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#जीवनसंवाद: तुम बिन!

दयाशंकर मिश्र | News18Hindi
Updated: December 12, 2019, 9:58 AM IST
#जीवनसंवाद: तुम बिन!
#जीवनसंवाद: तुम बिन!

Jeevan Samvad: जीवन में किसी प्रिय के नहीं रहने से बड़ी वेदना क्या है. इससे बड़ा दर्द कुछ नहीं. लेकिन यह एक ऐसी सच्चाई है, जिसे स्वीकार किए बिना दुनिया का चलना संभव नहीं.

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  • Last Updated: December 12, 2019, 9:58 AM IST
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बनारस से हृदय की गहराई से ई-मेल भेजा गया है. इसमें जीवन के प्रति प्रेरणा के लिए 'जीवन संवाद' को दुलारते हुए स्नेह दिया है. यह ई-मेल सुशिक्षित, संवेदनशील पति की ओर से है, जिन्होंने एक दुर्घटना में अपनी पत्नी को खो दिया. उनका मन, हृदय, दिमाग सब कुछ अस्त-व्यस्त है. वह भीतर तक शोक में डूबे हुए हैं. उनका कहना है, ऐसे समय में जीवन संवाद उनके जीवन में प्रेरणा की अलख जगह रहा है.

जीवन एक संघर्ष है. यह संघर्ष इसीलिए है, क्योंकि जीवन है. जिंदगी में कुछ भी पूरा नहीं होता है. संपूर्णता जैसी बातें जीवन से मेल नहीं खाती. सब में कुछ न कुछ विशेषता होती है, तो कुछ ऐसा भी होता है, जिससे अधूरापन बना रहे. यह ईमेल पढ़ते हुए मुझे हरिवंश राय बच्चन की याद आ गई. 'निशा निमंत्रण' की एक कविता 'इस पार, उस पार' में उन्होंने लिखा है, 'इस पार, प्रिये मधु है तुम हो, उस पार न जाने क्या होगा!' इस ई-मेल से बरबस यह कविता मन में तैर गई.

जीवन में अचानक एक मोड़ आता है, उनका ही साथ छूट जाता है, जिनसे सारा 'हिसाब किताब' होता है! ऐसे क्षण में जीवन के प्रति गहरी आस्था की दरकार होती है! मुझे देख कर बेहद हर्ष हुआ कि ई-मेल को भेजने वाले व्यक्ति इतनी मुश्किल वक्त में भी जीवन के प्रति आस्था, सजगता, संवेदनशीलता की हरी-भरी उम्मीद हैं.


हम अपने आसपास की दुनिया में अनेक ऐसे लोगों से परिचित हैं, जो दुख की एक टंगड़ी से उठकर खड़े नहीं हो पाते. तो दूसरी ओर ऐसे लोग भी हैं जो मुश्किल वक्त में भी उम्मीद को मुरझाने नहीं देते. हमको- आपको मिलकर इस उम्मीद को हरे-भरे जंगल में बदलना है. अपने छोटे-छोटे वाक्यों में जीवन के प्रति आशा लाइए. दूसरों के प्रति जितना संभव हो नकारात्मकता से दूर रहें. रिश्ते के उतार-चढ़ाव, जीवन के भंवर में यह हमेशा याद रहे कि जीवन प्रीपेड सिम है. जितना 'टॉकटाइम' है, उससे अधिक कुछ भी मिलना संभव नहीं. इसलिए, हर पल को जीना जरूरी है. जिससे मन में कोई खलिश न रहे.

जीवन में किसी प्रिय के नहीं रहने से बड़ी वेदना क्या है. इससे बड़ा दर्द कुछ नहीं. लेकिन यह एक ऐसी सच्चाई है, जिसे स्वीकार किए बिना दुनिया का चलना संभव नहीं. अगले ही पल हमें स्वीकार करना होता है कि चांद, सूरज, नदी, तारे सब कुछ अपनी जगह होंगे. अगर कुछ नहीं होगा तो बस 'तुम' नहीं होगे. यह मुश्किल वक्त जीवन में कभी भी आ सकता है. इसलिए, आज से प्रेम करना सबसे जरूरी है.

पता: दयाशंकर मिश्र (जीवन संवाद)
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First published: December 4, 2019, 9:43 AM IST
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