हैं, जो मन के जालों को हटाने का काम नहीं करने देते. आपको उस ओर नहीं ले जाते, जहां से उजाला आत्‍मा में प्रवेश करता है. बल्कि रोशनदान खोलने से रोकते रहते हैं.

इसलिए, ऐसे दोस्‍तों, परिजन की ओर लौटिए जो आपको उस ओर जाने से रोक सकें, जिसकी हिम्मत कम लोगों में होती है. क्योंकि कई बार हम मित्रों के इतने नजदीक हो जाते हैं कि इस बात से ही डरने लगते हैं कि कहीं वह हमारी बात से रूठ ना जाएं. हम उनकी ऐसी आदतों और स्वभाव के सहयोगी बनते जाते हैं, जो उस व्यक्ति के लिए सही नहीं है जो हमारा मित्र है. इसलिए, अपने मित्रों के प्रति अपने रवैया को थोड़ा खंगालिए, कहीं अनजाने में आप भी उनके दुख में सहयोग तो नहीं कर रहे हैं!

पता: दयाशंकर मिश्र (जीवन संवाद)
Network18 एक्सप्रेस ट्रेड टावर, 3rd फ्लोर, A विंग
सेक्टर 16 A, फिल्म सिटी, नोएडा (यूपी)
ईमेल : dayashankarmishra2015@gmail.com अपने सवाल और सुझाव इनबॉक्‍स में साझा करें:
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First published: February 4, 2020, 9:13 AM IST
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