लाइव टीवी

#जीवनसंवाद: सब कुछ कहना और सुनना!

दयाशंकर मिश्र | News18Hindi
Updated: January 23, 2020, 1:18 PM IST
#जीवनसंवाद: सब कुछ कहना और सुनना!
जीवन संवाद

Jeevan Samvad: हम एक-दूसरे के बारे में कही-सुनी बातों को अगर मानना बंद कर दें तो रिश्‍तों के अनेक पुल ढहने से बच जाएंगे. हम अक्‍सर उन्‍हीं चीज़ों पर भरोसा करते हैं, जिनके बारे में हम दूसरों को सजग रहने को कहते हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 23, 2020, 1:18 PM IST
  • Share this:
हम एक-दूसरे के बारे में कही-सुनी बातों को अगर मानना बंद कर दें तो रिश्‍तों के अनेक पुल ढहने से बच जाएंगे. हम अक्‍सर उन्‍हीं चीज़ों पर भरोसा करते हैं, जिनके बारे में हम दूसरों को सजग रहने के लिए कहते हैं. हम बच्‍चों को यही समझाते रहते हैं कि बात करो. दूसरों से सुनी बातों को बिना परखे, भरोसा मत करो. हम उनसे कहते सही हैं, लेकिन जब अपनी बारी आती है तो यही बात भूल जाते हैं.

हम कही-सुनी बातों को ठीक से परखे बिना दूसरों के लिए अपने दरवाजे बंद कर लेते हैं. रिश्‍तों के पुल समय की आंधी से कम भरोसे की कमी से अधिक टूटते हैं.

एक छोटी कहानी सुनिए. बुधवार की शाम एक ‘जीवन संवाद’ की सुधी पाठक से मिलना हुआ. उन्‍होंने एक किस्‍सा साझा किया. यह किस्‍सा ही आज संवाद का विषय है. इसमें मन को शांत, उदात्‍त और सुनने योग्‍य बानने के कहानी है.

दिल्‍ली में रहने वाले सुरेंद्र वर्मा पर परिवार की सारी जिम्‍मेदारी है. उनके बड़े भाई के नहीं रहने पर उनकी बिटिया और बेटे का पूरा दायित्‍व सुरेंद्र जी ने अपने ऊपर लिया. माता-पिता के साथ बहनों और बड़े भाई के परिवार की हर जरूरत का ख्‍याल वह स्‍वयं रखते हैं. उनके बड़े भाई की बेटी आराधना ने अपनी लगन, मेहनत से बड़े पद वाली सरकारी नौकरी हसिल की है.


आराधना की शादी की तैयारी चल रही है. कुछ महीने पहले की बात है. एक लड़के का नाम सामने आया. जो आराधना का सहपाठी था. वह एक निजी कंपनी में काम कर रहा था. सुरेंद्र जी का मानना था कि अच्‍छी नौकरी के बाद भी यह लड़का आराधना के लिए सही नहीं था. आराधना इससे सहमत नहीं थी. लेकिन सबके समझाने पर उसने रिश्‍ते के लिए मना कर दिया.

कुछ दिन बाद सुरेंद्र जी को उसी लड़के का एक वॉट्सएप मिला. जिसमें आराधना के हाथ से लिखी एक चिट्ठी थी. जिसमें उसने लिखा था कि उसके पिता के नहीं रहने के बाद उसका जीवन किसी तरह की मुश्किल में था. इसमें लिखा था कि अगर उसकी नौकरी उसकी तैयारी के हिसाब से नहीं लगी, तो वह अपने जीवन को समाप्‍त कर देगी. वह अपनी परवरिश को लेकर भी थोड़ी नाराज थी.

उसके लिए रात दिन एक करने वाले सुरेंद्र जी को इससे ठेस पहुंची. यह उनके भरोसे को हिलाने वाला था. इससे रिश्‍ते में दरार पड़ सकती थी. संबंधों में तनाव आ सकता था. लेकिन सुरेंद्र जी ने इसे जिस तरह संभाला वह तारीफ के लायक होने के सथ ही अनुकरणीय भी है.
सुरेंद्र जी ने आराधना को एकदम शांत मन से मिलने के लिए कहा. जहां, किसी जैन साधु (जैन बौद्ध धर्म का ही एक रूप है. जिसमें मनुष्‍य की चेतना पर सबसे अधिक जोर दिया जाता है. इसे जीवन का सही अर्थ खोजने के प्रयास की विधि के रूप में भी जाना जाता है) सरीखे मनोभाव, स्थिर, शांत चित्‍त से उन्‍होंने आराधना से अपनी बात जस की तस रखने को कहा.


आराधना ने अपनी गलती मानते हुए बताया कि उसके साथ कॉलेज में पढ़ने वाले पांच दोस्‍तों ने एक साथ बैठकर यह चिट्ठियां लिखी थीं. जहां सपनों के पूरा नहीं होने पर जीवन समाप्‍त करने की बात थी. उसने बताया कि इसमें यह भी तय हुआ था कि इन चिट्ठि‍यों को हम पांच लिखने वाले लोगों के अलावा किसी को नहीं दिखाया जाएगा. उसने बताया कि वह भी सारे पत्र दिखा सकती है. सुरेंद्र जी ने ऐसे पत्र देखने से मना कर दिया.

अनुराधा ने भारी मन से उनके गले लगते हुए कहा, चाचा! जो लड़का रिश्‍ता न होने पर इस तरह के अविश्‍वास, दिल दुखाने वाला काम कर सकता है. वह रिश्‍ता होने के बाद असहमति होने पर किसी हद तक जा सकता है. यह समझना मुश्किल नहीं.

अनुराधा ने यह भी कहा कि यह चिट्ठी किसी गहरे असंतोष के कारण नहीं बल्कि दोस्‍तों के साथ गपशप के दौरान निकले सहज दुख का कारण थी. इसे उसका बचपना समझा जाए. सुरेंद्र जी किसी जेन साधु की तरह मन की गहरी शांति से उसके आंसू पोंछ रहे थे.

इस कहानी को साझा करने के मायने बस इतने हैं कि माता-पिता और उनसे जिनके बिना तुम रह नहीं सकते, जिनसे जीवन की डोर जुड़ी है, कभी कुछ मत छुपाओ. मन की गांठों को खोलते रहो. यह भी नहीं कि आत्‍महत्‍या का विचार मन में आ रहा है तो कैसे कहें! ऐसा करना असल में इस विचार को मन के भीतर जगह देने जैसा है. मन में कुछ छुपाने, दबाने से वह मैला ही होगा. कह देना ही उसका सर्वोत्‍तम उपचार है.

पता: दयाशंकर मिश्र (जीवन संवाद)
Network18 एक्सप्रेस ट्रेड टावर, 3rd फ्लोर, A विंग
सेक्टर 16 A, फिल्म सिटी, नोएडा (यूपी)
ईमेल : dayashankarmishra2015@gmail.com अपने सवाल और सुझाव इनबॉक्‍स में साझा करें:
(https://twitter.com/dayashankarmi )(https://www.facebook.com/dayashankar.mishra.54)

ये भी पढ़ें : 

#जीवनसंवाद: घर, सपने और परिवार!

#जीवनसंवाद: रिश्‍ते और प्रेम के पुल!

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए जीवन संवाद से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: January 23, 2020, 1:18 PM IST
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर