#जीवनसंवाद : प्यार की गुलामी!

#जीवनसंवाद : प्यार की गुलामी!
#जीवनसंवाद : प्यार की गुलामी!

#JeevanSamvad: किसी के जीवन में प्रवेश करते समय वृक्ष की छाया की तरह प्रवेश करना चाहिए. खामोशी और खूबसूरती से. धीरे-धीरे. अगर उसके जीवन से निकलना जरूरी हो जाए तो निकलना भी छाया की तरह चाहिए. शांति और स्नेह के साथ.

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उन्होंने बोलना शुरू करने के पहले रोना शुरू कर दिया. फिर धीरे-धीरे अपनी बात समाप्त की. उनका मन पीड़ा से पीला हुआ जा रहा है. प्रेम किसी को कितना बीमार कर सकता है! हमारे प्रेम पर देखे- सुने की गहरी छाया है. हम प्रेम भी वैसे ही करते हैं जैसे किताबों में पढ़ते और सिनेमा में देखते हैं. हमारी स्वतंत्र दृष्टि की इससे बड़ी पहचान क्या हो सकती है! हम अपने अनुभव तक को दूसरों से स्वतंत्र नहीं रख पाते. कितना अच्छा होता, प्रेम पर कब्जे और गुलामी की जगह थोड़ा सा सूफियाना रंग छाया होता. इतने वर्षों तक गुलाम रहने के कारण हमारी चेतना में गुलामी गहरे उतर गई है. किसी के साथ एक रिश्ते में लंबे समय तक रहने का यह अर्थ नहीं होता कि आपका आजीवन उस पर कब्जा हो गया!

किसी भी कीमत पर प्रेम को हासिल करने का दावा, युद्ध और प्रेम में सब कुछ जायज है, सरीखी बातें कोई बेहोशी में ही कर सकता है. होश में नहीं. सब कुछ कभी जायज नहीं होता. हम अपनी सुविधा से उसे जायज बनाते हैं. ऐसा कहने वाले कभी प्रेमी तो नहीं हो सकते. हां, राजनेता हो सकते हैं. बीमार हो सकते हैं. इसलिए, मेरे ख्याल में जो यह कहते हैं कि युद्ध और प्रेम में सब जायज है, ऐसा करते हुए वह भूल जाते हैं वह जिसे प्रेम समझ रहे हैं वह केवल एक आवेश है. एक उत्तेजना, आंधी है, रंग है दिमाग का. जो अभी हम पर हावी है.

मध्य प्रदेश के ग्वालियर से सोमवार देर रात फोन आया. बात शुरू होने से पहले ही आवाज में बेचैनी और लड़खड़ाहट थी. उनका परिवार आर्थिक रूप से हर प्रकार से सुरक्षित है. वह स्वयं एक अच्छी नौकरी में हैं. ऐसी नौकरी में जिसे देश में हर प्रकार से सुरक्षित और अच्छा माना जाता है. वह इस बात से परेशान थीं कि जिस व्यक्ति से उन्हें प्रेम है, उसके प्रति पिछले कुछ समय से संदेह के बादल गहराते जा रहे हैं. पहले उसने अतीत छुपाया. उसके बाद ऐसा लग रहा है जैसे वह उनसे मुक्ति के प्रयास कर रहा है.



उनकी उम्र तीस बरस के आसपास होगी. उन्होंने बताया कि इस रिश्ते में लंबे समय से होने के कारण अब वह भावनात्मक रूप से बहुत अधिक कमजोर महसूस कर रही हैं.



पहली बात तो यह कि जो आप से मुक्त होना चाह रहा है, आप उसे जबरन अपने पास नहीं रोक सकते. क्योंकि एक बार आसमान में परिंदा उड़ गया तो वह लौटकर आपके पिंजरे की ओर नहीं आएगा. मुझे तो यह पिंजरे का विचार कभी जमा ही नहीं. जिससे प्रेम करते हो, उसे बांध कैसे सकते हो. प्रेम एक नदी की तरह है. नदी को बांधा नहीं जाता, उसके साथ बहा जाता है.



कैसा रिश्ता, जिसके लिए दिमाग में आज कब्जे का विचार आ रहा है वह कैसे जीवन में सुख दे सकता है. दो लोगों के बीच अगर इतनी दूरी पड़ गई है थी कि कोई एक उससे निकलना चाहता है. वह इसलिए बाहर निकलना चाहता है, क्योंकि उसे रिश्ता पिंजरे की तरह लगता है. तो ऐसे संबंध को बचा कर क्या कीजिएगा.

किसी के जीवन में प्रवेश करते समय वृक्ष की छाया की तरह प्रवेश करना चाहिए. खामोशी और खूबसूरती से. धीरे-धीरे. अगर उसके जीवन से निकलना जरूरी हो जाए तो निकलना भी छाया की तरह चाहिए. शांति और स्नेह के साथ. हम भूलते जा रहे हैं कि हमारा अस्तित्व किसी एक व्यक्ति के कारण नहीं है. प्रेम अच्छी चीज़ है. उसे संभालने की कोशिश होनी चाहिए. लेकिन कब्जे और अतिक्रमण वाले मन के साथ नहीं.

जो जाना चाहता है उसे केवल स्नेह से रोका जा सकता है. जो प्रेम और अनुराग से नहीं रुक सकता वह हमारे आंसुओं और कोलाहल से कभी नहीं रुकेगा. जीवन बहुत खूबसूरत है, उसे बंद गलियों में कैद मत कीजिए. गुलामी हर चीज की सुंदरता को नष्ट कर देती है. भले ही वह प्रेम ही क्यों न हो. मुक्ति ही आनंद है. स्वतंत्रता जीवन का एकमात्र लक्ष्य होना चाहिए. दो स्वतंत्र लोग ही जीवन में एक-दूसरे से सच्चा प्यार कर सकते हैं. अपने मन को थोड़ा तौलिए, परखिए. आपका प्रेम कौन सा वाला है. स्वतंत्रता वाला या गुलामी वाला!

दयाशंकर मिश्र
संपर्क: ई-मेल: dayashankarmishra2015@gmail.com. आप अपने मन की बात फेसबुक और ट्विटर पर भी साझा कर सकते हैं. ई-मेल पर साझा किए गए प्रश्नों पर संवाद किया जाता है.
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