#जीवनसंवाद : डिप्रेशन पर युवा लड़की की चिट्ठी!

#जीवनसंवाद : डिप्रेशन पर युवा लड़की की चिट्ठी!
#जीवनसंवाद : डिप्रेशन पर युवा लड़की की चिट्ठी!

#JeevanSamvad: डिप्रेशन को अनदेखा करना हमारे अपने लोगों के लिए बहुत बड़ा खतरा साबित हो सकता है. यह धीरे-धीरे संक्रामक होता जा रहा है. डिप्रेशन तेजी से हमारे बीच बढ़ रहा है. जितना हम समझ पा रहे हैं, उससे कहीं अधिक तेजी से.

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मैं उसे बहुत पहले से जानता हूं. संभवत: तब से जब उसने पहली नौकरी शुरू की थी. एक निडर, बहादुर और मिलनसार लड़की. उसके व्यवहार में जिस किस्म की स्पष्टता है, वैसी आज से दस बरस पहले किसी कस्बे से आने वाली लड़की में कम ही देखने को मिलती. उसके लेखन में मौलिकता, कोमलता और प्रकृति के प्रति प्रेम है. हमारी कल ही बात हुई है, और उसके बाद मैं उसकी कहानी पर ही 'जीवन संवाद' लिखने बैठ गया. ऐसा इसलिए, क्योंकि उसकी बातों ने मुझे उस खतरे को और अधिक बढ़ता हुआ देखने में मदद की जिसके बारे में कुछ वर्षों से मैं निरंतर निवेदन कर रहा हूं. इस बात को इसलिए दोहराना जरूरी है, क्योंकि मुझे नहीं पता यह बात कितने लोगों तक पहुंच रही है. लेकिन डिप्रेशन को अनदेखा करना हमारे अपने लोगों के लिए बहुत बड़ा खतरा साबित हो सकता है. यह धीरे-धीरे संक्रामक होता जा रहा है.

डिप्रेशन तेजी से हमारे बीच बढ़ रहा है. जितना हम समझ पा रहे हैं, उससे कहीं अधिक तेजी से. इस युवा समझदार, बहादुर लड़की ने मुझे बताया कि डिप्रेशन के दौरान उसके अनुभव कैसे रहे. उनका यहां जिक्र इसलिए भी किया जाएगा ताकि अगर ऐसे अनुभव किसी को महसूस हो रहे हैं वह उस पर कड़ी नजर रख पाए. उसकी एक बात और महत्वपूर्ण है कि जरूरी नहीं, घर से दूर रह रहे युवा ही अकेलेपन और डिप्रेशन से लड़ रहे हों. इन दिनों जो बच्चे किशोर, युवा है उनकी यह शिकायत लगातार हो रही है कि उन्हें समझा नहीं जा रहा. कोई उन्हें समझ नहीं रहा. उनके सवाल, इच्छा और आकांक्षा की लगातार अनदेखी की जा रही है.

इस बहादुर लड़की का एक अच्छे डॉक्टर की देखरेख में पिछले चार महीने से इलाज चला. अब वह पूरी तरह से ठीक है. अपना ख्याल रख रही है. इतना ही नहीं बल्कि मेरी तरह उसे भी 'लॉक डाउन' से कोई मानसिक कष्ट नहीं है. क्योंकि उसके पास चिंता करने के लिए अधिक समय नहीं है. यहां ध्यान रखिए कि जब यह कहा जा रहा है कि चिंता करने के लिए अधिक समय नहीं है, तो इसका संबंध प्रसन्न 'चित्त' से है. हमारे दिमाग की सही ट्रेनिंग बहुत जरूरी है. चीज़ों को संभालने के लिए अपने दिमाग़ को जिस तरह तैयार करते हैं पूरी जिंदगी हम उसी के अनुरूप बिताते हैं.




इस बहादुर लड़की ने जिन लक्षणों का जिक्र किया है. इनके प्रति थोड़ा सजग होने की जरूरत है. इसके साथ ही मैं इसमें कुछ दूसरे लोगों के अनुभव, एम्स जैसे संस्थानों की सलाह को भी जोड़ रहा हूं. यह लक्षण इस प्रकार हैं-



1. अपने काम से वापस आने पर, किसी काम में मन ना लगना. लगातार शून्य में चले जाना. एक ही स्थिति में बहुत देर तक बैठे रहना. 2. किसी से भी बात करने से कतराना. किसी परिचित और पुराने मित्र से भी बात करने की इच्छा न होना.
3. उन चीज़ों से मन हट जाना जिनके बिना रहना ही मुश्किल लगता था. जैसे किताबें, फिल्में, वीडियो देखना. दोस्तों से निरंतर बात करना.
4. अपने सहकर्मी, ऑफिस में काम करने वालों से बिनाा मतलब झगड़ना. हर बात पर भावुक हो जाना और उसे तर्क से परे ले जाकर छोटी-छोटी बात को बड़ा करना.
5. रिश्तों के टूटने (ब्रेकअप) को इतना अधिक महत्व दे देना कि उसके बिना अपने होने की कल्पना ही न हो.
6. हर चीज़ के लिए खुद को जिम्मेदार मानना.
7. निर्णय करने की जगह, हर बात को टालते रहना. हर वक्त चिंता में डूबे रहना. अत्यधिक सोच-विचार (ओवरथिंकिंग )में डूबे रहना.
8. मेरे नहीं रहने से क्या फर्क पड़ेगा, अक्सर ऐसे ख्याल का दिमाग में आते रहना.

इनमें सभी लक्षण तो नहीं आ पाए हैं लेकिन फिर भी मान सकते हैं कि महत्वपूर्ण बातें आ गई हैं. इसमें सबसे अंतिम बात पर बहुत अधिक ध्यान देने की जरूरत है. जैसे-जैसे यह ख्याल बड़ा होता जाता है, हम डिप्रेशन की ओर तेजी से बढ़ने लगते हैं.

जिस तरह बुखार होने पर डॉक्टर के पास जाने में डर नहीं लगता. एक डॉक्टर के यहां ठीक ना होने पर सरलता से दूसरे डॉक्टर की ओर बढ़ जाते हैं. ठीक उसी तरह मन को भी समझें. अगर मन में कुछ गड़बड़ है तो उसे तेज़ी से पकड़ने की कोशिश करें. मन, हमारी ऊर्जा का सबसे प्रमुख केंद्र है. वहां हुई हलचल का असर पूरे शरीर और दिमाग पर बहुत तेज़ी से पड़ता है. इसलिए मन की गहराई में चल रहे विचारों के प्रति सतर्क रहिए. और जब कभी मन उदास हो खराब लगे तो बात कीजिए. संवाद कीजिए. खुद को रोकिए मत. यह आप पर बहुत भारी पड़ सकता है. शुभकामना सहित....
दयाशंकर मिश्र
संपर्क: ई-मेल: dayashankarmishra2015@gmail.com. आप अपने मन की बात फेसबुक और ट्विटर पर भी साझा कर सकते हैं. ई-मेल पर साझा किए गए प्रश्नों पर संवाद किया जाता है.
(https://twitter.com/dayashankarmi )(https://www.facebook.com/dayashankar.mishra.54)

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