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#जीवनसंवाद : तनाव और रिश्तोंं में जंग!

दयाशंकर मिश्र | News18Hindi
Updated: May 23, 2020, 9:47 PM IST
#जीवनसंवाद : तनाव और रिश्तोंं में जंग!
#जीवनसंवाद : तनाव और रिश्तो में जंग!

#JeevanSamvad: जब भी जिंदगी से दूर जाने के ख्याल मन में हों, सबसे पहले उनका ध्यान कीजिए जो आपके नहीं रहने पर कहीं के नहीं रहेंगे. थोड़े से प्रश्न आपको, आपके अपनों को बहुत बड़े संकटों से बचा सकते हैं.

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'लॉक डाउन' ने हमारे आर्थिक जीवन के साथ ही सामाजिक और पारिवारिक जीवन को भी बदलना शुरू कर दिया है. देशभर से परिवार में बढ़ते तनाव और दर्द की खबरें आने लगी हैं. बहुत पुरानी बात नहीं है, जब हम साथ रहने के लिए तरस रहे थे. हम इसी तरह की तो बातें कर रहे थे, कि परिवार के लिए हमें समय नहीं मिल रहा. काश! थोड़ा सा समय परिवार के लिए मिल जाए. सारी बातें सच हो गईं. मन की इच्छा को कोरोना ने पूरा कर दिया. अब हम चाह कर भी परिवार से दूर नहीं जा सकते.

ऐसे में होना यह चाहिए था एक-दूसरे के साथ अच्छा समय बीतता. उन कामों पर ध्यान दिया जाता जो अधूरे पड़े थे. बच्चों और परिवार के बीच स्नेहन का काम होना चाहिए था. लेकिन कहानी उलटी हो गई! परिवार के बीच तनाव रहने लगा. हम कल होने वाली चिंता के चक्कर में इतना डर गए कि हमने आज को ही मुश्किल में डाल दिया.

नौकरी जाने की आशंका में लोग आत्महत्या करने लगे. ऐसे परिवारों से यह सब हो रहा है जिनके पास संयुक्त रूप से संकट से लड़ने का कहीं बेहतर इंतजाम है. लेकिन बाहर से एक दिखने वाले यह परिवार भीतर से कहीं अधिक टूटे हुए हैं. कुछ दिन पहले ही हमने जीवन संवाद में इस बात पर संवाद किया था कि संयुक्त परिवार में न‌ होने का अर्थ अलग-अलग रहना नहीं है, बल्कि मानसिक रूप से एक-दूसरे के सुख-दुख से अलग हो जाना है. हम एक-दूसरे से इतने अलग हो गए हैं कि परिवार में हर किसी का संकट 'संयुक्त' की जगह 'स्वतंत्र' हो गया है. इसीलिए तनाव को सहना इतना मुश्किल हो गया. निजी स्वतंत्रता की बात करते-करते हम एकदम अकेले हो गए!



हम अपने मन की बात दोस्तों से कहने में डरने लगे. परिवार से कहते नहीं. पड़ोसी से हमारे संबंध और अधिक असहज हो चले हैं. ऐसे में नौकरी की चिंता, पति पत्नी के तनाव और मनमुटाव की बातें किससे कही जाएं! इसका असर यह हुआ कि हम डॉक्टरोंं की ओर निकल गए. नींद ना आने की शिकायतें बढ़ती जा रही हैं. डॉक्टरों के पर्चे बढ़ते जा रहे हैं. लेकिन मन लगातार अकेला और परेशान होता जा रहा है.




हमारे मन की बनावट कुछ ऐसी है कि हम नए आदमी से ज़रा ज्यादा खुल जाते हैं. उससे, जिससे हमारी बात का दूसरों तक पहुंचने का खतरा न हो. इसीलिए हम सोशल मीडिया में नए दोस्त बनाते हैं. डॉक्टरों की सेवाएं खरीदते हैं. लेकिन अपनी असली पूंजी मित्र परिवार और रिश्तेदारों से दूर होते रहे हैं. सोशल मीडिया पर जैसे ही आप अनजान लोगों से दोस्ती के खतरे उठाते हैं, मन का बोझ हल्का करने के लिए वैसे ही आप अपने को ऐसे संकट की ओर धकेलने लगते हैं जिसकी आपने कल्पना भी नहीं की होगी.
सोशल मीडिया पर ठगी केबढ़ते कारोबार असल में हमारे अकेले होते जाने की भी कहानी है. परिवार और पति पत्नी के बीच अलग-अलग चीजों पर मनमुटाव होना नई बात नहीं. लेकिन इसे दिल से लगाने की जरूरत नहीं. चीज़ों को बेहतर बनाने की कोशिश कीजिए, अगर पूरी शक्ति लगाने के बाद भी ऐसा ना हो पाए, तो रिश्ते को खूबसूरत मोड़़ पर छोड़ दीजिए. लेकिन अपने जीवन को दांव पर मत लगाइए.


आपका प्यार केवल वही नहीं है जिसके लिए/ कारण आप आत्महत्या कर रहे हैं. वह भी आपका प्यार है जो आपके नहीं रहने पर पूरी उम्र आंसुओं में तबाह कर लेंगे. उनका कुछ तो ख्याल कीजिए. इतने निष्ठुर मत बनिए. जीवन में जब भी जिंदगी से दूर जाने के ख्याल हों, सबसे पहले उनका ध्यान कीजिए जो आपके नहीं रहने पर कहीं के नहीं रहेंगे. थोड़े से प्रश्न आपको, आपके अपनों को बहुत बड़े संकटों से बचा सकते हैं. हर संकट को बहुत निजी मत बनाइए, यह हम सबके लिए परेशानी का कारण बन सकता है. जीना इतना मुश्किल नहीं, जितना हमने बना लिया है.

दयाशंकर मिश्र
संपर्क: ई-मेल: dayashankarmishra2015@gmail.com. आप अपने मन की बात फेसबुक और ट्विटर पर भी साझा कर सकते हैं. ई-मेल पर साझा किए गए प्रश्नों पर संवाद किया जाता है.
(https://twitter.com/dayashankarmi )(https://www.facebook.com/dayashankar.mishra.54)

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First published: May 8, 2020, 6:55 AM IST
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