लाइव टीवी

#जीवनसंवाद: संघर्ष की रोशनी!

दयाशंकर मिश्र | News18Hindi
Updated: January 30, 2020, 12:28 PM IST
#जीवनसंवाद: संघर्ष की रोशनी!
#जीवनसंवाद: संघर्ष की रोशनी!

Jeevan Samvad: संघर्ष जिंदगी का हिस्सा है. हमें उसे अपने साथ लेकर चलना है. उसे अलग करके देखने से ही अक्सर संकट पैदा होते हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 30, 2020, 12:28 PM IST
  • Share this:
मैंने हमेशा इस बात का जिक्र किया है कि मुझे लिखने के लिए विषय आपसे ही मिल रहे हैं. आपके अनुभव, सुख-दुख और अनुराग के रंग में जो शब्द मुझ तक पहुंचते हैं, उनमें ही मैं जीवन के रंग मिलाकर आप तक पहुंचाता हूं. इस ऐसे भी कह सकते हैं कि मिट्टी आपकी है, मैं बस कुम्हार का काम कर रहा हूं.

जिंदगी इतनी मुश्किल नहीं है, जितना हमें लगता है. इसके लिए जरूरी नहीं कि हर बार हम ऐसे लोगों के नाम ही दोहराते रहें, जिनके नाम हर जगह लिए जाते हैं. आपके आसपास ऐसे लोग बड़ी संख्या में हैं, जो धीरे-धीरे जिंदगी से लोहा लेते रहते हैं.

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में बुधवार की शाम 'जीवन संवाद' के पाठकों के नाम रही. इसका नाम तो पुस्तक चर्चा था, लेकिन धीरे-धीरे यह स्नेह और अनुराग के अनुभव में बदल गई. भोपाल से सटे विदिशा और होशंगाबाद से पाठक इस संवाद के लिए चलकर आए. जीवन से जुड़े अनेक अनुभवों और अपने-अपने दुख से आगे निकल कर जीवन को ऊर्जा देने वाले प्रसंगों पर पेट भर बात हुई.

कभी सोच कर देखिए हम दूसरों को क्या बताते हैं. हम कौन-सी चीजों का जिक्र दूसरों से करना पसंद करते हैं. उन्हीं सब बातों का जिनमें हमारा संघर्ष छिपा होता है. संघर्ष ही जीवन का सौंदर्य है. इसके बिना जीवन क्या है? रात के बिना सुबह को कौन याद करेगा. सुबह की प्रतीक्षा ही इसलिए होती है क्योंकि रात होती है. जब रातें होनी बंद हो जाएंगी तो दिन का ख्याल कौन रखेगा. इसलिए संघर्ष को जीवन से काटकर देखने की आदत हमें छोड़नी होगी.


इस संवाद में हिस्सा लेते हुए डॉ. विजय अग्रवाल ने संघर्ष के बारे में बेहद खूबसूरती से कहा, 'संघर्ष जिंदगी का हिस्सा है. हमें उसे अपने साथ लेकर चलना है. उसे अलग करके देखने से ही अक्सर संकट पैदा होते हैं.'

जब भी कोई मुश्किल आती है, हम अक्सर अपने भाग्य को कोसने में जुट जाते हैं. उसके लिए कोई ना कोई कारण ढूंढने लगते हैं. जिससे यह साबित किया जा सके कि हम से अधिक दुखी कोई दूसरा नहीं है. क्योंकि दुखी व्यक्ति के साथ अक्सर लोगों की सहानुभूति जुड़ी होती है. हम उसकी मदद तो नहीं कर सकते लेकिन उसके प्रति हमारा रवैया सांत्वना पूर्ण होता जाता है. वह हमारी प्रतिस्पर्धा से दूर होता जाता है. आपने अक्सर देखा होगा कि ऐसा व्यक्ति जो एक जगह ठहर जाता है, उसके बारे में लोगों का रवैया ऐसे लोगों के मुकाबले प्रेम पूर्ण हो जाता है जो लगातार आगे बढ़ते जा रहे हैं.

हम अपने मित्रों में भी ऐसे लोगों के लिए सहृदय रहते हैं, जिनका दायरा हमारे मुकाबले छोटा होता है. यह एक तरह का मनोविकार है. हमें ऐसे लोगों से मिलकर कम ही अच्छा लगता है जो लगातार खतरा उठाते हुए आगे बढ़ते हैं. हमें अधिकतर ठहरे हुए लोग पसंद आते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि साहस हमारे जीवन से विलुप्त हो गया है. आप इतिहास उठाकर देख लीजिए, क्या कारण है कि हम कोलंबस से लेकर दुनिया भर के यात्रियों की बात करते हैं लेकिन हमारे बीच से कोई यात्री दुनिया की सैर करके आने वाला नहीं है.अगर हैं भी तो बहुत कम. संघर्ष की तरफ खुद को जाने से रोकने की जीवन शैली हमें धीरे-धीरे पीछे की ओर ले जाती है. मनुष्य के रूप में मुझे नई चुनौतियां हमेशा आकर्षित करती हैं. क्या हमारा जन्म केवल इसलिए हुआ है कि हम जिंदगी भर एक ही काम करते रहें. एक ही तरह की चीजों से चिपके रहें. हमें निरंतर खुद को संघर्ष की ओर धकेलना है. इससे ही मनुष्य का भाग्य और मन चमकता है. इसलिए संघर्ष को जिंदगी का हिस्सा बनाइए. इससे दूरी मन को तनाव और निराशा की ओर ही ले जाएगी.

पता: दयाशंकर मिश्र (जीवन संवाद)
Network18 एक्सप्रेस ट्रेड टावर, 3rd फ्लोर, A विंग
सेक्टर 16 A, फिल्म सिटी, नोएडा (यूपी)
ईमेल : dayashankarmishra2015@gmail.com अपने सवाल और सुझाव इनबॉक्‍स में साझा करें:
(https://twitter.com/dayashankarmi )(https://www.facebook.com/dayashankar.mishra.54)

ये भी पढ़ें: 

#जीवनसंवाद: मन और गुस्‍सा!

#जीवन संवाद : आत्‍महत्‍या और घर का तनाव!

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए जीवन संवाद से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: January 30, 2020, 12:28 PM IST
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर