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#जीवन संवाद : जब 'कड़वा' ज्यादा हो जाए!

#जीवन संवाद : जब 'कड़वा' ज्यादा हो जाए!

जीवनसंवाद

जीवनसंवाद

जिंदगी को प्रेरणा के लिए 'रॉकेट साइंस' की जरूरत नहीं. उसे हर दिन इतने विपुल अनुभव मिलते हैं कि थोड़ा-थोड़ा सहेजते, समझते जाएं तो जिंदगी आसानी से चलती जाती है.

जब घर में स्वादिष्ट सब्जी बनती है, तो अक्सर कम पड़ जाती है. इसका उल्टा भी होता है, जब किसी वजह से उसमें स्वाद न हो तो उसे खत्म करना मुश्किल हो जाता है. जीवन में सुख और दुख का हिसाब ऐसा ही है!

जो समय अनुकूल होता है, वह इतनी तेजी से बीत जाता है कि हमारे समझने से पहले ही उसकी विदाई हो जाती है. उसके बाद जो समय शुरू होता है काटे नहीं कटता, हम उसे गिनने में लगे रहते हैं.
इसीलिए तो जिसे हम अच्छा मानते हैं, वह तेजी से गुजर जाता है. जिसमें मुश्किलें होती हैं, उसकी रातें कटती नहीं.




#जीवन संवाद : मन का पोषण!

राजस्थान, जयपुर से सुलेखा तिवाड़ी लिखती हैं, 'जब सब कुछ अच्छा चल रहा होता है तो उसे बांध पाना मुश्किल होता है. जब गाड़ी पटरी से उतरने लगती है तो उसे संभालना असंभव क्यों लगता है.' उनके उत्तर में मैंने यह सब्जी वाला उदाहरण दिया. उन्हें यह इतना पसंद आया कि मैंने आज इसे आपके सामने रखा.

जिंदगी को प्रेरणा के लिए 'रॉकेट साइंस' की जरूरत नहीं. उसे हर दिन इतने विपुल अनुभव मिलते हैं कि थोड़ा-थोड़ा सहेजते, समझते जाएं तो जिंदगी आसानी से चलती जाती है.

#जीवन संवाद: रिश्ते में श्रेष्ठता का पेंच!

अब मूल प्रश्न की ओर लौटते हैं. जब जीवन में अनुभव खट्टे होने लगें. मिठास कम होने का अनुभव हो तो क्या करना चाहिए. अगर आप किसी ईश्वर, व्यक्ति, प्रकृति में विश्वास करते हैं तो अपनी पीड़ा में उनको भागीदार बनाइए. अगर ऐसा नहीं है, आप यह मानते हैं कि आप जो भी हैं, अपने ही कारण हैं, तो अपने पर भरोसा दोगुना कर लीजिए!

#जीवनसंवाद: सुख की खोज और EMI!

आप समझ रहे हैं ना! दो रास्तों के अलावा हमारे पास कोई दूसरा मार्ग नहीं है.
जिस पर भी विश्वास है, अटूट और संपूर्ण होना चाहिए. जीवन के प्रति दृष्टिकोण में अधूरापन, अविश्वास की कमी सबसे बड़ी बाधा हैं. इ
सलिए जब आप के अनुरूप कुछ ना हो रहा हो तो यह मान कर चलिए यह वक्त थोड़े ठहराव का है. आत्म चिंतन और स्वयं को बेहतर बनाने का है. दूसरों की निंदा, आलोचना और डर से अपने जीवन को भयभीत नहीं बनाना है. आप सही हैं तो अपने दृष्टिकोण पर टिके रहिए.
अगर कहीं कुछ गलती दिखती है, तो अपने को दुरुस्त कीजिए! जीवन बार-बार मिलने वाली चीज़ नहीं. ओस की बूंद सरीखा, पवित्र और ताजा, प्रकृति का आशीर्वाद है जीवन!


#जीवन संवाद : प्रेरणा कहां से आती है!

आपकी किसी में आस्था हो यह जरूरी नहीं! लेकिन इतना अवश्य होना चाहिए कि जीवन में आपकी गहरी आस्था हो. कड़वे और खट्टे अनुभव से बाहर आने का बहुत ही सरल और अचूक उपाय है, यह भी गुजर जाने का सिद्धांत! जो भी है, उसे गुजरना ही है. इसलिए, सुख और दुख में हमें एक जैसा बने रहने का अभ्यास करना होगा. पूरी दुनिया उथल-पुथल से गुजर रही है. समाज उसके मूल्य बहुत तेजी से बदल रहे हैं, हम पर उनका असर होना स्वाभाविक है. इसलिए सुख-दुख की समानता का अभ्यास करना अनिवार्य है. हमेशा की तरह अपने अनुभव हमसे साझा करते रहें.

पता : दयाशंकर मिश्र (जीवन संवाद)
Network18
एक्सप्रेस ट्रेड टावर, 3rd फ्लोर, A विंग
सेक्टर 16 A, फिल्म सिटी, नोएडा (यूपी)
ईमेल : dayashankarmishra2015@gmail.com
अपने सवाल और सुझाव इनबॉक्‍स में साझा करें:
(https://twitter.com/dayashankarmi )(https://www.facebook.com/dayashankar.mishra.54)

Tags: Dayashankar mishra, Effect on your life, JEEVAN SAMVAD

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