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#जीवनसंवाद: बंद दरवाजे!

#जीवनसंवाद: बंद दरवाजे!

प्रेम क्या गणित, कठिन पहेली है, जिसकेे लिए दुनिया के श्रेष्ठ दिमाग का होना जरूरी है! क्या यह कोई रॉकेट साइंस है जिसके लिए वैज्ञानिक पृष्ठभूमि के बिना काम नहीं चल सकता!

प्रेम क्या गणित, कठिन पहेली है, जिसकेे लिए दुनिया के श्रेष्ठ दिमाग का होना जरूरी है! क्या यह कोई रॉकेट साइंस है जिसके लिए वैज्ञानिक पृष्ठभूमि के बिना काम नहीं चल सकता!

बच्चे को हम सिखाते हैं कि कैसे वह सारी दुनिया के लिए मन में बैठे प्रेम को संकुचित करे. उसके मन में तो प्रेम की नदी है, बांध तो हम उस पर बनाते हैं!

    बच्चा छोटा होता है तो उसका मन कितना कोमल होता है. फूल की तरह, जाड़े की गुनगुनी धूप की तरह. उससे अनुराग का मूलाधार उसकी कोमलता, मासूमियत ही तो होती है. जैसे-जैसे हम बड़े होते हैं, 'समझदारी' की ओर बढ़ते हैं, हमारी कोमलता कम होती जाती है. हम अनुराग की जगह 'गणित' की ओर बढ़ते जाते हैं. किसी को विशुद्ध रूप से प्रेम करने की जगह हम उसमें प्रेम करने के कारण खोजने लगते हैं.

    किसी बच्चे और 'बड़े' में मुझे केवल यही अंतर समझ आता है. बच्चे के भीतर सहजता, कोमलता और स्नेह तीन सबसे बड़े तत्व हैं, जिससे वह सहज ही दूसरे की ओर आकर्षित होता है. दूसरे उसकी ओर दौड़े चले आते हैं.

    कैसा विचित्र संयोग है कि उम्र बढ़ने के साथ उस बच्चे से प्रेम करने वालों की संख्या कम होती जाती है. जबकि वह समझदार हो रहा है. ऐसे में तो उससे प्रेम करने वालों की संख्या बढ़नी चाहिए. उसके अनुराग का दायरा बढ़ना चाहिए, लेकिन होता इसका उल्टा है. बच्चा जैसे-जैसे बड़ा होता है वह प्रेम के तराजू पर स्नेह के कारण, परिणाम खोजने लगता है. जब वह छोटा होता है, कभी नहीं सोचता कि कोई मुझसे प्रेम क्यों करता है. वह केवल प्रेम पर फ़िदा रहता है. वह अपनी ओर आने वाली कोमलता, स्नेह के लिए खिड़कियां और दरवाज़े कभी बंद नहीं करता. यह तो हम उसे सिखाते हैं कि किससे कितना प्रेम करना है!

    Dear Zindagi
    प्रेम क्या गणित, कठिन पहेली है, जिसके लिए दुनिया के श्रेष्ठ दिमाग का होना जरूरी है! क्या यह कोई रॉकेट साइंस है जिसके लिए वैज्ञानिक पृष्ठभूमि के बिना काम नहीं चल सकता!


    बच्चे को हम सिखाते हैं कि कैसे वह सारी दुनिया के लिए मन में बैठे प्रेम को संकुचित करे. उसके मन में तो प्रेम की नदी है, बांध तो हम उस पर बनाते हैं. अमीर खुसरो कहते हैं, 'जब तक हम इंसान एक दूसरे के प्रेम को सही तरह से नहीं समझ पाएंगे, ईश्वर के प्रेम को पाना तो दूर, समझना भी संभव नहीं'.

    प्रेम क्या गणित, कठिन पहेली है, जिसके लिए दुनिया के श्रेष्ठ दिमाग का होना जरूरी है! क्या यह कोई रॉकेट साइंस है जिसके लिए वैज्ञानिक पृष्ठभूमि के बिना काम नहीं चल सकता! मेरे खयाल में प्रेम के लिए इनमें से किसी की जरूरत नहीं.

    मैंने जीवन में जितना भी प्रेम करना सीखा, वह एक ऐसे व्यक्ति से जिनका गणित और विज्ञाान का ज्ञान एकदम सामान्य है. वह कोई और नहीं मेरे पिता हैं. हमें सिखाया कैसे केवल प्रेम से भी रिश्ते बने रह सकते हैं. उसमें अपेक्षा का लेप असल में रिश्तों की उम्र कम करने के साथ तनाव बढ़ाने वाला भी होता है. सुनने में यह बात बहुत किताबी किस्म की लगती है, लेकिन इसका उपयोग बेहद सरल, सरस और जीवन को आसान करने वाला है. अपने संबंधों में हम अपेक्षा का पुट जितना कम रखेंगे, जिंदगी में प्रेम की संभावना उतनी ही अधिक रहेगी. प्रेम की खिड़कियां और दरवाजे कभी हमारे लिए बंद नहीं होंगे. हां कभी-कभी, उनमें जाले लग सकते हैं, लेकिन हम सब जानते हैं जाले हटाना आसान होता है, जबकि बंद दरवाजों को खोलना कहीं मुश्किल. इसलिए हमें अपने भीतर और बाहर प्रेम को सहज बनाए रखने की जरूरत है. जो जैसा है उसे वैसा स्वीकार करिए और अपेक्षा से जितना संभव हो दूर रहिए.

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    Tags: Dear Zindagi, Effect on your life, JEEVAN SAMVAD, Life Coach, Lifestyle, Motivational Story

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