लाइव टीवी

#जीवनसंवाद: अपनों का विरोध!

दयाशंकर मिश्र | News18Hindi
Updated: February 10, 2020, 5:34 PM IST
#जीवनसंवाद: अपनों का विरोध!
#जीवनसंवाद: अपनों का विरोध!

Jeevan Samvad: जब आप नए रास्‍ते पर चलने का फैसला करते हैं, तो वहां विरोध एकदम सामान्‍य बात है. इतिहास में कोई ऐसा व्‍यक्ति नहीं, जो बिना किसी विरोध के कुछ हासिल कर पाया हो.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 10, 2020, 5:34 PM IST
  • Share this:
मन में बहुत कुछ कहने को है. बातें छोटी-छोटी हैं. लेकिन कोई समझता नहीं. समझना तो दूर, सुनने को तैयार नहीं. एक रास्‍ता तय कर दिया गया है. बस उसी पर चलते रहना है. भोपाल में कुछ दिन पहले ‘जीवन संवाद’ के दो संवाद सत्र हुए. इनमें बड़ी संख्‍या में युवाओं की हिस्‍सेदारी रही. युवा, किशोर बच्‍चों के मन में जीवन से जुड़े सवालों में अपनी चिंता से अधिक बड़ों के प्रति नाराजगी का भाव है. यह धीरे-धीरे स्‍वभाव का हिस्‍सा बनता जा रहा है. मन की गहराई में उतरता जा रहा है. इनकी तकलीफ यह है कि बच्‍चों को कम से कम यह अधिकार होना ही चाहिए कि वह अपनी मर्जी से अपने सपने चुन सकें. अगर चुने हुए सपने को पूरा करना संभव न लग रहा हो, तो इतना तो समर्थन परिवार का हो कि नया रास्‍ता चुना जा सके. सपने चुनने में धन हमेशा बाधा बनने की शक्ति नहीं रखता. ऐसी रुकावट अधिकतर हमारे मन की पैदा की हुई होती है.

माता-पिता अपने सपने अपनी संतान की ओर धकेलते हुए कई बार यह भूल जाते हैं कि उनके अभिभावक ने उन्‍हें ऐसा करने की आजादी दी थी, इसलिए वह कुछ ऐसा कर पाए जिस पर वह गर्व महसूस करते हैं. जिसके लिए उनके मन में गहरा संतोष है. फैसले लेते वक्‍त हमारे मन में सबसे अधि‍क डर इस बात का होता है कि यह रास्‍ता नया है!

इस रास्‍ते पर हमारे परिवार का कोई व्‍यक्ति चला नहीं. यहां पर खतरे बहुत ज्‍यादा हैं. बच्‍चे का साथ कब तक दिया जाए! हमारी भी एक सीमा है. ऐसी बातें अक्‍सर माता-पिता के मन में तैरती रहती हैं. इसके कारण ही वह बच्‍चों के उन सवालों को कई बार टालते रहते हैं, जो बच्‍चों को अक्‍सर परेशान किए रहते हैं.

कुछ सरल उदाहरण लेते हैं. जैसे आप किसी डॉक्‍टर परिवार से आते हैं. आपके दादा-परदादा डॉक्‍टर थे. माता-पिता भी उसी रास्‍ते चले. अब आपसे भी वही अपेक्षा की जाती है, लेकिन आपका मन तो कंप्यूटर साइंस की ओर भागता है/ आप तो अर्थशास्‍त्र में पीएचडी करके अमेरिका जाना चाहते हैं. यहां परिवार आपको अपने परंपरागत क्षेत्र में इसलिए रखना चाहता है, क्‍योंकि इससे आपका संघर्ष कम हो जाएगा. परिवार का खानदानी काम जारी रहेगा. पहले के मुकाबले अब जिंदगी की दौड़ बहुत कठिन हो गई है.


परिवार यही सब आपको समझाने की कोशिश करता है. आप इसकी जगह अपने सपने को चुनते हैं. आप सड़क की जगह पगडंडी को चुनते हैं. यह जोखिम का काम है. परिवार तो आपको इससे बचाना चाहता है. बस! इतनी सी बात है. अगर परिवार नहीं समझ रहा है, तो यह आपका दायित्‍व है. आप उन्‍हें धीरे-धीरे अपनी बात के लिए सहमत करें. आपको अपना मानसिक संतुलन बनाए रखना है. अपने को मानस‍िक रूप से तैयार किए बिना आप अपने किसी फैसले पर टिके नहीं रह सकते. इसलिए बहुत जरूरी है कि पहले अपने मन को मजबूत किया जाए. मन को तैयार किए बिना फैसले नहीं लिए जाते. और अगर एक बार आपने अपने मन को राजी कर लिया, तो दुनिया में कोई आपको उस फैसले से पीछे हटने के लिए तैयार नहीं कर सकता.


यहां एक बात स्‍पष्‍ट करना जरूरी है कि विरोध होगा ही. उससे डरकर घर पर नहीं बैठा जा सकता. अगर विरोध नहीं सह सकते, तो सड़क पर चलते रहिए, पगडंडी के अरमान मत बुनिए. नया रास्‍ता चुनते समय बस दो बातों का ध्‍यान रखना है-1. जब आप नए रास्‍ते पर चलने का फैसला करते हैं, तो वहां विरोध एकदम सामान्‍य बात है. इतिहास में कोई ऐसा व्‍यक्ति नहीं जो बिना किसी विरोध के कुछ हासिल कर पाया हो.

2. विरोध सबसे पहले अपने परिवार से ही आता है. यह सहज है. इसे सहजता से ग्रहण करने की जरूरत है. परिवार के प्रति नाराजगी नहीं, ठीक वैसा व्‍यवहार रखना है, जैसा डॉक्‍टर अपने मरीज के प्रति रखते हैं. कड़वी दवा किसी को नहीं भाती, लेकिन डॉक्‍टर नाराजगी के डर से ऐसा करना बंद नहीं करते. यह ध्‍यान रखने से जीवन बहुत हद तक उलझने से बच जाता है.

 

पता: दयाशंकर मिश्र (जीवन संवाद)
Network18 एक्सप्रेस ट्रेड टावर, 3rd फ्लोर, A विंग
सेक्टर 16 A, फिल्म सिटी, नोएडा (यूपी)
ईमेल : dayashankarmishra2015@gmail.com अपने सवाल और सुझाव इनबॉक्‍स में साझा करें:
(https://twitter.com/dayashankarmi )(https://www.facebook.com/dayashankar.mishra.54)

ये भी पढ़ें: 

#जीवनसंवाद: संघर्ष की रोशनी!

#जीवनसंवाद: मन और गुस्‍सा!

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए जीवन संवाद से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: January 31, 2020, 2:39 PM IST
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर