#जीवन संवाद : संकट को सहना!

जीवन संवाद

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#JeevanSamvad: यह संकट हमारी मानसिक मजबूती की सबसे अधिक परीक्षा लेने जा रहा है. इसलिए मन का ख्याल रखिए, बाकी संकट धीरे धीरे टल जाएंगे.

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कोरोना इस मामले में दुर्लभ संकट है कि उसने एक साथ हमारे सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक जीवन को प्रभावित किया है. हममें से कुछ परिवारों के पास ऐसे बुजुर्ग हो सकते हैं जिन्होंने जीवन में बहुत ही कठिन समय देखा हो लेकिन इस समय जैसे संकट की कोई पुष्टि नहीं मिलती. अपनी यादों को टटोलते हुए कुछ लोग अकाल के दिनों तक पहुंच जाते हैं. कुछ भुखमरी और गरीबी के हृदय विदारक किस्से सुनाते हैं. लेकिन यह संकट तो जैसे 'सब कुछ एक साथ' लेकर आया है. कोरोना सारे संकट एक साथ लेकर आया है. यह असल में संकट का 'पैकेज' है. सबके लिए इसमें कुछ न कुछ दुख जरूर है. इसके यहां कोई भेदभाव नहीं, सबको बराबरी से भयभीत कर रहा है.

'जीवन संवाद' को हर दिन ऐसे प्रश्न मिल रहे हैं , जिनमें संकट को लेकर मन में गहरी पीड़ा और पीड़ा से अधिक डर है. बहुत से लोगों का संकट आर्थिक मजबूरियों से जुड़ा हुआ है. इसके लिए हम सब मिलकर जितना अधिक 'सांझे चूल्हे' पर जोर देंगे, इस संकट का उतना ही अधिक सामना सरलता से कर पाएंगे. हम सब जहां भी हैं जैसे भी हैं‌, जिनके भी बीच हैं. उनके साथ रहकर ही इसका सामना कर सकते हैं. आपके प्रिय कॉलम में कई बार मैंने निवेदन किया है कि हमने अपने जीवन में धन और सुविधा को बहुत अधिक महत्व दे दिया है. संभव है बहुत से पाठक इससे सहमत न हों, लेकिन कोरोना ने अनचाहे ही इसकी पुष्टि कर दी है. इससे पीड़ित और इसमें जान गंवाने वालों की संख्या बता रही है कि बहुत कम अवसरों पर धन में यह शक्ति होती है कि वह आपका जीवन बचा सके.

हमारे बीच अनेक लोग ऐसे हैं जो इस वक्त घर से काम कर रहे हैं. बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी हैं जिनकी नौकरियां खतरे में हैं. बहुत से लोगों को अचानक से घर बैठने के लिए कहा भी जा चुका है. ऐसे में निराशा, उदासी और डिप्रेशन की लपटें हमारी ओर बढ़ रही हैं.

ऐसे में यह सवाल बहुत जरूरी है कि हम इन संकटों का सामना कैसे करें. बहुत विनम्रता, अनुभव और जीवन से मिली प्रेरणा, सीख के आधार पर कुछ उपाय सुझाता हूं. संभव है, इससे दुख को अधिक सरलता से और प्रसन्नता से सहा जा सके.


1. शर्मिंदा नहीं होना: हमें इस संकट के किसी भी हिस्से (आर्थिक, शारीरिक और सामाजिक) से गुजरते हुए शर्मिंदा नहीं होना. अगर किसी भी स्तर पर कुछ नुकसान हुआ है तो उसकी भरपाई का ख्याल मन में निरंतर बना रहना चाहिए. हम कई बार संकट या दुख से शर्मिंदा होकर मन को बहुत अधिक जला बैठते हैं. जुलाई के बाद स्थितियां धीरे-धीरे सामान्य होने की ओर बढ़ सकती हैं. अगर मन को एक बार आप कमजोर कर बैठे तो उस वक्त जब सब ठीक होगा आप क्या कर पाएंगे.

2. मन का ख्याल: मनोबल से बड़ी कोई भी चीज नहीं. हिरोशिमा-नागासाकी के हमले से जापान को जिस तरह तबाह कर दिया गया था. उसके बाद किसी को जापान के इस तरह खड़े होने की आशा नहीं थी. लेकिन जापान को यह आशा थी. थोड़ा ठहर कर सोचिए यह संकट उससे गहरा नहीं. बस मन में खड़े रहने का विश्वास गहरा होना चाहिए.

3. बच्चों और परिवार की सुविधा: अधिकांश परिवारों में इसको लेकर बहुत अधिक तनाव होता है. यकीन मानिए परिवार हर हालत में आपके साथ 'एडजस्ट' हो जाता है. बच्चों को कुछ वक्त जरूर लग सकता है कम सुविधाओं का अभ्यस्त होने में. लेकिन यह ऐसा नहीं है, जिसके लिए जीवन को दांव पर लगा दिया जाए.

अगर आप स्वस्थ हैं. मन का ख्याल रखा गया है. परिवार आपके साथ है तो अगले कुछ महीनों में आप किसी भी स्थिति से उबर सकते हैं. मैं विनम्रता पूर्वक फिर से दोहराना चाहता हूं कि यह संकट हमारी मानसिक मजबूती की सबसे अधिक परीक्षा लेने जा रहा है. इसलिए मन का ख्याल रखिए, बाकी संकट धीरे-धीरे टल जाएंगे.


संपर्क : Email dayashankarmishra2015@gmail.com. अपनी बात आप फेसबुक मैसेंजर ट्विटर पर भी साझा कर सकते हैं.

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