#जीवनसंवाद : प्यार, फैसले और ब्रेकअप!

#जीवनसंवाद : प्यार, फैसले और ब्रेकअप!
जीवन संवाद

#JeevanSamvad: ऐसा कैसे संभव है कि कल तक हम जिसकी प्यास में भटकते थे आज उससे नाराजगी होते ही प्यार मिट जाएगा. प्यार कभी मिटा नहीं करते. अगर वह प्रेम है तो लिपटे रहेंगे आपकी आत्मा से. चुपचाप शांति और मौन से.

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युवा मन बहुत तेजी से जुड़ते हैं, उतनी ही तेजी से बिखरते हैं. इधर कुछ पाठक लिखते हैं कि मन और प्रेम पर कुछ बात की जाए. रिश्तों का संभलना मुश्किल हो रहा है. थोड़ा सा दबाव पड़ते ही रिश्ते कांच के बर्तनों की तरह छन्न से टूट जाते हैं. एक-दूसरे के साथ रहते हुए भी नहीं रहते हैं. इन दिनों शहरों में मनोचिकित्सकों (साइक्लोजिकल काउंसलर्स) के पास पहुंचने वाले सबसे अधिक लोगों में ऐसे लोग हैं जो रिश्ते टूटने से दुखी हैं. इनको हम सरल भाषा में ब्रेकअप (प्रेम में रिश्तों का टूटना) से जुड़े हुए मामले भी कह सकते हैं.

मंगलवार के जीवन संवाद के लेख 'प्यार की गुलामी' पर हमें देश भर से संदेश मिले हैं. इन संदेशों का सारांश यही है कि अभी भी प्रेम को सही अर्थ और स्वतंत्रता के संदर्भ में समझा जाना बहुत जरूरी है. अभी भी दो लोगों के बीच रिश्तों में बहुत से लोगों की भूमिका है. निर्णय स्वतंत्र नहीं है. जब तक निर्णय हमारे नहीं होंगे, हम उन्हें स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं होंगे हम जीवन से दूर रहेंगे. जब तक परिवार फैसले लेने की आजादी नहीं देगा, युवा मन प्रेम की ओर बढ़ ही नहीं सकते. हम केवल गुलामी और संदेह की ओर बढ़ सकते हैं. हम उसी ओर जा रहे हैं.

लॉकडाउन के दौरान पिछले एक महीने में मुझे कम से कम ऐसे 5 युवाओं से विस्तार से संवाद का मौका मिला, जो लोग किसी ना किसी वजह से तनाव से गुजर रहे हैं. कुछ निर्णय नहीं कर पा रहे हैं. वह कहते हैं प्रेम में हैं, मैं कहता हूं, दुविधा में हैं. वह कहते हैं रिश्ता टूटने से दुखी हूं, मैं कहता हूं ऐसे रिश्ते टूट जाना ही बेहतर. रिश्ता टूटने से संबंध नहीं टूटा करते. प्रेम नहीं टूटा करता.




ऐसा कैसे संभव है कि कल तक हम जिसकी प्यास में भटकते थे आज उससे नाराजगी होते ही प्यार मिट जाएगा. प्यार कभी मिटा नहीं करते. अगर वह प्रेम है तो लिपटे रहेंगे आपकी आत्मा से. चुपचाप शांति और मौन से. मनी प्लांट की बेल कैसे चुपचाप फैलती रहती है, बिना किसी शोर और अपेक्षा के. सच्चा प्रेम अमरबेल की तरह नहीं लिपटता. वह तो गहरे अनुराग में डूबा रहता है.



रिश्तों को जो एक दिन में ही बना लेते हैं, वह अक्सर इतनी ही जल्दी से उनको गंवा देते हैं. लेकिन इसका अर्थ या नहीं हुआ कि जो लोग लंबे समय से किसी रिश्ते में हैं, उनका संबंध फेविकोल के जैसा है. नहीं फेविकोल जैसा कुछ भी नहीं. क्योंकि भीतर से हमारे अंदर परिवर्तन आ रहा है. हमने अपनी गति तेज़ कर ली है. हम सब कुछ बहुत जल्दी चाहते हैं. सारे फैसले, आरजू, तमन्ना. सब कुछ, पूरा और संपूर्ण. सब कुछ किसी को नहीं मिलता. यह नियम है सृष्टि का. उस प्रकृति का जिसने आज हमें कोरोनावायरस के माध्यम से अंततः हरा दिया है. यह कोरोना हमारे लालच और नियमों की अनदेखी का भी परिणाम है.


बहुत से लोग दुखी होते हैं, आजीवन दुखी रहते हैं. ब्रेकअप के कारण. लंबे समय तक प्रेम के शादी में ना तब्दील हो पाने के कारण. यह प्रेम की बुनियाद ही गड़बड़ है. जिस चीज़ का उद्देश्य बहुत पहले तय कर लिया जाता है उसमें मन में दुविधा और संदेह की आशंका अधिक हो जाती है. किसान, इसलिए लंबे समय तक सुखी रहे क्योंकि इन्होंने बहुत अधिक अपेक्षा नहीं की थी. वह हर तरीके के परिणाम के लिए तैयार रहते थे.


मैं बड़ी संख्या में ऐसे युवा जोड़ों से परिचित हूं जिन्होंने अगर विवाह कर भी लिया होता तो उनका जीवन कभी सुखी नहीं होता. हम भूल रहे हैं कि प्रेम के लिए जो गुण अनिवार्य होते हैं, जरूरी नहीं शादी (जिस तरह की व्यवस्था हमारे यहां है) में भी वही लुभावने बने रहें.

अनुभवी लोग इस बात को जानते हैं. जो प्रेम में डूबे होने का भ्रम पैदा करते हैं वह स्वयं भी जानते हैं. इसलिए वह समय रहते अलग हो जाते हैं. इसका अर्थ यह नहीं कि सभी ऐसे हैं. जिनकी आत्मा में प्रेम का अमृत उतर आता है वह असुविधा की ओर नहीं देखते. वह तो केवल प्रेम की ओर देखते हैं. उनके जीवन में संकट नहीं है. क्योंकि उनके जीवन में केवल प्रेम है. संकट उनके जीवन में है जो प्रेम को किसी प्रोडक्ट की तरह देखते हैं. सब खुश रहें और प्रेम भी निभ जाए, ऐसा कम ही संभव होता है. अनेक वर्षों में कभी-कभी होता है. इसीलिए दुनिया की महानतम प्रेम कहानियां अधूरी हैं.

समय के साथ सब कुछ बदलता है और यही शाश्वत है. सत्य है. शुभ है. प्रेम है तो उसमें दुविधा और आशंका को मत मिलाइए. ब्रेकअप से डरिए मत. खासकर लड़कियों के लिए यह समझना बहुत जरूरी है. क्योंकि वह कहीं अधिक भावुकता से फैसले लेती हैं. इसलिए उनके जीवन में अवसाद के उतरने का संकट गहरा हो रहा है. इससे बचने की जरूरत है. ब्रेकअप कोई सामाजिक प्रतिष्ठा की विषय वस्तु नहीं है. वह एक निर्णय है. बस, इससे अधिक कुछ नहीं.
शुभकामना सहित....

दयाशंकर मिश्र
संपर्क: ई-मेल: dayashankarmishra2015@gmail.com. आप अपने मन की बात फेसबुक और ट्विटर पर भी साझा कर सकते हैं. ई-मेल पर साझा किए गए प्रश्नों पर संवाद किया जाता है.
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