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    #जीवनसंवाद: याद रखने लायक!

    जीवन संवाद
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    #JeevanSamvad: जिंदगी में हम जितना जल्दी याद रखने लायक और भूलने लायक चीजों का फैसला कर लेंगे, हमारी जिंदगी तनाव और अवसाद से उतनी शीघ्रता से दूर होती जाएगी.

    • News18Hindi
    • Last Updated: November 18, 2020, 11:45 PM IST
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    हमारी रोजमर्रा की जिंदगी में कुछ न कुछ ऐसा घटता रहता है, जो मन की सतह पर जमता जाता है. अगर उसे समय रहते साफ न किया जाए, तो संकट गहरा होता जाता है. याद रखने लायक क्‍या है और क्‍या ऐसा है जिसे भुलाते जाएं. हमारा ध्यान इस ओर कम ही जाता है. जैसा घर की साफ-सफाई के दौरान होता है, बेकार चीजें भी हम किसी कोने में इकट्ठी करते चले जाते हैं. धीरे- धीरे कबाड़ हम ही तो इकट्ठा करते हैं. ठीक, इसी तरह मन में कबाड़ इकट्ठा होता जाता है, हम उसे इकट्ठा होने देते हैं! भूलने लायक बातों को हम याद रखते जाते हैं, याद रखने लायक बातों को भूलते जाते हैं. जिंदगी में एक तरीके की यह बुनियादी गलती है. इसी गलती पर आगे बढ़ते हुए हमारा दिमाग कहानियां बनाने लगता है. ठीक उसी तरह जैसे कड़वे में कुछ भी मिलाइए, तो कड़वाहट की मात्रा बढ़ती ही जाएगी. जिंदगी में छोटी-छोटी खराब यादों को मिलाकर हम कड़वाहट बुनते ही जाते हैं. दिमाग हमारे दिखाए रास्ते पर ही चलता है. हम उसे अनजाने ही ऐसे रास्ते की ओर धकेलते रहते हैं, जहां घृणा और नफरत एक-दूसरे के लिए पनपती जाती है.


    अपने आसपास लोगों को थोड़ा ध्यान से देखिए. आप आसानी से समझ जाएंगे कि कौन किस तरफ बढ़ रहा है. लोग अपनी स्मृतियों से चिपके रहते हैं. जीवन में चुनाव हमारा है, स्मृति का नहीं. रेल की पूरी यात्रा में किसी एक व्यक्ति के दुर्व्यवहार का अर्थ यह नहीं हुआ कि आप आगे से यात्रा करना बंद कर दें. इसका अर्थ केवल यह हुआ कि थोड़ी सावधानी जरूरी है, लेकिन पूरे जीवन अगर आप एक शानदार यात्रा के अनुभव को भुलाकर कुछ खराब अनुभवों को मन से चिपकाए रखते हैं, तो यह लेख फिर आपके लिए ही है!


    एक छोटी-सी कहानी आपसे कहता हूं, संभव है इससे मेरी बात अधिक स्पष्ट हो पाए. दो भाई नदी किनारे खेल रहे थे. एक दिन बड़े भाई ने छोटे भाई को एक थप्पड़ मार दिया. छोटे भाई ने रेत पर लिखा- भैया ने थप्पड़ मारा. कुछ दिन बाद डूबते हुए छोटे भाई को बड़े भाई ने बचाया. छोटे भाई ने चट्टान पर लिखा, भैया ने जीवन बचाया. बड़े भाई ने पूछा, इस बार चट्टान पर क्यों लिखा! छोटे भाई ने उत्तर दिया, मैं जीवनभर याद रखना चाहता हूं कि आपने मेरा जीवन बचाया. आपने मुझे थप्पड़ मारा था, मैं उसे तुरंत भूल जाना चाहता था, इसलिए रेत पर लिखा! जब भी कोई ऐसी स्मृति मेरे अपने जीवन में दस्तक देती है, जिसमें थोड़ी भी कड़वाहट हो, कुछ अप्रियता हो, तो मैं उसे तुरंत ही कचरे की तरह घर से बाहर निकाल देने की कोशिश करता हूं. हमेशा तो यह आसान नहीं होता, लेकिन इतना पूरे विश्वास से कह रहा हूं कि यह असंभव नहीं.
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    जिंदगी में हम जितना जल्दी याद रखने लायक और भूलने लायक चीजों का फैसला कर लेंगे, हमारी जिंदगी तनाव और अवसाद से उतनी शीघ्रता से दूर होती जाएगी.​

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